प्रयोगशाला नहीं, गैराज में बने मेडिकल उपकरण

  • 22 अक्तूबर 2013
शेयरस्कोप, डॉ डेविड विलियम्स

वैज्ञानिक आर्किमिडीज़ को नहाते वक्त, टेस्ला को छड़ी लेकर चलते हुए और चिपकने वाले कागज़ के आविष्कारक को चर्च में गाते हुए अपने आविष्कार की की प्रेरणा मिली थी- कम से कम कहा तो यही जाता है.

लेकिन आज उम्मीद यही की जाती है कि नई खोजें प्रयोगशाला में बहुत से प्रयोगों और प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद हों. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि घरों में आविष्कार करने का वक्त ख़त्म हो गया है.

स्वान्जी के मॉरिस्टन अस्पताल में एनेस्थीसिया सलाहकार डॉ. डेविड विलियम्स और डॉ जॉन डिंग्ले के दिमाग में 'शेकरस्कोप' को बनाने का आइडिया तब आया जब वो अपने गैराज में ग्लू-गनों और कार बॉडी फ़िलर के साथ काम कर रहे थे.

ट्रेवर बाइल के विंड-अप रेडियो (एक तरह चाबी भरकर चलने वाला) से प्रेरणा लेकर उन्होंने "करीब-करीब मज़ाक़" में सोचा कि क्या स्वास्थ्य की दुनिया में भी ऐसे सस्ते और आसानी से प्रयोग में आने वाले उपकरण बनाए जा सकते हैं.

तीन मिनट तक रोशनी

दूरदराज के इलाकों में काम करने के अनुभव के चलते डॉ. विलियम्स जानते थे कि ऐसा उपकरण कितना महत्वपूर्ण हो सकता है जिसे लगातार बाहरी ऊर्जा की ज़रूरत न हो.

उन्होंने ज़ांबिया में देखा था कि बिजली आपूर्ति का उचित प्रबंध न होने की वजह से पूरा ऑपरेशन थिएटर ही बेकार पड़ा था.

शायद इसीलिए इन डॉक्टरों ने ज़रूरी मेडिकल उपकरणों को निश्चित बजट में तैयार करने की चुनौती ले ली.

एक हफ़्ते तक पारंपरिक मेडिकल उपकरणों के पुर्ज़े खोलने के बाद वो एक ऐसा प्रारूप बनाने में क़ामयाब हो गए जो ज़िंदगियां बचाने में सक्षम हो.

'शेकरस्कोप' रोशनी फेंकने वाला एक ऐसा ही उपकरण है जिसे लोगों की आंखों, कान और गले में झांकने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सामान्य उपकरणों के विपरीत इसमें बैटरी डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती है.

इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियर्स के डॉ۔ पैट्रिक फ़िनले कहते हैं, "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 95% मेडिकल उपकरण विकासशील देशों में काम नहीं कर पाते हैं. अक्सर पश्चिमी डिज़ाइनर विकासशील देशों की परिस्थितियों को समझ ही नहीं पाते हैं."

वह कहते हैं, "इस तरह के आविष्कार बहुत महत्वपूर्ण हैं. इस तरह के स्कोप (आंख, कान, मुंह को रोशनी डालकर झांकने वाला उपकरण) के साथ सामान्यतः आपको तीन अलग उपकरण चाहिए होते हैं और सबमें बैटरी लगती है. कम आय वाले देशों के लिए यह एक मज़ाक है."

शेयरस्कोप के अंदर एक ताकतवर खिसकाने योग्य चुंबक है जिसके चारों ओर तारें लिपटी हैं.

जैसे कि मिशेल फ़राडे ने 1831 में बताया था कि चुंबक तारों के ऊपर घूमता है तो चुंबकीय क्षेत्र तारों में बिजली का करंट छोड़ता है. इसी आधार पर शेकरस्कोप को 30 सेकेंड तक हिलाकर इससे तीन मिनट तक रोशनी दी जा सकती है.

डॉ. विलियम्स कहते हैं, "यह बहुत ज़्यादा समय नहीं देता, लेकिन कान और आंख के निरीक्षण या श्वासनली ट्यूब डालने के लिए ये पर्याप्त है."

सीखा भी, बनाया भी

एक बार इस स्कोप को हिला दिया जाए तो इसकी ऊर्जा को हफ़्तों तक सहेजकर रखा जा सकता है. इसमें सामान्य बल्ब के बजाए एलईडी का इस्तेमाल किया गया है जो करीब 10,000 घंटे तक चल सकता है.

डॉक्टरों के दल ने इसमें बदलने वाले हेड लगाए हैं ताकि इसे एक से ज़्यादा उपकरणों में बदला जा सके.

इसका अब तक का सबसे शानदार उपयोग लैरीन्गोस्कोप के रूप में रहा है. यह एक ऐसा उपकरण होता है जो मुंह के पीछे की ओर रोशनी देता है जिससे मरीज़ को सांस लेने में दिक्कत होने पर एनेस्थीसिस्ट मुंह के रास्ते सांस लेने वाला पाइप डाल सकता है.

Image caption शेयरस्कोप में अलग-अलग अटैचमेंट लगाकर इसे कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है

इसका अफ़गानिस्तान के सैनिक अस्पतालों, युगांडा और 2010 में हैती में भूकंप के बाद प्रयोग किया जा चुका है.

डॉ. विलियम्स कहते हैं इसे बनाना एक बहुत उतार-चढ़ाव भरा और सिखाने वाला अनुभव रहा है. "एक अच्छा विचार आना आसान है. लेकिन इसे हकीकत में उतारने कि लिए बहुत ज़्यादा समर्पण की ज़रूरत पड़ती है."

शुरुआत में दोनों डॉक्टरों ने ज़्यादा से ज़्यादा काम घर से किया. इसमें खुद ही माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सीखना भी शामिल था ताकि वह कंप्यूटर की सहायता से बने अपने डिज़ाइन को सही बना सकें.

किस्मत की बात थी कि डॉ. विलियम्स की पत्नी एक मूर्तिकार हैं जो धातु के बड़े टुकड़ों पर काम करती हैं. वह पहले भी उनकी वर्कशॉप से ग्लू-गन और दूसरे उपकरण उधार लेते रहते थे.

यह उपकरण घर में बने उन बहुत से साधारण उपकरणों में से एक है जो इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रदर्शित किए गए हैं.

अब इसके आविष्कारक डॉक्टर्स कहते हैं कि वह अपनी तकनीकी क्षमताओं के शिखर तक पहुंच चुके हैं और उन्होंने इसके निर्माण और डिज़ाइन का काम एक बड़ी कंपनी को दे दिया है.

लेकिन अब एक बार फिर ये एनेस्थीसिस्ट अपने गैराज में लौट गए हैं और नई ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं.

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