'ग्लोबल वार्मिंग के लिए इंसान ज़िम्मेदार, वैज्ञानिकों को 95 फ़ीसदी यक़ीन'

  • 30 सितंबर 2013
ग्लोबल वॉर्मिंग

एक ऐतिहासिक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि साल 1950 के बाद से वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि के लिए मनुष्य "सबसे प्रभावशाली" कारण है. इस बारे में उन्हें 95 फीसदी यकीन हैं.

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन पर गठित दल की रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के मौजूद साक्ष्यों का ब्यौरा दिया गया है.

रिपोर्ट में साफ़ किया गया है कि जमीन, हवा और समुद्र में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव "स्पष्ट" हैं.

इसके अनुसार पिछले पंद्रह सालों में तापमान में वृद्धि पर में आया विराम इतना छोटा है कि इससे दीर्घकालिक असर पर बात नहीं की जा सकती.

आईपीसीसी की रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र पैनल ने चेतावनी दी है कि ग्रीन हाउस गैसों के निरंतर उत्सर्जन से वैश्विक तापमान में वृद्धि होगी, जो मौसम प्रणाली के हर पहलू को बदल देगी.

इन बदलावों को रोकने के लिए "ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में निरंतर और पर्याप्त कमी लाने" की जरूरत होगी.

Image caption रिपोर्ट तैयार करने वाले कार्यदल का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से पृथ्वी पर ख़तरा मंडरा रहा है

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दो सप्ताह के गहन विमर्श के बाद अंततः ग्लोबल वॉर्मिंग के विज्ञान के सार बिंदुओं को नीति निर्माताओं के लिए जारी किया गया.

आईपीसीसी की तीन श्रृंखला वाली पहली रिपोर्ट को धरती के बढ़ते तापमान की वजहों को समझने के लिए सबसे विस्तृत और अहम दस्तावेज़ माना जा रहा है.

छत्तीस पन्नों की यह विशद रिपोर्ट अगले 12 महीने में आएगी.

रिपोर्ट बहुत साफ़गोई से कहती है कि 1950 से मौसम प्रणाली में देखे गए बहुत से बदलाव "सहस्राब्दी के दशकों में अनोखे हैं."

पिछले तीन दशक में से हर-एक में धरती का तापमान लगातार बढ़ा है. वर्ष 1850 के बाद से यह पहली बार हुआ है और संभवतः 1400 साल के इतिहास में यह सबसे गर्म है.

रिपोर्ट तैयार करने वाले आईपीसीसी कार्यदल के संयुक्त-अध्यक्ष क़िन दाहे ने कहा, "इस विज्ञान के हमारे मूल्यांकन से पता चला है कि वायुमण्डल और समुद्र का तापमान बढ़ गया है, हिमपात और बर्फ़ की मात्रा में कमी आ रही है, समुद्र की सतह ऊंची हुई है और ग्रीन हाउस गैसों की सघनता में बढ़ोत्तरी हो रही है."

कार्यदल के एक अन्य संयुक्त-अध्यक्ष प्रोफ़ेसर थॉमस स्टॉकर ने कहा कि जलवायुस परिवर्तन ने "पारिस्थितिकी तंत्र और मनुष्य के दो प्रमुख स्रोतों, ज़मीन और पानी, के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. संक्षेप में कहा जाए तो इससे हमारे ग्रह, हमारे घर पर ख़तरा पैदा हो गया है."

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