क्या आप स्वार्थी हैं?

साथ मिलकर काम करने की भावना, सहयोग

धरती पर जीवन के विकास की प्रक्रिया ने कभी भी स्वार्थी लोगों की मदद नहीं की.

एक नए शोध में यह बात कही गई है. इससे पहले तक यह कहा जाता था कि खुद को आगे रखना बेहतर लगता है लेकिन नया शोध पुराने सिद्धांत को चुनौती देता है.

अब यह कहा गया है कि साथ मिलकर काम करना बेहतर रहता है. फैसले लेने के तौर तरीकों से जुड़े अध्ययन में यह मॉडल दिखाया भी गया है.

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'नेचर कम्यूनिकेशन्स' में प्रकाशित इस शोध में अध्ययन करने वाली टीम ने कहा है कि केवल स्वार्थी स्वभाव को ज़्यादा तवज्जो देने की वजह से हमारे अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो जाएगा.

अर्थशास्त्र की गेम थिओरी का विकास साथ मिलकर काम करने की भावना या विवाद की सूरत में पैदा होने वाली परिस्थितियों से जु़ड़ा हुआ है.

भूख पर लगाम?

इससे शोध कर रही टीम ने फैसले लेने की जटिल प्रक्रिया पर गौर किया और किसी परिस्थिति विशेष में किसी व्यक्ति के बर्ताव को समझने की कोशिश की.

आज़ादी या कैद

अमरीका में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की एक टीम ने कैदियों की दुविधा को समझने की कोशिश की. अलग-अलग जेल में बंद दो संदिग्धों से पूछताछ की गई और उनसे कहा गया कि एक दूसरे को इसके बारे में बताने का फैसला उन्हें करना ही होगा.

इसके साथ ही उन्हें यह पेशकश भी की गई कि अगर वे अन्य कै़दी को इस पूछताछ के बारे में बताते हैं तो दूसरों को छह महीने जेल में रहना होगा.

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अगर वे ‘दोनों’ ही एक दूसरे को यह बताने का फैसला करते हैं तो उन्हें तीन महीने जेल में बिताने होंगे लेकिन अगर वे चुप रहने का निर्णय करते हैं तो उन्हें केवल एक महीने की जेल होगी.

एक दूसरे को बताने का फैसला मुख़ालफ़त करने जैसा था और खामोश रहने का फैसला सहयोग करने का था.

जाने-माने गणितज्ञ जॉन नैश ने यह दिखलाया कि इस बात का पूरा ख्याल रखा गया था कि कै़दियों की दुविधा के इस खेल में सहयोग की भावना न हो.

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जॉन नैश कहते हैं, "जिन दो कै़दियों से पूछताछ की गई थी उन्हें एक दूसरे से बातचीत करने की इजाज़त नहीं दी गई. अगर ऐसा होता तो वे एक दूसरे से समझौता करके महीने भर में रिहा हो गए होते लेकिन एक दूसरे से बातचीत न करने की सूरत में उनका झुकाव अन्य को छोड़ने की तरफ होता."

तात्कालिक फायदा

"मतलबी होना आपको थोड़े वक्त के लिए फायदा पहुँचा सकता है लेकिन निश्चित रूप से इसका फायदा लंबे समय के लिए नहीं होगा."

साल 2012 में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया था कि स्वार्थी लोग साथ मिलकर काम करने वाले लोगों के बनिस्बत अधिक तरक्की करते हैं. इससे दुनिया स्वार्थी लोगों से भर जाएगी.

मानव आदतों का राज

नए नतीजे पुराने शोध को चुनौती देते हुए लगते हैं.इसे 'मतलबी और स्वार्थी' तौर तरीके का नाम दिया गया था और इसके नतीजे इस बात पर निर्भर करते थे कि भागीदार अपने प्रतिद्वंदियों के पिछलों फैसलों को ध्यान में रखते हुए उसके अनुसार अपनी रणनीति बनाते हैं.

शोध से जुड़े डॉक्टर अदामी कहते हैं, "यह महत्वपूर्ण है कि विरोधी का फैसला समझ लेना हमेशा ही फायदे में नहीं होता क्योंकि यह मुमकिन है कि आपका विरोधी भी आपके बारे में ऐसे तरीके अपना सकता है."

टीम इस ठीक नतीजे पर पहुँची है कि अलग रहकर काम करने का फायदा हमेशा ही तात्कालिक होता है.

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