बंगलौर: आउटसोर्सिंग के केंद्र का ठप्पा हटाने की कोशिश

बंगलौर में इंफ़ोसिस ऑफ़िस

दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी के एक अहम केंद्र के तौर पर भारत की पहचान बनाने में मदद की बंगलौर ने.

कभी हरे-भरे लहलहाते खेतों की वजह से जाना जाने वाला बंगलौर आज दुनिया और भारत की कुछ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों का घर है.

देश भर से नौजवान इंजीनियर करियर में कुछ नया करने की उम्मीद के साथ वहाँ पहुँचते हैं.

उन्हीं में से एक हैं उत्तर प्रदेश के 24 साल के जु़बैर असलम, वे बतौर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बंगलौर आए और कहते हैं कि ये उनका सपना पूरा होने जैसा है.

ज़ुबैर कहते हैं, "मैं आज की तारीख़ में उतना कमा लेता हूँ जितना मेरे पिता कमाते हैं. यहाँ तक पहुँचने के लिए उन्होंने 31 साल सरकारी नौकरी की. वो आज जितना कमा रहे हैं वो मेरी शुरुआती तनख़्वाह है. मैंने वहाँ से शुरुआत की है, ये सोचकर काफ़ी अच्छा लगता है."

इस क्रांति की शुरुआत 1970 के दशक में हुई जब राज्य सरकार ने बंगलौर के बाहर कुछ खेती की ज़मीन को इलेक्ट्रॉनिक सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए अलग किया.

लेकिन वो उदारीकरण से पहले के दिन थे. टैक्स काफ़ी थे और सब चीज़ें लाइसेंस के ज़रिए नियंत्रित थीं.

आयात सीमित रखा गया था और विदेशी मुद्रा को लेकर काफ़ी प्रतिबंध भी थे.

इंफ़ोसिस की शुरुआत

Image caption ज़ुबैर असलम अपने सपने पूरे करने के लिए बंगलौर पहुँचे

ऐसे में टेक्नॉलॉजी की दुनिया में एक देसी कंपनी इंफ़ोसिस की साल 1981 में शुरुआत हुई. उसी साल आईबीएम ने पर्सनल कंप्यूटर लॉन्च किया था.

लेकिन उस समय भी भारत को इस बात का फ़ायदा था कि देश के शैक्षिक संस्थान कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अच्छे कोर्स चला रहे थे और देश में अच्छे कंप्यूटर प्रोफ़ेशनल तैयार हो रहे थे.

इंफ़ोसिस और विप्रो दोनों ही साल 1983 में बंगलौर पहुँची और देश में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का बीज वहीं से पड़ा.

नब्बे के दशक में उदारीकरण के बाद देश के सॉफ़्टवेयर निर्यात में तेज़ी आई. बंगलौर को फ़ायदा ये था कि वहाँ फर्राटे से अँगरेज़ी बोलने वाले, पढ़े-लिखे लोग थे और ये लोग अमरीका या यूरोप के मुक़ाबले चौथाई क़ीमत पर काम करने के लिए तैयार भी थे.

इंफ़ोसिस के एक्ज़िक्यूटिव वाइस चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन कहते हैं, "अगर आज आप दुनिया की 10 सबसे प्रमुख आईटी कंपनियों को देखें तो पाएँगे कि उनमें से पाँच भारतीय हैं. इसने न सिर्फ़ युवाओं को आत्मविश्वास दिया है बल्कि अन्य उद्योगों को भी ये कहने का विश्वास दिया है कि आप दुनिया की एक जानी-मानी अर्थव्यवस्था बन सकते हैं, भारत से होकर आप दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और भारत से होकर आप दुनिया जीत सकते हैं."

सिर्फ़ आउटसोर्सिंग नहीं

Image caption इंफ़ोसिस के क्रिस गोपालकृष्णन का कहना है कि भारत अब विश्वस्तरीय इंजीनियर दे रहा है

ये उद्योग आज की तारीख़ में हर साल लगभग दो लाख रोज़गार के अवसर पैदा करता है और इसमें लगभग एक करोड़ लोग नौकरी में लगे हैं.

देश का आईटी क्षेत्र हर साल लगभग 85 अरब डॉलर का निर्यात करता है और आज की तारीख़ में देश के 40 फ़ीसदी आईटी उद्योग बंगलौर में ही केंद्रित है.

लेकिन भारत अब सिर्फ़ आउटसोर्सिंग के केंद्र के तौर पर पहचान नहीं चाहता बल्कि दुनिया की बड़ी कंपनियों की श्रृंखला में ऊपर उठना चाहता है.

माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, सिस्को, ओरैकल, इंटेल और अडोब जैसी सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के भी वहाँ केंद्र बन चुके हैं. ये शहर अब ऑन्तरप्रेन्योर यानी नए उद्यमियों के लिए भी एक केंद्र बन रहा है.

अमित शर्मा अमरीका से लौटे और बंगलौर में उन्होंने ख़ासतौर पर युवाओं को लुभाने वाली टीशर्ट्स बनाने वाली कंपनी गोअनटक्ड डॉट कॉम शुरू की.

अमित कहते हैं, "यहाँ सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि मज़दूरी कम लगती है. नया काम शुरू करते हुए आप ऐसे लोग अपने साथ जोड़ सकते हैं जो दौड़-भाग करें और आप प्रशासनिक मुश्किलों से ख़ुद निबटें. इसलिए उतने ही पैसे और समय में आप अमरीका के सूचना प्रौद्योगिकी के केंद्र सिलिकॉन वैली के मुक़ाबले भारत में ज़्यादा बड़ा ख़तरा उठा सकते हैं."

यानी भले ही आउटसोर्सिंग ने बंगलौर को दुनिया के आर्थिक मानचित्र में जगह दिलाई अब इसका अगला दौर इनोवेशन और नया काम शुरू करने की कोशिश कर रहे उद्यमियों का होगा जिनके हाथों में बंगलौर के डिजिटल भविष्य की कुंजी है.

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