मदर इंडिया की कोख से दो जोड़ी जुड़वा का जन्म

Image caption भारत में हर साल ब्रिटेन से सैकड़ों दंपति सेरोगेसी के लिए आते हैं.

एक ब्रितानी दंपति जल्द ही दो जुड़वा बच्चों के माता-पिता बनने वाले हैं, जो फ़िलहाल दो भारतीय सरोगेट महिलाओं की कोख में पल रहे हैं. ये दंपति महिलाओं से नहीं मिला है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्विबलिंग्स यानी एक ही समूह के भ्रूणों के ज़रिए अलग-अलग सरोगेट माताओं से बच्चों का जन्म भारत में असामान्य नहीं है.

इन चारों बच्चों का जन्म मार्च 2014 में संभावित है. इन्हें मुंबई स्थित एक क्लीनिक में व्यवसायिक सरोगेसी समझौते के तहत जन्म दिया जाएगा.

इन बच्चों के पिता की उम्र 35 वर्ष और मां की उम्र 36 वर्ष है और उन्होंने अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करने की गुज़ारिश की है. ये दंपति ब्रिटेन में दो गर्भपात और गर्भधारण के कई असफल प्रयासों के बाद मई में भारत आए.

सरोगेसी का गढ़

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, "मैंने सोचा कि इंतज़ार क्यों करें और क्यों समय बर्बाद किया जाए, उतार-चढ़ाव से गुज़रें और फिर प्रयास करें. हम पिछले 10 साल से यही कर रहे हैं."

इस बात के आधिकारिक आंकड़े तो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सरोगेसी मामलों की विशेषज्ञ वकील नेटली गैंबल का अनुमान है कि हर साल सैकड़ों ब्रितानी दंपति सरोगेसी के लिए भारत आते हैं.

मुंबई स्थित कोरियन क्लीनिक में भ्रूण तैयार करने के लिए दंपति के अंडाणुओं और शुक्राणुओं का निषेचन किया गया. इसके बाद गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए उन्हें दो अलग-अलग सरोगेट में प्रत्यारोपित कर दिया गया.

पति ने बताया कि, "हमारे छह भ्रूण सुरक्षित थे और आमतौर पर आप एक सरोगेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मैंने दो सरोगेट की मदद लेने और प्रत्येक में तीन को प्रत्यारोपित करने के बारे में सोचा."

दो जुड़वा बच्चे

Image caption भारत में सेरोगेसी उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है.

क़रीब एक महीने बाद क्लीनिक ने मां को ख़बर दी कि एक सरोगेट गर्भवती है और उसके जुड़वा बच्चे हैं. यह सुनकर वो दोनों काफ़ी ख़ुश हुए.

अगले दिन क्लीनिक से एक और फ़ोन आया. पत्नी ने कहा, "दूसरी सरोगेट में उन्हें दो धड़कनें सुनाई दी हैं. क्लीनिक को डर था क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था."

पत्नी ने आगे बताया, "उन्होंने हमसे पूछा कि आप क्या चाहते हैं? वर्ना हमें तुरंत बताइए और हम आवश्यक क़दम उठाएंगे."

हालांकि दंपति ने बताया कि किसी भी गर्भ को गिराने का कोई सवाल ही नहीं उठता था. उन्होंने बताया, "क़त्तई नहीं, अगर दोनों में तीन-तीन बच्चे भी होते तो हम उन्हें ज़रूर अपनाते."

कितनी आती है लागत

Image caption जाने माने अभिनेता आमिर ख़ान और उनकी पत्नी किरण राव ने सरोगेसी के ज़रिए बच्चे को जन्म दिया है.

अगले कुछ महीनों में वो अपने चारों बच्चों को साथ ले जाने की उम्मीद में भारत आएंगे. उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने क्लीनिक को कितना भुगतान किया, हालांकि भारत में सरोगेसी पैकेज आमतौर पर 16 लाख रुपए से लेकर 20 लाख रुपए तक होता है.

ये दंपति उन दोनों महिलाओं के शुक्रगुज़ार हैं जो उनके बच्चों को अपनी कोख में पाल रही हैं, लेकिन उनका सरोगेट महिलाओं से मिलने का कोई इरादा नहीं है.

उन्होंने बताया, "वो हमारे लिए काम कर रही हैं, आप अपने बिल्डर या माली से कितनी बातचीत करते हैं. उन्हें इसके लिए पैसे मिलेंगे. हमें उनसे मिलने की ज़रूरत नहीं है."

हालांकि इस मामले को लेकर ब्रिटेन में स्वास्थ्य पेशेवरों ने चिंता जताई है. बर्मिंघम महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ रीमा राजखोवा का कहना था, "यह चिंताजनक है. जो माता-पिता चिकित्सा क्षेत्र से नहीं जुड़े हैं, वो एक साथ कई गर्भधारण के साथ जुड़े जोखिमों से परिचित नहीं हैं."

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में शायद ही कोई क्लीनिक ऐसा करेगी.

सरोगेसी के क़ानून

वकील नेटली गैंबल कहती हैं, "इसकी अनुमति यहां नहीं होगी. गर्भधारण क्लीनिक के नियमों के मुताबिक़ इस बात को लेकर सख़्त नियम हैं कि कितने भ्रूणों को प्रत्यारोपित किया जा सकता है और निश्चित रूप से आप एक ही चक्र में एक साथ दो सरोगेट में भ्रूणों को प्रत्यारोपित नहीं कर सकते हैं."

लेकिन भारत में गर्भधारण क्लीनिक में ऐसा आम है. यहां सरोगेसी को नियंत्रित करने के लिए कोई क़ानून नहीं है.

कोरियन क्लीनिक के डॉ. कौशल कदम ने बताया कि, "आमतौर पर एक ही सरोगेट होती है लेकिन कभी-कभी दंपति एक से अधिक सरोगेट चाहते हैं."

ऐसे बच्चों के लिए एक नया शब्द – ट्रिबलिंग बनाया गया है. ये बच्चे पूरी तरह से जुड़वा हैं और न ही पूरी तरह से भाई-बहन का नाता है.

ट्रिबलिंग एक ऐसा शब्द है जो भारत के अरबों डॉलर के सरोगेसी उद्योग की देन है. आलोचकों का कहना है कि इसमें मुनाफ़ा एकमात्र मक़सद है. इसबीच भारत सरकार पर सरोगेसी उद्योग के लिए क़ानून बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है.

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