यूरोपीय देशों को किससे है ख़तरा

Image caption यूरोपीय देशों में रकून की आबादी बहुत तेज़ी से बढ़ती चली जा रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय शहरों और क़स्बों को अनजान प्रजातियों के प्रकोप का ख़तरा है. माना जा रहा है कि तेज़ी से बढ़े संपर्क साधनों के चलते नगरीय इलाक़ों को इन ‘घुसपैठिया’ प्रजातियों से गहरा जोख़िम पैदा हो गया है.

इन प्रजातियों में पौधे और जानवर शामिल हैं. ये मूल रूप से उस स्थान पर पैदा नहीं हुए जहां फैल कर मूल वन्य संसाधनों और जीव-जंतुओं के स्थान पर क़ब्ज़ा जमा लेते हैं.

उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ़्ते यूरोपियन यूनियन (ईयू) इन प्रजातियों से महाद्वीप को बचाने के उपाय ढूंढने की कोशिश करेगा.

यूरोप में प्रकृति बचाने के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय संघ यानी आईय़ूसीएन में कार्यक्रम अधिकारी शैंटेल वैन हैम का कहना है, ‘‘ये ग़ैर-देशी प्रजातियां धरती की जैव-विविधता के लिए बहुत बड़ा ख़तरा हैं. ये ख़तरा बढ़ता ही जाएगा अगर इनके बसाव को रोकने के लिए क़दम ना उठाए गए.समस्या ये है कि ये ग़ैर-देशी प्रजातियां मूल संसाधनों और प्रजातियों से जगह ले लेती हैं.’’

‘शहरी क्षेत्रों को इनसे और ज़्यादा ख़तरा है. उदाहरण के लिए ये व्यापार के ज़रिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचती हैं या फिर आकस्मिक ढंग से हवाई अड्डों और पत्तनों पर.’

बचाव की कोशिशें

Image caption तोतों की ये विशेष प्रजाति भी यूरोप में ग़ैर-देशी प्रजातियों में शामिल है.

इस समस्या से निपटने के लिए आईय़ूसीएन स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड में एक कांफ्रेस का आयोजन कर रहा है जिसमें स्थानीय अधिकारी,नीति निर्माता,ग़ैर सरकारी संगठन और वैज्ञानिक शिरक़त कर रहे हैं.

शैंटेल वैन हैम ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘नगरपालिकाएं या स्थानीय प्रशासन इन प्रजातियों को जमने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें ज़रूरी सहयोग चाहिए होगा.’’

‘‘इस कांफ्रेस के ज़रिए हम विशेषज्ञों को एक मंच पर ला रहे हैं. इसमें ना सिर्फ़ वैज्ञानिक हैं बल्कि विभिन्न सरकार स्तर और ग़ैर सरकारी संगठन भी शामिल हैं ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ाकर इन प्रजातियों से निपटा जा सके.’’

आईयूसीएन की एक रिपोर्ट बताती है किस तरह यूरोपियन यूनियन के देश इन प्रजातियों से निपटने की कोशिशें कर रहे हैं.

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह एक उत्तर अमरीकी स्तनपायी जीव रकून जर्मनी की राजधानी बर्लिन में फैलता जा रहा है. इसी तरह जापानी नॉटवीड यूरोप और उत्तरी अमरीका में ख़तरनाक तरीक़े से फैलता जा रहा एक पौधा है.

उम्मीद है कि यूरोपीय आयोग अपनी जैव विविधता रणनीति के तहत पूरे यूरोपीय क्षेत्र में इन प्रजातियों से निपटने की अपनी योजना प्रकाशित करने वाला है.

शैंटेल वैन हैम का कहना है, ‘‘क़ानूनी ढांचा तैयार करने के लिए प्रस्ताव तो है लेकिन इसके लिए ईयू की सहमति चाहिए होगी. हमें आशा है कि यूरोपीय आयोग विभिन्न यूरोपीय देशों के अनुभवों और उनके अपनाए तरीक़ों की जानकारी को साझा करने के हक़ में है.’’

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