क्या सबके लिए ज़रूरी है नींद?

  • 16 अक्तूबर 2013
मगरमच्छ

यह तो हम जानते हैं कि नींद हमारे लिए कितनी ज़रूरी है. सामान्यतः एक इंसान अपनी ज़िंदगी का एक तिहाई सोने में बिता देता है.

हालांकि हम अभी तक यह नहीं जानते कि हमें नींद की ज़रूरत क्यों होती है- हालांकि हमें इतना तो पता है कि यह ज़रूरी है और इसके बिना फ़ैसले लेने, याद रखने, बोलने जैसी मानसिक शक्तियां क्षीण होने लगती हैं.

अगर हम औसतन पांच से 11 घंटे की नींद नहीं ले पाते तो हमें यह काम करने में दिक्कत होने लगती है.

लेकिन सवाल यह है कि क्या सभी जीवों को नींद की ज़रूरत पड़ती है?

आधे दिमाग़ की नींद

नींद की परिभाषा भी काफ़ी अस्पष्ट है- इसे दिमाग की निश्चलता की स्थिति कहा जाता है जिसे तुरंत पलटा जा सकता है, इसके साथ ही इसमें उकसाने पर बेहद धीमी प्रतिक्रिया होती है.

नींद की व्याख्या मुश्किल होने और पक्षियों, स्तनपाइयों के अलावा शोध के अभाव में वैज्ञानिक सरीसृपों, मछलियों और अकृष्ठवंशियों के लिए नींद शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हैं और इसके बजाय आराम का इस्तेमाल करते हैं.

हालांकि मक्खियों, ज़ेब्राफ़िश और सूत्रकृमि पर किए गए शोधों में "नींद" और "अनिद्रा" के दौरान जीन में फ़र्क दिखा है, ठीक वैसा ही जैसा कि स्तनपाइयों में पाया जाता है जब कि वह सो रहे होते हैं.

इससे यह कहा जा सकता है कि वह भी सोते हैं या नींद लेते हैं. लेकिन नींद का मामला इससे ज़्यादा जटिल है.

व्हेल और डॉल्फ़िन जैसे कुछ जानवर यूनिहेमिस्फ़ेरिक (unihemispheric) नींद लेते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि उनके दिमाग़ का आधा हिस्सा सो सकता है जबकि दूसरा आधा हिस्सा चौकन्ना रहता है.

इससे वह सतह पर आकर सांस लेने में सक्षम हो पाती हैं.

इसका मतलब यह है कि हमें अभी नींद के बारे में बहुत कुछ पता नहीं है- ख़ासतौर पर दूसरे जीवों के बारे में.

लेकिन यह तो तय है कि नींद बहुत ज़रूरी है और एक शोध के अनुसार अगर आप पर्याप्त नहीं सोते हैं तो आपकी ज़िंदगी के साल काफ़ी कम हो सकते हैं.

तो छक कर सोएं और स्वस्थ, सक्रिय, लंबी ज़िंदगी जीएं.

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