मलेरिया के टीके ने जगाई उम्मीद

मलेरिया का टीका
Image caption नए टीके में मलेरिया पैदा करने वाले परजीवियों की कमज़ोर प्रकार का इस्तेमाल किया गया है.

अमरीका में किए गए एक शोध में मलेरिया को रोकने के लिए बनाए गए एक टीके ने उम्मीद जगाई है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इस टीके को ज़्यादा मात्रा में दिए जाने से मलेरिया से पीड़ित 15 रोगियों में से 12 का बचाव सुनिश्चित किया जा सका.

इस अनोखे तरीके में पीड़ित के शरीर में मलेरिया पैदा करने वाले परजीवी को सीधे डाला गया ताकि उसके भीतर प्रतिरक्षा पैदा की जा सके.

इस शोध की जानकारी 'साइंस' पत्रिका में छपी है.

अमरीका के मेरीलैंड में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ के वैक्सीन रिसर्च सेंटर के डॉक्टर रॉबर्ड सेडर ने कहा, "हम शोध के नतीजों से बहुत उत्साहित हैं लेकिन ये ज़रूरी है कि हम इस तरीके को दोहराएँ और ज़्यादा लोगों पर इसकी परीक्षा करें."

हज़ार बार काटे मच्छर

ये तथ्य तो कई दशकों से पता है कि विकिरण या रेडियेशन दिए गए मच्छरों के काटने से मलेरिया से बचा जा सकता है.

लेकिन अध्ययन दिखाते हैं कि इस तरह के मच्छर लंबे समय तक 1,000 से ज़्यादा बार आपको काटें, तभी शरीर में मलेरिया के खिलाफ़ प्रतिरक्षा पैदा हो सकती है. इसलिए मलेरिया से बचाव का ये एक अव्यावहारिक तरीका है.

Image caption मलेरिया से हर साल लगभग छह लाख लोग मरते हैं और 20 करोड़ से ज़्यादा संक्रमित होते हैं.

इसकी जगह अमरीका की एक बायोटेक कंपनी सनेरिया ने प्रयोगशाला में पैदा हुए मच्छरों को विकिरण देकर उनमें से मलेरिया पैदा करने वाले परजीवी प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम को निकाला.

इन जीवित लेकिन कमज़ोर परजीवियों को फिर सीधे मरीज़ के खून में डाला गया.

पहले फ़ेस के क्लीनिकल परीक्षणों में शोधकर्ताओं ने 57 लोगों को चुना जिन्हें कभी मलेरिया नहीं हुआ था.

इनमें से सिर्फ़ 40 लोगों को टीके की विभिन्न मात्रा दी गई लेकिन पूरे समूह को मलेरिया फ़ैलाने वाले मच्छरों के साथ रखा गया.

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को टीका नहीं दिया गया, या फिर जिन्हें कम मात्रा में टीका दिया गया, उनमें से लगभग सभी को मलेरिया हो गया.

लेकिन 15 लोगों के जिस गुट को टीके की ज़्यादा मात्रा दी गई, उनमें से से सिर्फ़ तीन लोगों को मलेरिया हुआ.

डॉक्टर रॉबर्ट से़डर कहते हैं, "पुराने शोध के आधार पर हमें पता था कि टीके में दी जाने वाली मात्रा बेहद ज़रूरी है क्योंकि मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों का 1,000 बार काटना ज़रूरी है. इस शोध से ये बात साबित होती है."

कितना कारगर?

उनका कहना था, "अगला महत्वपूर्ण सवाल ये है कि क्या ये टीका लंबे समय तक कारगर रहेगा और क्या ये टीका मलेरिया के और प्रकारों से मनुष्य को बचा सकता है?"

डॉक्टर सेडर के मुताबिक इस टीके को सीधे रक्तप्रवाह में डालना होता है जो थोड़ा मुश्किल होता है.

इस शोध पर टिप्पणी करते हुए पाथ मलेरिया वैक्सीन इनिशियेटिव के डॉक्टर ऐशले बर्केट कहते हैं, "ये परीक्षणों की शुरुआत है जिसमें बहुत कम संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया है, लेकिन ये सही है कि हम नतीजों से बहुत उत्साहित हैं."

मलेरिया के करीब 20 टीकों का परीक्षण चल रहा है.

इनमें सबसे आगे है ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंपनी द्वारा किया जा रहा परीक्षण जिसमें अफ्रीका के 15,000 बच्चे शामिल हैं और अभी तीसरे दौर का परीक्षण जारी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2010 में दुनिया भर में मलेरिया के 22 करोड़ मामले सामने आए थे और करीब 6 लाख 60 हज़ार लोग मारे गए थे.

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