लाखों वायरस को 'आश्रय' देते हैं स्तनपायी

  • 4 सितंबर 2013
चमगादड़
Image caption चमगादड़ उन विषाणुओं का वाहक है जिनसे इंसानी संक्रमण का ख़तरा होता है

एक ताज़ा शोध से पता चला है कि स्तनपायी जानवरों में तीन लाख बीस हजा़र से ज़्यादा वायरस हो सकते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इनसे विषाणुजनित रोगों, विशेष रूप से मनुष्यों में फैलने वाले वायरस की खोज से भविष्य की महामारियों को रोकने में मदद मिलेगी.

शोधकर्ता टीम का अनुमान है कि इसमें छह अरब डॉलर की लागत आएगी, लेकिन यह लागत बड़ी महामारियों से निपटने की लागत का एक हिस्सा मात्र है.

यह शोध एमबायो जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

कोलंबिया विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इनफेक्शन एंड इम्यूनिटी के निदेशक प्रोफ़ेसर इयन लिपकिन कहते हैं, "हम वास्तव में स्तनपायी जानवरों से संबंधित सभी विषाणुओं की पूरी विविधता को परिभाषित करने की बात कह रहे हैं. हमारा मकसद अधिक जानकारी जुटाना है ताकि हम उन सिद्धांतों को समझ सकें जो विषाणुओं के कारण पैदा होने वाले ख़तरों का आधार बनते हैं."

चमगादड़ पर शोध

इंसानों में संक्रमित करने वाले 70 फीसदी वायरस जैसे एचआईवी, एबोला और द न्यू मिडिल ईस्ट रेसपिकेटरी सिन्ड्रोम (मर्स) वन्य जीवों में उत्पन्न होते हैं.

लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों के लिए समस्या के विस्तार का मूल्यांकन काफी कठिन बना हुआ है.

शोधकर्ताओं ने जाँच के लिए अमरीका और बांग्लादेश में चमगादड़ की एक प्रजाति गादुर (फ्लाइंग फॉक्स) का अध्ययन किया.

चमगादड़ों से लिए गए एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे सैम्पलों का अध्ययन कर शोधकर्ता अनुमान लगाने में सफल रहे कि वे कितने अन्य रोगाणुओं को ले जाने में वे सक्षम हो सकते हैं.

उन्हें शोध में साठ विभिन्न प्रकार के वायरस मिले, जिनमें से अधिकांश को पहले कभी नहीं देखा गया था.

शोध का समय और लागत

Image caption वैज्ञानिकों चमगादड़ों की विभिन्न प्रजातियों के शोध पर ज़्यादा ध्यान देने की बात कह रहे हैं.

शोधकर्ताओं ने स्तनपायी जानवरों पर इन आँकड़ों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि ऐसे करीब तीन लाख बीस हज़ार वायरस हो सकते हैं, जिनका अभी तक नहीं लगाया गया है.

उन्होंने आगे कहा कि इन सभी विषाणुओं की पहचान भविष्य के लिए ख़तरा बनने वाली उन बीमारियों का पता लगाने की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए ख़तरा बन सकते हैं.

प्रोफ़ेसर लिपकिन ने कहा, "निश्चित तौर पर हम धरती पर मौजूद सारे जानवरों का सर्वेक्षण नहीं कर सकते, लेकिन हम अधिक ख़तरे वाले विषाणुओं के संभावित जानवरों के बेहतर मापन की कोशिश कर सकते हैं."

वे कहते हैं, "हम अपने पूर्व अनुभवों का इस्तेमाल करते हुए उन क्षेत्रों की ओर देखते हैं, जहां नए संक्रमण के ख़तरे की ज़्यादा संभावना है अथवा जिससे मानव स्वास्थ्य को अधिक नुकसान हो सकता है."

उन्होंने कहा कि इस शोध में दस साल लगेंगे और लागत अरबों डॉलर होगी.

नए विषाणुओं की खोज

इसी तरह के एक प्रोजेक्ट 'प्रीडिक्ट' के तहत विश्व के उन हिस्सों में 240 नए विषाणुओं की खोज की गई है, जहां इंसान और जानवर आसपास रहते हैं.

नॉटिंघम विश्विद्यालय के प्रोफ़ेसर जोनाथन बॉल शोध के बारे में कहते हैं, "शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों पर ध्यान इसलिए केंद्रित किया है क्योंकि वे लोगों के बीच फैलने वाले कई सारे विषाणुओं के प्रसार के मौलिक स्रोत रहे है्ं."

वे शोध के बारे में कहते हैं, "लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि चमगादड़ों की जीवनशैली विषाणुओं के काफी अनुकूल है, वे बड़े समुदाय में रहते हैं, वे सारी दुनिया में फैले हुए हैं और वे लंबी दूरी उड़ान भरते हैं."

वे आगे बताते हैं, "अन्य स्तनपायी जीव भी इसी तरह के वायरसों के संवाहक होते हैं अथवा नहीं, यह सवाल पूछना भी काफी महत्वपूर्ण है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि शोधकर्ता इस सवाल की भी पड़ताल कर रहे हैं."

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या इस तरह के विस्तृत अध्ययन से हमें भविष्य के वायरस संक्रमण को रोकने और भविष्यवाणी करने में मदद मिलेगी?"

उन्होंने आगे कहा, "संभावित विषाणुओं की संख्या काफी बड़ी है, केवल चमगादड़ की ही अलग-अलग हज़ार प्रजातियां हैं और इन सभी चमगादड़ों और अन्य जानवरों से विषाणुओं के संभावित ख़तरे की जाँच काफी चुनौतीपूर्ण होगी."

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