गर्भावस्था के दौरान चाय या कॉफ़ी कितनी हो?

  • 28 अगस्त 2013
Image caption प्रोफेसर एमिली ऑस्टर ने गर्भावस्था के दौरान खाने-पीने की पाबंदियों को परखने की कोशिश की.

एक गर्भवती महिला को अपने अजन्मे शिशु के बेहतर विकास के लिए तमाम तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है. कुछ डॉक्टर ऐसी महिलाओं को कॉफ़ी नहीं पीने तो कुछ एक-दो कप से काम चलाने की सलाह देते हैं.

इसी तरह कुछ डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को कम चीज़ें खाने और अल्कोहल न लेने की हिदायत देते हैं. लेकिन सही स्थिति क्या है इसको लेकर डॉक्टर एकमत नहीं हैं.

गर्भावस्था के दौरान ऐसी ही दुविधाओं से गुज़रने वाली शिकागो विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर एमिली ऑस्टर ने ख़ुद ही इन तथ्यों को परखने की कोशिश की.

इस बारे में ऑस्टर कहती हैं कि गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उन्हें कॉफ़ी की ज़बरदस्त तलब महसूस होती थी, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें केवल एक कप कॉफ़ी पीने की इजाज़त दी थी.

इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर इस बारे में खोज की. वह सर्च रिजल्ट देखकर आश्चर्यचकित हो गईं. इस बारे में न तो किताबों की और न ही विशेषज्ञों की राय एक जैसी थी.

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डॉक्टर एकमत नहीं

कुछ लेखकों का कहना था कि गर्भवती महिलाओं को कॉफ़ी बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए, जबकि कुछ का कहना था कि वे दिनभर में दो से तीन कप कॉफ़ी ही पी सकती हैं. उन्होंने जब इस बारे में किताबें पलटीं तो उसमें छह कप कॉफ़ी पी सकने की बात कही गई थी.

दुविधा की स्थिति को देखते हुए सांख्यिकी की जानकार ऑस्टर ने सही संख्या के बारे में पता लगाने की ठान ली. इसके लिए उन्होंने ख़ुद ही मेडिकल की किताबें पढ़ीं.

अध्ययन के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि दिन में दो कप कॉफ़ी पीना अच्छा है.

ऐसे में दो से चार कप कॉफ़ी पीने की आदतीन ऑस्टर को दो कप कॉफ़ी में दिन काटने में परेशानी हो रही थी, लेकिन बाद में वह रोज़ तीन कप कॉफ़ी के साथ सहज हो गईं.

Image caption गर्भवती महिलाओं को कम कॉफी पीने की सलाह दी जाती है .

उनका कहना है कि दिन में छह से आठ कप कॉफ़ी पीने पर परेशानी हो सकती है.

दो साल की बच्ची की मां ऑस्टर ने अपने इन अनुभवों पर एक किताब लिखी है. 'एक्सपेक्टिंग बेटर' नामक इस पुस्तक में वह गर्भवती महिलाओं को तथ्यों के आधार पर ख़ुद के लिए बेहतर फ़ैसला लेने की सलाह देती हैं.

ऑस्टर का कहना है कि मुद्दा कैफ़ीन के सेवन और गर्भवती महिलाओं में उलटी की प्रवृति से जुड़ा है. आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अधिकतर महिलाएं बीमार रहती हैं. इसीलिए जो महिलाएं ज्यादा बीमार रहतीं हैं उन्हें कम कॉफ़ी पीनी चाहिए.

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अल्कोहल से दूरी

ऑस्टर के मुताबिक़ कॉफ़ी ही नहीं बल्कि कई ऐसी चीज़ें हैं जिनके सेवन को लेकर गर्भवती महिलाओं पर घोषित या अघोषित पाबंदी लगी है.

उदाहरण के लिए अल्कोहल को लेते हैं. इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) सुझाव देती है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए.

लेकिन ऑस्टर इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान सप्ताह में तीन ग्लास और बाद के महीनों में हर सप्ताह तीन से चार बार वाइन लेने में कोई हर्ज नहीं है.

Image caption गर्भवती महिलाओं को अल्कोहल से भी दूरी रखने की सलाह दी जाती है.

ऑस्टर का कहना है कि इस बारे में उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट था कि गर्भावस्था के दौरान अल्कोहल का अत्याधिक सेवन ख़तरनाक हो सकता है.

वैसे जानकार इससे सहमत नहीं हैं. इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक और हेल्थकेयर कंसल्टेंसी बाजियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विवेक मुथु का कहना है कि मामूली अल्कोहल के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है.

दूध और चीज़

इसी तरह खाने की कई ऐसी चीज़ें हैं जिनके सेवन से गर्भवती महिलाओं को रोका गया है. बिना पाश्चुरीकृत दूध और चीज़ के सेवन से भी गर्भवतियों को रोका गया है.

अमरीकी सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल के 15 साल के आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद ऑस्टर ने पाया कि 20 फ़ीसदी बीमारियों के लिए बिना पाश्चुरिकृत दूध को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

ऑस्टर का मानना है कि कई ऐसी चीज़ें हैं जिसे डॉक्टर गर्भवती महिलाओं पर थोप देते हैं और उनके पास इस बारे में विस्तार से बताने के लिए समय नहीं होता. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इन सारी चीज़ों के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहिए और उसके बाद डॉक्टर से सवाल करना चाहिए कि उसकी कोई भी सलाह उनके लिए किस तरह उपयोगी है.

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