CO2 के उत्सर्जन में कमी के संकेत

दुनिया में कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन की बढ़ने की गति में स्थायी कमी आने के संकेत दिखने लगे हैं.

नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में उत्सर्जन पिछले एक दशक के औसत के आधे से भी कम बढ़ा है.

इसकी मुख्य वजह अमरीका का ऊर्जा के लिए चट्टानों से निकलने वाली गैस यानी शेल गैस की ओर जाना है जबकि चीन में हाइड्रोपावर का इस्तेमाल 23 फ़ीसदी बढ़ा है.

इसके बावजूद सस्ते कोयले का इस्तेमाल अभी एक मुद्दा है, जिसकी खपत ब्रिटेन में एक चौथाई से ज़्यादा बढ़ी है.

विश्व व्यापी उत्सर्जन के रुझान पर सालाना रिपोर्ट नीदरलैंड्स इनवायरमेंट एसेसमेंट एजेंसी और यूरोपीयन कमीशन के साझा शोध केंद्र द्वारा बनाई जाती है.

इसमें पाया गया कि कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 2012 में 34.5 अरब टन के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया.

इसमें बढोतरी की दर 1.4 फ़ीसदी थी जबकि ग्लोबल इकोनॉमी 3.5 फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है.

जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी

उत्सर्जन और आर्थिक विकास के बीच ये अलगाव बताता है कि जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कम हो रहा है जबकि नवीनीकृत ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऊर्जा बचत भी बढ़ी है.

दुनिया के मुख्य उत्सर्जकों में चीन, अमरीका और यूरोपीयन यूनियन का हिस्सा 55 फीसदी का था. रिपोर्ट लेखकों के अनुसार इन तीनों क्षेत्रों में कमी उल्लेखनीय बदलाव के कारण हुई.

चीन में उत्सर्जन यद्यपि तीन फ़ीसदी बढ़ा है लेकिन ये पिछले दशकों की 10 फीसदी वार्षिक औसत बढोतरी की तुलना में उल्लेखनीय तौर पर कम है.

चीन के कार्बन डाईऑक्साइड में कमी के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं. पहला बड़े पैमाने पर आर्थिक उत्साहन पैकेज में कमी आना है जिसकी वजह से ये बिजली और ऊर्जा के दामों में बढोतरी जीडीपी दर से आधी हुई है.

रिपोर्ट के लेखकों में एक डॉ. ग्रीट माएनहुइट ने बीबीसी से कहा, " वो अर्थव्यवस्था को कम गति से बढाना चाहते हैं."

कोयले के दामों में कमी

अमरीका में शेल गैस में बढोतरी से कोयला के दामों में गिरावट आई है, यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं भी इसी ओर जा रही हैं.

ब्रिटेन वर्ष 2006 के बाद कोयले की बड़ी खपत की ओर बढ़ रहा है, जो एक साल में 24 फ़ीसदी तक पहुंच चुका है. यही उठान स्पेन, फ्रांस और जर्मनी में भी देखा जा रहा है. वहीं इसके विपरीत पोलैंड और चेक गणराज्य ने इसके इस्तेमाल में चार से आठ फ़ीसदी तक की कमी की है.

डॉ. माएनहुइट कहते हैं, "जर्मनी, नीदरलैंड और इटली जैसे देशों में नए कोल प्लांट लग रहे हैं और ये फ़ैसला अगले 40 सालों के लिए है- आप इसे नियंत्रित कर सकते हैं, ये बड़ी समस्या नहीं है. लेकिन CO2 का कम होना बिल्कुल नाटकीय है."

चीन ने बिजली के उत्पादन में हाइड्रोपॉवर के इस्तेमाल में असाधारण तौर पर सफलता पाई है, वर्ष 2012 में इसकी क्षमता न केवल बढी बल्कि उत्पादन भी 23 फ़ीसदी तक बढ़ा. इससे देश के उत्सर्जन में अकले 1.5 फ़ीसदी तक की कटौती हुई.

अमरीका में शेल क्रांति

अमरीका में शेल क्रांति लगातार जारी है. इससे कुल मिलाकर उत्सर्जन में चार फ़ीसदी तक की कटौती हुई, वजह ये भी है कि बिजली उत्पादन में कोयले की जगह गैस पर ज़ोर दिया जा रहा है.

शेल से अमरीका की एक तिहाई गैस का उत्पादन हो रहा है और ये उनके तेल उत्पादन का एक चौथाई है.

सबसे बड़ी कमी यूरोपीय यूनियन में आर्थिक मंदी की वजह से भी आई है. 27 देशों के ब्लॉक में उत्सर्जन में 1.3 फीसदी की कमी आई.

ऐसा तेल और गैस से ऊर्जा खपत में कमी के चलते भी हुआ. सड़क परिवहन में चार फ़ीसदी की कमी आई है.

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