नई तकनीक बचाएगी आर्सेनिक के ज़हर से

चीन आर्सेनिक प्रदूषण नक्शा
Image caption (भूगर्मभीय जानकारी की मदद से चीन के आर्सेनिक से प्रभावित होने की संभावना वाले इलाकों को चिन्हित किया गया है)

चीन में करीब दो करोड़ लोगों के आर्सेनिक युक्त पानी से प्रभावित होने की आशंका है.

एक शोध में वैज्ञानिकों ने चीन के भूविज्ञान संबंधी जानकारी से उन क्षेत्रों का अनुमान लगाया है जहां यह विषाक्तता सबसे अधिक हो सकती है.

इस शोध के परिणाम साइंस जनरल में प्रकाशित हुए हैं.

आर्सेनिक प्राकृतिक रूप से धरती की तह में पाया जाता है. लेकिन अगर यह भूमिगत जल में घुल जाता है तो लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने वाले पानी से सेहत को गंभीर खतरे हो सकते हैं.

इससे त्वचा, फेफड़ों, मूत्राशय और गुर्दे का कैंसर हो सकता है.

नए इलाके

अब तक बड़े देशों में आर्सेनिक प्रदूषण के स्तर का अनुमान लगाना मुश्किल था. चीन में एक करोड़ से ज्यादा पीने के पानी के कुएं हैं.

यह जांच करने के लिए उनके पानी में विषैले तत्व नहीं उन सबकी जांच करनी होगी. इस प्रक्रिया में बरसों लग सकते हैं. इसके प्रक्रिया के बजाय स्विट्ज़रलैंड और चीन के शोधकर्ताओं ने देश के भूगर्भीय नक्शे को देखा.

स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एक्वेटिक साइंस एंड टेक्नोलॉजी- ईएडब्ल्यूएजी (जल विज्ञान और तकनीक का स्विस संघीय संस्थान) की डॉ एनेट जॉन्सन इस शोधपत्र की सह लेखक हैं.

वह कहती हैं, "पिछले कुछ सालों में भौगोलिक स्थितियों की जानकारी- इलेक्ट्रॉनिक नक्शे- बहुतायत में उपलब्ध हो गए हैं. आपके पास जलवायु के आंकड़े हैं, भूमि के इस्तेमाल और नदियों से दूरी या ऊंचाई के बारे में जानकारी है."

इस जानकारी का इस्तेमाल करके और चीन में मौजूद चट्टानों के प्रकार, ख़ासकर उनकी आयु को देखकर शोधकर्ता उन क्षेत्रों के सटीक अनुमान लगाने में कामयाब हो गए जहां विषैले तत्वों के पाए जाने की सबसे ज़्यादा आशंका है.

इसके निष्कर्षों के अनुसार चीन में 1.96 करोड़ लोगों के पीने का पानी खतरनाक स्तर का हो सकता है. इनमें से कुछ लोग ऐसे क्षेत्रों में भी रह रहे हैं जिन्हें पहले खतरे से बाहर माना जाता था.

डॉ जॉन्सन ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम साइंस इन एक्शन को बताया, "नदी घाटी और सिंचाई, कृषि वाले कुछ ऐसे इलाके हैं जिनके बारे में पहले से जानकारी थी- जैसे कि भीतरी मंगोलिया में हुहॉट नदी घाटी. लेकिन अब सिचुआन प्रांत में और पूर्वी तट के पास कुछ नए क्षेत्रों का भी पता चला है."

स्वास्थ्य आपातकाल

Image caption नए शोध से आर्सेनिक प्रदूषण की जांच और इसकी रोकथाम में मदद मिल सकती है

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह निष्कर्ष गहन जांच में चीनी अधिकारियों के लिए सहायक हो सकते हैं. डॉ जॉन्सन कहती हैं, "यह बहुत ज़रूरी है कि ज़्यादा प्रभावित इलाकों की जांच सबसे पहले की जाए. वहां प्रदूषित कुएं प्रदूषण रहित कुओं से ज़्यादा संख्या में मिलने की आशंका है. अन्य क्षेत्रों में आपको आर्सेनिक की खोज करनी होगी वह भी ज़्यादा ज़ोर लगाकर नहीं."

वह कहती हैं कि जो कुएं प्रदूषित मिलते हैं उनका शोधन किया जा सकता है या फिर उन्हें बंद करना होगा. शोधकर्ताओं का मानना है कि अनुमान की इस विधि को दुनिया में कहीं और भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

भूमिगत पानी में आर्सेनिक का प्रदूषण मध्य यूरोप, दक्षिणी अमेरिका, अमरीका-एशिया के कुछ भागों में भी मिला है. भारत के सात राज्य- पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम और मणिपुर आर्सेनिक के प्रदूषण से ग्रस्त हैं.

लेकिन सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है बांग्लादेश, जहां आर्सेनिक प्रदूषण को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने "सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" बताया है. अनुमान है कि 3.5 से 7.7 करोड़ लोगों के प्रदूषित पानी के पीने का ख़तरा है.

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