कुछ किलो बोटॉक्स दुनिया के हर इंसान को मार सकता है....

ज़हर

आज की तारीख़ में हमारी कई तरह की तकलीफ़ों, दर्दों से छुटकारा दिलाने के लिए कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं- जो ज़िंदगी को आसान बनाती हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कई दवाइयां बेहद ख़तरनाक ज़हरों से बनाई गई हैं.

माइकल मोज़ली बता रहे हैं इन ख़तरनाक ज़हरों और उनसे बनी दवाओं के बारे में.

बोटॉक्स- अपने चेहरे पर जिसके इंजेक्शन लगाने के लिए बहुत से लोग भारी मात्रा में पैसा ख़र्च करते हैं वो दरअसल बॉटुलिनम टॉक्सिन है.

यह आज तक मिला सबसे ज़हरीला पदार्थ है. इसके कुछ चम्मच ब्रिटेन में मौजूद हर व्यक्ति को मारने के लिए काफ़ी हैं. सिर्फ़ कुछ किलो से धरती पर इंसान की समूची आबादी को खत्म कर सकता है.

कई तकलीफ़ों का इलाज

बॉटुलिनम टॉक्सिन इतना ख़तरनाक है कि इसे अब भी सैन्य नियंत्रण में ही बनाया जाता है. 100 ट्रिलियन पौंड (9938 ट्रिलियन रुपये) प्रति किलो के साथ ये आज तक बना सबसे महंगा उत्पाद भी है. लेकिन फिर भी बोटॉक्स की मांग कम नहीं है.

ज़हर के एलडी50 पैमाने, जिसमें पदार्थ की वो मात्रा देखी जाती है जिससे किसी की मौत हो सकती है, बोटोक्स 0.000001 मिलीग्राम/किलोग्राम. इसका मतलब ये हुआ कि 70 किलो के आदमी को मारने के लिए आपको सिर्फ़ 0.00007 की ज़रूरत पड़ेगी.

इसे यूं भी कहा जा सकता है कि 70 किलो के आदमी को मारने के लिए हवा की एक क्यूबिक मिलीमीटर से भी कम की ज़रूरत पड़ेगी.

इसकी ख्याति मुख्यतः चेहरे की झुर्रियां हटाने की वजह से है. ये झुर्रियां पैदा करने वाली धमनियों को मार देता है जिससे ये रुक जाती हैं. इसके लिए भी एक बहुत छोटी एक ग्राम की करोड़वीं मात्रा को सेलाइन में घोलकर इस्तेमाल किया जाता है.

विज्ञान के नाम पर मैंने भी कई साल पहले बोटोक्स का इस्तेमाल किया था. इसने झुर्रियां तो मिटा दीं लेकिन इसके साथ ही मेरे चेहरे पर भाव भी अजीब आने लगे थे. नई धमनियां आने के बाद ही ये ठीक हुए.

बॉटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल कई तरह की स्वास्थ्य दिक्कतों को दूर करने के लिए किया जाता है. इनमें आंखों का भेंगापन, माइग्रेन, अत्यधिक पसीना, और मूत्राशय की तकलीफ़ भी शामिल है.

दरअसल यह 20 विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में काम आता है और इसके अन्य उपयोगों की तलाश अब भी जारी है.

मैरी एन कॉटन

ऐसा ही एक दूसरा एक बिलियन डॉलर (61 अरब रुपये से ज़्यादा) का उच्चरक्तदाब निरोधक दवा है कैप्टोप्रिल.

इसे सांप के ज़हर पर किए गए अध्ययनों के बाद विकसित किया गया है. एक्सेनेटाइड, जिसे बाएट्टा कहा जाता है टाइप-2 डाइबिटीज़ का प्रभावी इलाज है.

इसे दक्षिण-पश्चिमी अमरीका और मैक्सिको में रहने वाले विशाल ज़हरीली छिपकली, जिला मॉनस्टर, की लार से तैयार किया जाता है.

लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान पर ज़हरों का असर सिर्फ़ इलाज प्रदान करने के अधिक है. एक ज़हर ने तो आधुनिक दवा उद्योग को नई शक्ल दी.

विक्टोरिया कालीन ब्रिटेन में बीमा एक उभरता हुआ उद्योग था. लेकिन आसानी से हासिल होने वाले पैसे की वजह से बहुत सी हत्याएं हो रही थीं, जिनमें से ज़्यादातर ज़हर के कारण थीं.

सबसे मशहूर मामला एक महिला मैरी एन कॉटन का था जिस पर 1973 में कई हत्याओं के लिए मुकदमा चलाया गया था.

उसने चार बार शादी की थी और उसके तीन पति, जिनका बड़ा भारी बीमा था, मर गए थे.

एक बच गया, शायद इसलिए क्योंकि उसने बीमा करवाने से इनकार कर दिया था. मैरी ने उसे छोड़ दिया.

उसके सभी 10 बच्चे पेट संबंधी बीमारी की वजह से मर गए. सबकी मौत बेहद दुखद थी लेकिन मैरी के सौभाग्य से सभी का बीमा हो रखा था.

उसकी मां, उसकी भाभी, उसका प्रेमी सबकी मौत हो गई. और हर मामले में उसे फ़ायदा हुआ.

आधुनिक दवा उद्योग का उद्भव

साल 1872 तक मैरी के 16 नज़दीकी दोस्त या पारिवारिक सदस्य मारे गए थे. लेकिन एक बच गया था- सात साल का सौतेला बेटा, चार्ल्स.

उसने एक स्थानीय दरिद्रालय को उसे देने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. चार्ल्स भी जल्द ही मर गया.

दरिद्रालय के प्रबंधक को थोड़ा शक हो गया और उसने पुलिस को सूचना दे दी. उन्होंने जल्द ही तय किया कि मैरी ने ज़रूर बच्चे को ज़हर दिया होगा और उन्हें लगा कि उसने- आर्सेनिक- देकर बच्चे को मारा है.

आर्सेनिक एक खनिज है और एक ज़हर के रूप में यह आद्वितीय है. यह स्वादरहित होता है, गर्म पानी में घुल जाता है और एक आउंस (28.34 ग्राम) के सौवें हिस्से से भी कम से जान ले लेता है.

19वीं शताब्दी में इसे चूहों के ज़हर के रूप में बेचा जाता था. यह सस्ता था और आसानी से उपलब्ध था.

उस वक्त फोरेंसिक विज्ञान भी अपनी शैशवावस्था में था फिर भी आर्सेनिक के लिए अच्छा टेस्ट मौजूद था. वह इसलिए कि तब आर्सेनिक के ज़हर के इस्तेमाल की बहुत ज़्यादा मामले आ रहे थे.

लड़के के पेट से लिए गए नमूनों की जांच की गई और पता चला कि उसकी मृत्यु आर्सेनिक की घातक मात्रा से हुई है.

मैरी को उसकी हत्या का दोषी पाया गया और उसे डरहम जेल में फांसी दे दी गई.

हालांकि उसकी मां, तीन पतियों, दो दोस्तों और दस बच्चों की मौत के मामले में उस पर कभी मुकदमा नहीं चलाया जा सका.

इसके बाद ही ब्रिटेन में आर्सनिक कानून बना और फिर 1868 में फ़ार्मेसी कानून लागू हुआ. इसमें कहा गया कि सिर्फ़ योग्यता प्राप्त दवा विक्रेता ही ज़हर बेच सकते हैं.

तो इस तरह आधुनिक विधि सम्मत दवा उद्योग ऐसे ज़हरो के चलते ही अस्तित्व में आया.

और कभी हत्यारों का दोस्त रहा आर्सेनिक अब नई भूमिका में है, कैंसर-विरोधी पदार्थ के रूप में.

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