क्या सगे भाई-बहन भी करते हैं दादागिरी?

बच्चों की दादागिरी

सहोदर (सिब्लिंग्स) यानी सगे भाई-बहन अक्सर एक दूसरे से झगड़ते रहते हैं लेकिन जब यह खींच-तान जब दादागिरी में बदल जाए तो मां-बाप को क्या करना चाहिए?

सहोदरों के रिश्ते जटिल होते हैं और बचपन में तो और भी मुश्किल. लेकिन समाज अक्सर इस खींचतान-झगड़े को खेल और ऐसे झगड़े जिनमें खेल कम हो- को लड़कपन का एक हिस्सा मान लेते हैं.

न्यू हैंपशर विश्वविद्यालय की कोरिना टकर कहती हैं, "लोग बच्चों की आपसी खींचतान को सहोदरों के बीच प्रतियोगिता कहकर हल्के में लेते हैं."

टकर सामान्य बाल चिकित्सा पर एक नए शोध की मुख्य लेखिका हैं.

इस शोध में जिन 3,600 बच्चों से बात की गई उनमें से एक तिहाई ने कहा कि वे पिछले 12 महीने में किसी न किसी तरह सहोदर की आक्रामकता के शिकार हुए हैं. इसमें चोरी, शारीरिक हमले से लेकर भावनात्मक शोषण भी शामिल हैं.

इसकी तुलना में हर साल स्कूलों में होने वाली आक्रामकता के शिकार बच्चों की संख्या एक चौथाई है.

पहचान ज़्यादा

Image caption कुछ अभिभावकों का मानना है कि भाई-बहन के बीच खींचतान अच्छी होती है

कोरिना टकर ने अपने शोध में 'सहोदर आक्रामकता' का इस्तेमाल किया है. लेकिन मनोवैज्ञानिक भाइयों-बहनों के बीच होने वाले खराब बर्ताव के लिए ज़्यादा प्रचलित शब्द का इस्तेमाल करते हैं- दादागिरी.

इसे विशेषज्ञ जानबूझकर की गई आक्रामकता मानते हैं जो एक समयावधि में कई बार की जाती है, जहां एक व्यक्ति या समूह किसी अन्य को काबू करने की स्थिति में हो.

इसलिए सहोदरों के संबंध दादागिरी के लिए एक आदर्श स्थिति पैदा करते हैं क्योंकि बच्चे लंबे समय तक एक साथ रहते हैं और अक्सर उनमें मानसिक और शारीरिक शक्ति का अंतर भी होता है. हालांकि हो सकता है कि सीधे दुर्भावना न हो लेकिन जलन अक्सर होती है.

टकर कहती हैं, "सहोदरों के संबंध भावनात्मक रूप से सघन होते हैं- यह ऐसा संबंध है जिसमें आप एक ही समय में उन्हें प्यार भी करते हैं और नफ़रत भी. और सहोदर परिवार के स्रोत और मां-बाप का ध्यान खींचने के लिए स्वाभाविक प्रतियोगी होते हैं."

लॉरा- जो चार सहोदरों और एक सौतेले भाई के साथ बड़ी हुई हैं- उस वक़्त इसे दादागिरी नहीं मानती थीं, लेकिन ओहियो के घर में आने के बाद जो हुआ उसे वह दादागिरी मानती हैं.

यह कहते हुए उनकी आवाज़ टूटने लगती है, "मेरा बड़ा भाई- मैं कहूंगी कि हम सबको पीटा करता था."

डरावना

हालांकि उसने किसी को बुरी तरह चोट नहीं पहुंचाई लेकिन वह अपनी बहनों के कुश्ती किया करता और उन्हें ज़मीन पर दबा देता. लॉरा कहती हैं, "वह बड़ा था और हमसे ताकतवर था- वह हमें बेहद शक्तिहीन स्थिति में डाल देता था. यह बहुत डरावना था."

उन्हें लगता है कि परिवार के अस्तव्यस्त वक़्त में- अवसाद की शिकार उनकी मां, घर छोड़कर चली गई थी- ये हरकतें उनके भाई को नियंत्रण का क्षणिक अहसास देती थी.

सभी बच्चे ख़ासतौर पर सबसे छोटी बहन, ट्रेसी, के प्रति ख़राब बर्ताव करते थे- जो मां की चहेती थी. दोपहर में स्कूल के बाद से तब तक जब उनके पिता घर नहीं लौट आते वह उसे परेशान करते. जब तक ट्रेसी मां को फ़ोन कर उन्हें रोकने को नहीं कहती.

