दुनिया में एचआईवी संक्रमण के मामलों में 'भारी कमी'

  • 25 सितंबर 2013
ख़ून का नमूना
Image caption संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक एचआईवी संक्रमण और एड्स से जुड़ी मौतों में भारी कमी आई है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक एचआईवी संक्रमण और एड्स से जुड़ी मौतों में नाटकीय रुप से कमी आई है.

यूनएड्स संस्था के अनुसार साल 2005 में 23 लाख मौतों की तुलना में पिछले साल इस कारण से होने वाली मौतों की संख्या 16 लाख रह गई थी.

साथ ही पिछले साल तक एचआईवी संक्रमण के नए मामले 23 लाख रह गए जो साल 2001 की कुल संख्या का एक तिहाई था.

बच्चों में इन मामलों में और भी भारी कमी रही. साल 2001 में नए संक्रमण के पांच लाख से ज़्यादा मामले थे. लेकिन साल 2012 तक ये संख्या आधी रह गई थी, ढाई लाख से कुछ ज़्यादा.

संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों में मृत्यु दर और संक्रमण दर में कमी की वजह एंटीरेट्रोवायरल दवाइयों तक बेहतर पहुंच थी जिनसे एचआईवी वायरस को दबाने में मदद मिलती है.

ज़्यादा लोगों को इलाज की सुविधा

इलाज के बिना एचआईवी संक्रमित लोगों को एड्स हो जाता है जिससे साधारण संक्रमण भी घातक हो जाते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि साल 2012 के अंत तक दक्षिण अफ़्रीका, युगांडा और भारत समेत कई निम्न और मध्य आय वाले देशों में लगभग एक करोड़ लोगों को एंटीरेट्रोवायरल इलाज का फ़ायदा मिल रहा था.

इस इलाज की बेहतर पहुंच की वजह समुदायों को सस्ती और आसानी से दवाओं का मिलना और ज़्यादा लोगों का मदद के लिए आगे आना बताया गया है.

यूएनएड्स के मुताबिक साल 2015 तक एड्स महामारी को रोकने और उलटने के उसके मिलेनियम डेवलपमेंट लक्ष्यों की तरफ़ दुनिया ''धीरे-धीरे बढ़'' रही है.

लेकिन संस्था का कहना है साल 2015 तक एचआईवी का इलाज एक करोड़ 50 लाख लोगों तक पहुंचाने के उसके लक्ष्य से ज़्यादा लोगों को इलाज की सुविधा मिल सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी दिशानिर्देश को बदल दिया है जिसके तहत और भी लोग इलाज के लिए योग्य होंगे.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि जिन लोगों में संक्रमण का सबसे ज़्यादा ख़तरा है, उन्हें एचआईवी सेवाएं मुहैया करवाने का काम धीमी गति से हो रहा है.

साथ ही रिपोर्ट में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ़ यौन हिंसा से निपटने के लिए और काम करने की ज़रूरत की बात कही गई है. महिलाएं और बच्चियां उस वर्ग में आती हैं जिन्हें संक्रमण होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.

डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स संस्था की स्वास्थ्य नीति के सलाहकार बेव कॉलिंस का कहना है, "लाखों लोगों, ख़ासकर विकासशील देशों में लोगों को सस्ते दामों पर एचआईवी का इलाज मुहैया करवाने की दिशा में काफ़ी प्रगति हुई है. लेकिन ये आराम से बैठने का समय नहीं है. हमें इलाज के लिए बेहतर योजनाओं, सस्ते और बिल्कुल सही परीक्षण और सेवाओं को जारी रखना होगा."

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