अब बिल्लियों से नहीं डरेंगे चूहे

वैसे तो चूहे और बिल्ली के बारे में तमाम तरह की कहावतें प्रचलित हैं, लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो भविष्य में ये कहावतें बदल सकती हैं.

दरअसल, शोधकर्ताओं ने एक ऐसे सूक्ष्म परजीवी की पहचान की है जिससे चूहों के संक्रमित होने पर उनमें बिल्लियों को लेकर व्याप्त भय खत्म हो जाएगा.

वैज्ञानिकों ने इस एकल सेल वाले परजीवी को टॉक्सोप्लाज़्मा गोंडी नाम दिया है.

शोधकर्ताओं ने प्लॉस वन नामक पत्रिका में छपी शोध रिपोर्ट में कहा है कि इस परजीवी के कारण चूहों के दिमाग़ में स्थायी बदलाव आ सकता है.

बर्केले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वेंडी इनग्राम और उनके साथियों ने 'बॉबकैट यूरीन' के प्रति चूहे की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया.

पश्चिमी देशों में चूहे भगाने के लिए जंगली बिल्ली के पेशाब जिसे 'बॉबकैट यूरीन' कहा जाता है, का छिड़काव किया जाता है.

'बॉबकैट यूरीन' का असर नहीं

शोधकर्ताओं ने पाया कि परजीवी के कारण चूहे बेधड़क उन जगहों में घुस गए, जहां बॉबकैट यूरीन का छिड़काव किया गया था.

साथ ही जिन चूहों पर इस परजीवी का कोई असर नहीं था, वे उस जगह नहीं गए, जहां बॉबकैट यूरीन का छिड़काव किया गया था.

इस पर इनग्राम ने कहा, ''यह बेहद अहम है कि जब परजीवी के संक्रमण से चूहे के शरीर को पूरी तरह या आंशिक तौर से मुक्त किया गया, तो भी उनका व्यवहार नहीं बदला.''

उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब यह है कि एक बार इस परजीवी से संक्रमित होने के बाद चूहे के दिमाग़ में स्थायी बदलाव आ जाता है.

चूहों और गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवरों में यह संक्रमण आमतौर पर बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से होता है. इसके बाद यह परजीवी ख़ुद शरीर के हर अंग विशेषकर दिमाग़ पर असर डालने लगता है.

यह संक्रमण इंसानों में भी फैल सकता है. हाल के एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल तीन लाख 50 हज़ार लोग टॉक्सोप्लाज़्मोसिस के संपर्क में आए.

इस कारण गर्भावस्था के दौरान परेशानी के अलावा कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

यह परजीवी इंसान का व्यवहार बदल सकता है और वह शिज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है.

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