Image caption भाई-बहन की दादागिरी को अब कुछ पहचाने जाने लगा है.

लॉरा कहती हैं, "मुझे याद है हम उसे कहते थेः मां कुछ नहीं कर सकती- वह यहां नहीं आ रही. और मेरे पिता- इतने हारे हुए थे कि वह ज़्यादा गंभीर चीज़ों को सुलझाने में ही लगे रहते थे."

उनके पिता ने बाद में लॉरा को बताया कि उन्होंने उसके दूध-भाई को फिर से अनाथालय भेज दिया था क्योंकि लॉरा की बीच की बहनें, जो जुड़वा थीं, उसे बहुत परेशान करती थीं.

सहोदरों की दादागिरी को अब ज़्यादा पहचाने जाने लगा है. जनरल ऑफ़ इंटरपर्सनल वॉयलेंस में इस वर्ष छपे एक शोधपत्र में उन तरीकों को रेखांकित किया गया है जिसमें इस दादागिरी को खेल के मैदान और इंटरनेट पर होने वाली दादागिरी से अलग किया जाए.

गंभीर प्रभाव

वयस्क सहोदरों के 27 जोड़ों से इस बारे में सवाल पूछे गए कि बचपन में उन्होंने एक-दूसरे के साथ कैसा बर्ताव किया था. ज़्यादातर ने कहा कि उन्हें दादागिरी का शिकार होना पड़ा था. करीब एक तिहाई ने कहा कि यह सालों चलता रहा. करीब एक तिहाई ने कहा कि वो ज़ुल्मी भी थे और पीड़ित भी.

लेकिन आक्रामकता के बावजूद पीड़ितों और सताने वालों ने नज़दीकी को बहुत ऊंची रेटिंग्स दी- घटनाओं के वर्णन से पहले और बाद में दोनों बार.

सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि बहुमत ने इसे स्वीकार्य माना और करीब-करीब सभी प्रतिभागियों- 85% - ने कहा कि इस तरह का बर्ताव उम्मीद के मुताबिक़ ही है.

टकर कहती हैं कि कुछ अभिभावकों का मानना है कि सहोदरों के बीच टकराव बेहतर हो सकता है क्योंकि ये मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना सिखाता है. लेकिन बच्चों के टेलीफ़ोन सर्वे पर आधारित उनके शोध से पता चलता है कि जिन बच्चों को हाल ही में सहोदरों के गुस्से का सामना करना पड़ा है उनके मानसिक तनाव से ग्रस्त होने की आशंका ज़्यादा है.

शोध

Image caption विशेषज्ञों का मानना है कि भाई-बहन की दादागिरी के प्रभाव गंभीर हो सकते हैं

वारविक विश्वविद्यालय के डीटेर वोक के नेतृत्व में ब्रितानी और इसराइली बच्चों के बड़े समूह पर किए गए शोध के अनुसार जिन बच्चों को घरों में दादागिरी झेलनी पड़ती है उन्हें स्कूल में भी इसका सामना करना पड़ता है- और यह भी कि विशेष तौर पर इस समूह के नाख़ुश रहने या व्यवहार संबंधी दिक्कतों का सामना करने की ज़्यादा आशंका होती है.

सहोदरों की दादागिरी के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में ज़्यादा जानकारियां नहीं हैं. लेकिन एक मनोचिकित्सक और 'रेज़िंग हैप्पी ब्रदर्स एंड सिस्टर्स' की लेखिका जान पार्कर को यकीन है कि ये प्रभाव "गंभीर और जीवनपर्यंत" हो सकते हैं.

लॉरा को यकीन है कि उनके घर में दादागिरी इसलिए हुई क्योंकि उनके अभिभावकों ने दखल नहीं दिया क्योंकि वे अपने ही मसलों में उलझे हुए थे.

वह कहती हैं, "हम लोग बेहद पस्त थे और हमारे झगड़े सुलझाने के लिए बड़ों का सहयोग भी नहीं था."

वो अब 48 साल की हैं और अब शराब की आदत से उबर रही हैं. जवान होने पर उन्होंने अपने भाई-बहनों से काफ़ी अच्छे संबंध बनाए. वह ट्रेसी को "बहुत मजबूत" कहती हैं और अपने बड़े भाई को "भद्र पुरुष" बताती हैं.

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