'मल्टीटास्किंग में महिलाएँ पुरुषों से बेहतर'

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ब्रितानी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार महिलाएँ कई काम एक साथ करने में पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा सक्षम होती हैं, कम से कम कुछ मामलों में तो ऐसा ही है.

इस शोध के परिणामों के अनुसार महिलाएँ तनावभरी जटिल परिस्थितियों में भी सोच-विचारकर काम करने में ज़्यादा सक्षम होती हैं.

मनौवैज्ञानिकों के इस दल के अनुसार विभिन्न कामों के बीच तेज़ी से संतुलन बनाने के मामले में पुरुष महिलाओं के मुकाबले सुस्त और अव्यवस्थित होते हैं.

बीएमसी साइकॉल्जी नामक शोधपत्र में प्रकाशित इस शोध के अनुसार विभिन्न कामों के बीच तालमेल बैठाने में दोनों को दिक्कत होती है, लेकिन औसतन पुरुषों को इसमें ज़्यादा समस्या होती है.

इस शोध में यह सवाल भी उठाया गया है, "आख़िरकार ऐसा क्यों होता है? और क्या हर तरीके के काम में ऐसा ही होता है या कुछ कामों में ही?"

शोधकर्ताओं ने पहले शोध के लिए 120 पुरुषों और 120 महिलाओं का कंप्यूटर टेस्ट लिया और मिले परिणामों की तुलना की.

इस परीक्षण में दोनों वर्गों को गिनती करने और विभिन्न प्रकार की आकृतियों में से चुनाव करना था.

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काम में अंतर का असर

Image caption मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि महिला तनाव के माहौल में ज़्यादा ठंडे दिमाग से सोच सकती हैं.

इस परीक्षण में जब पुरुषों और महिलाओं के एक काम दिया गया, तो दोनों का प्रदर्शन समान था.

जब दोनों को मिले-जुले तरह के काम दिए गए, तो उनके प्रदर्शन के बीच फ़र्क साफ़ देखा जा सकता था.

मिले-जुले काम देने पर महिलाओं और पुरुषों दोनों के काम की गति में कमी आई और परिवर्तन की गति बढ़ने के साथ ही दोनों द्वारा की जाने वाली ग़लतियों की संभावना भी बढ़ती गई.

जबकि पुरुषों ने प्रतिक्रिया देने में 77 प्रतिशत और महिलाओं ने 69 प्रतिशत ज़्यादा समय लिया.

इस शोधपत्र के सह-लेखक और ग्लासगो विश्वविद्यालय के डॉक्टर गिजबर्ट स्टोएट ने बीबीसी को बताया, "यह अंतर देखने में कम लगता है, लेकिन यह काम के घंटे बढ़ने के साथ ही बढ़ता जाता है."

इस परीक्षण को व्यावहारिक जीवन के लिए ज़्यादा प्रासंगिक बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने दूसरा परीक्षण किया.

पुरुषों और महिलाओं के एक समूह को कई काम एक साथ करने को कहा गया. इस समूह को एक साथ ही नक्शे पर एक रेस्तरां खोजने, गणित का एक साधारण सवाल हल करने, फ़ोन कॉल का जवाब देने और घास के मैदान में खोई चाभी ढूंढने का काम दिया गया. इन सभी कामों के लिए हर समूह को मात्र आठ मिनट का समय दिया गया.

आठ मिनट में ये सारे काम करना असंभव था, इसलिए महिलाओं और पुरुषों को तनाव में दिमाग़ को ठंडा रखकर, समय का पूरा सदुपयोग करते हुए विभिन्न कार्यों के बीच अपनी प्राथमिकता तय करनी थी.

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चाभी की खोज

शोधपत्र की सह-लेखक और हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर कीथ लॉज कहते हैं, "चाभी खोजने के काम में महिलाओं ने साफ़ तौर पर पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन किया. महिलाओं ने संकेंद्री वृत्तों के पैटर्न में चाभी खोजी, जो खोई हुई चीज़ खोजने का ज़्यादा लाभदायक तरीका था. जबकि कुछ पुरुषों ने तो पूरे मैदान में देखा भी नहीं. उन्होंने चाभी ढूंढने के लिए कोई ख़ास तरीका नहीं अपनाया."

प्रोफ़ेसर कीथ मानते हैं कि पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार में यह अंतर इसलिए दिखा क्योंकि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में ज़्यादा व्यवस्थित होती हैं.

वे कहते हैं, "महिलाएँ काम शुरू करने के पहले पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा विचार करती हैं. पुरुष थोड़े आवेशी होते हैं, वे तत्काल किसी चीज़ में कूद पड़ते हैं."

प्रोफ़ेसर कीथ के अनुसार, "इससे पता चलता है कि तनावग्रस्त जटिल परिस्थिति में महिलाएँ उनके सामने मौजूद समस्या पर पुरुषों से ज़्यादा ठहरकर विचार कर सकती हैं."

Image caption कुछ लोग महिलाओं के कई कामों के बीच बेहतर तालमेल बैठाने को जैव विकासवाद में सहायक मानते हैं.

इन शोध के बाद शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कम से कम कुछ मामलों में तो महिलाएँ कई तरह के काम करने में पुरुषों की तुलना में बेहतर स्थिति में होती हैं.

मगर ऐसा नहीं है कि यह शोध सभी पुरुषों को सभी महिलाओँ से कमतर बताता है.

प्रोफ़ेसर कीथ कहते हैं,"नि:संदेह बहुत से पुरुष अपने काम में विशेषज्ञ हैं. हम यह दावा नहीं करते कि सभी पुरुष एक साथ कई सारे काम नहीं कर सकते. बल्कि हम कह रहे हैं कि एक औसत महिला, एक औसत पुरुष की तुलना में अपने समय का सुदपयोग करने और विभिन्न कार्यों के बीच तालमेल बैठाने में बेहतर होती है."

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आखिर ऐसा क्यों?

यदि महिलाएँ पुरुषों से बहुविध कार्य करने में सचमुच बेहतर हैं, तो इसकी क्या वजह हो सकती है?

डॉ. स्टोएट और प्रोफ़ेसर कीथ के प्रेक्षण के अनुसार जिन मामलों में अभ्यास द्वारा विभिन्न तरह के काम करने में प्रवीण हो सकते हैं. उनमें पुरुषों के ख़राब प्रदर्शन के पीछे पुरुषों का किसी काम को सीखने का ग़लत तरीक़ा हो सकता है.

कई लोग इस अंतर के लिए विकासवादी सिद्धांत देते हैं, जिसके अनुसार जैव विकास के क्रम में पुरुष भोजन लाने वाला और महिला घर चलाने वाली रही है.

डॉक्टर स्टोएट कहते हैं, "सीधे शब्दों में कहें, तो अगर महिलाएँ कई काम एक साथ न कर सकतीं, तो हम आज विकास के इस स्तर तक न पहुँच पाते."

उनका मानना है कि इस तरह की परिकल्पना से महिलाओं के बारे में रूढ़ छवि उभरती है, यानी महिलाओं का काम घर में खाना बनाना और बच्चे पालना है जबकि पुरुष बाहर जाकर शिकार करते हैं और भोजन जुटाते हैं.

डॉक्टर स्टोएट कहते हैं कि जैव विकास के दौरान एकनिष्ठ होकर काम करना हमारे लिए शायद ज़्यादा लाभकारी हो सकता है.

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