कम उम्र में माँ बनना बच्चे को पड़ सकता है भारी

कम उम्र में माँ बनना

ब्रिटेन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार तीस साल से कम उम्र में महिलाओं के माँ बनने से जन्म लेने वाले बच्चों की मृत्यु की आशंका अधिक होती है.

ब्रिटेन में बच्चों की मृत्यु पर प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में बच्चों की मृत्यु के आँकड़ों में 50 प्रतिशत की कमी आई है.

बच्चों की कम उम्र में मौत का प्रमुख कारण युवा महिलाओं का माँ बनना है.

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी उम्र की महिलाओं को सहयोग की जरूरत है. इसे केवल किशोरावस्था की माताओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.

किशोरी माताएं

यह शोध यूसीएल के इंस्टीट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ ने किया है.

इस शोध के लिए जनवरी 1980 से लेकर दिसंबर 2010 तक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया.

बच्चों को लगने वाली चोट, जन्म के समय बच्चे के वजन और माता की उम्र को शोध में खतरे का मूल्यांकन करने के लिए अध्ययन बिंदु बनाया गया.

इसमें इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में 30 से कम उम्र की माताओं और 30 से 34 उम्र की माताओं के नौ साल तक के बच्चों की मृत्यु के आँकड़ों में 11 प्रतिशत का अंतर देखा गया.

नौ साल तक की उम्र तक के बच्चों की होने वाली कुल मौतों में बीस साल से कम उम्र की माताओं के बच्चों की मृत्यु दर 3.80 प्रतिशत थी.

तुलनात्मक अध्ययन

Image caption शोधकर्ती कहते हैं कि चोट बचपन में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है

इस अध्ययन में विभिन्न आयु वर्ग में समान भार वाले बच्चों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार एक महीने से लेकर नौ महीने तक के शिशुओं के मृत्यु में भारी अंतर देखा गया.

इस आयु वर्ग में 22 प्रतिशत मौतों के कारणों की व्याख्या नहीं की गई है जो माताओं द्वारा शराब के सेवन, धूम्रपान और एकाकीपन की परिस्थितियों से जुड़े हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान नीति किशोरावस्था में पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं पर ध्यान देती है. यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि तीस साल से कम उम्र की महिलाएं ब्रिटेन में पैदा होने वाले कुल बच्चों के 52 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं.

यूसीएल इंस्टीट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ के प्रमुख शोधकर्ता और क्लीनिकल एपिडिमॉलजी के प्रोफ़ेसर रथ गिलबर्ट कहते हैं कि शोध से मिले निष्कर्ष काफ़ी महत्वपूर्ण हैं.

उनके अनुसार, "किशोरावस्था में माँ बनना महिलाओं के लिए सामाजिक रूप से हानिकारक है, क्योंकि उच्च अध्ययन और करियर पर ध्यान देने वाली महिलाएं आमतौर पर गर्भधारण को 30 साल की उम्र तक रोक देती हैं."

चोट से होने वाली मौत

प्रोफ़ेसर रथ गिलबर्ट के अनुसार, "इस विषमता को ठीक करने के लिए वैश्विक नीतियों की आवश्यकता है."

पॉलिसी एण्ड चाइल्ड केयर ट्रस्ट में नीति और शोध विभाग के प्रमुख जिल रूटर सरकारी सहायता को बढ़ाने की बात कहते हैं.

जिल बताते हैं, "बाल मृत्यु के पीछे सामाजिक नुकसान और माताओं की उम्र जैसे कारण प्रमुख हैं.

सरकार ने किशोरवस्था की माताओं के बच्चों की नाजुक स्थिति को पहचानते हुए पेरेंटिग के साथ-साथ अतिरिक्त सेवाएं प्रदान की हैं."

उनके अनुसार "इंग्लैंड में फैमिली और नर्स की सहभागिता काफ़ी गहन और सुव्यवस्थित है.

पहली बार बीस साल से कम उम्र में माँ बनने वाली महिलाओं की देखभाल के लिए घरों पर नर्स की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं."

जिल कहते हैं, "विशेष तौर पर प्रशिक्षित नर्स गर्भधारण के शुरूआती महीनों से लेकर बच्चों के दो साल के होने तक नियमित रूप से देखभाल के लिए घर पर जाती हैं, लेकिन यह सेवा बड़ी उम्र में माँ बनने वाली महिलाओं को उपलब्ध नहीं है. हम चाहते हैं कि उनको भी नर्सों की सुविधा के दायरे में लाया जाए."

हेल्थकेयर क्वालिटी इम्प्रूवमेंट पार्टनरशिप के अध्ययन को रॉयल कॉलेज ऑफ़ पीडीऐट्रिक्स एण्ड चाइल्ड हेल्थ ने प्रकाशित किया है, जिससे अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं.

पहला तथ्य यह है कि चोट लगना बचपन में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है लेकिन इसमें कमी आ रही है.

वर्ष 1980 और 2010 के बीच चोट के कारण एक साल से चार साल तक की उम्र तक बच्चों में से 31 प्रतिशत की मृत्यु हुई. इन बच्चों की माताओं की उम्र 15 से 18 साल थी.

ब्रिटेन के अन्य हिस्सों के मुकाबले इंग्लैंड में बाल मृत्यु दर की कमी में निरंतरता रही है, विशेषकर बड़े बच्चों की मृत्यु दर और कम रही है.

Image caption शोधकर्ताओं का कहना है कि बड़ी उम्र में माँ बनने वाली महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा देकर बाल मृ्त्यु दर में कमी लाई जा सकती है.

रॉयल कॉलेज के प्रेसीडेंट डॉ. हिलेरी कॉस कहते हैं कि चोट के कारण बच्चों की मौत चिंता की बात है.

डॉ. हिलेरी कहते हैं, "चोट बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इसमें कमी आ रही है. इसलिए इस संबंध में सार्वजनिक नीति बनाने की आवश्यकता है."

विकलांगता और गंभीर बीमारियां

इस अध्ययन से पता चला है कि ब्रिटेन में मरने वाले 70 प्रतिशत बच्चे कैंसर, श्वास नली में संक्रमण (सिस्टिक फाइब्रोसिस) या मिरगी जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में थे.

यह आवश्यक रूप से बच्चों की मौत का प्रमुख कारण नहीं था, लेकिन उनकी मौत के कारकों में से एक है.

प्रोफ़ेसर गिलबर्ट कहते है कि कुल बच्चों की मौत के आँकड़ों में कमी आ रही है, लेकिन गंभीर बीमारी और विकलांगता के साथ जन्म लेने वाले बच्चे पूरी स्थिति को गंभीर बना रहे हैं.

इसके मायने हैं कि बच्चों की उचित सक्रिय देखभाल की आवश्यकता है.

गिलबर्ट के अनुसार, "गंभीर बीमारी वाले कुछ बच्चों को जिनकी मौत की आशंका है, उनको उच्च गुणवत्ता की चिकित्सकीय सुविधा मुहैया करवाने के साथ-साथ उनके परिवार को सहायता की जरूरत है."

वो कहते हैं, "बाकी बच्चों की समय पूर्व मौत को रोका जा सकता था. गंभीर बीमारी वाले बच्चों की परिवार द्वारा घर पर देखभाल की जाती है, उनको प्राथमिक और सामुदायिक देखभाल की सेवाओं के साथ-साथ अस्पताल की सुविधा मिलती है.

हमें घर के साथ-साथ अस्पतालों में बच्चों की दीर्घकालीन देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत पर ध्यान देना होगा."

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