'ख़त्म हो जाएंगे बहुत से समुद्री जीव'

दुनिया भर के समुद्रों में ऐसिड का स्तर 'अभूतपूर्व गति' से बढ़ता जा रहा है और संभव है कि यह पिछले 30 करोड़ सालों में सबसे ज़्यादा हो.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसिड का स्तर बढ़ने की यह प्रक्रिया साल 2100 में 170 फ़ीसदी तक बढ़ सकती है.

उनका मानना है कि इन परिस्थितियों में 30 प्रतिशत समुद्री प्रजातियों का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा.

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं इसके लिए मनुष्यों द्वारा कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

पोलैंड में अगले हफ़्ते वैश्विक पर्यावरण के मसले पर होने वाली बैठक में इस अध्ययन को पेश किया जाएगा.

घुलता ऐसिड

इस मुद्दे पर दुनिया के 500 से ज़्यादा जाने माने विशेषज्ञ साल 2012 में कैलिफ़ोर्निया में जुटे थे.

इंटरनेशनल बायोस्फ़ेयर-जियोस्फ़ेयर कार्यक्रम की अगुआई में हुए अध्ययन की रिपोर्ट अब प्रकाशित कर दी गई है.

इसमें कहा गया है कि ऐसिड स्तर बढ़ाने में इंसानी गतिविधियों का हाथ है जो हर दिन दो करोड़ 40 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड समुद्र में घोल रहे हैं.

इतनी भारी मात्रा में कार्बन घुलने से समुद्र के पानी का रासायनिक स्वरूप बदल गया है.

औद्योगिक क्रांति

औद्योगिक क्रांति की शुरूआत से लेकर अब तक पानी 26 फ़ीसदी ज़्यादा ऐसिडिक हो गया है.

फ्रांस की राष्ट्रीय शोध एजेंसी सीएनआरसी के प्रोफ़ेसर ज्यां पियरे गटूसो कहते हैं, ''मेरे साथियों ने भूगर्भीय रिकॉर्ड में कभी इतनी तेज़ी से बदलाव होते नहीं देखा है.''

वैज्ञानिकों को सबसे ज़्यादा चिंता है प्रवाल भित्तियों समेत समुद्री प्रजातियों पर पड़ने वाले असर की.

समुद्र की गहराई में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि जहां पानी में ऐसिड का स्तर कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से ज़्यादा है वहां समुद्रिक जैव विविधता का 30 फ़ीसदी हिस्सा इस शताब्दी के अंत तक ख़त्म हो जाएगा.

भविष्य की तस्वीर

Image caption बढ़ता ऐसिड उन समुद्री जीवों के लिए ख़तरा है जिनका कवच कैल्शियम कार्बोनेट से बनता है

शोधकर्ता मानते हैं कि ये आंकड़े भविष्य की तस्वीर दिखाते हैं.

प्रोफ़ेसर गटूसो कहते हैं, ''साल 2100 में जिस तरह ऐसिड का स्तर बढ़ने की संभावना है उसमें कोई भी मोलस्क ज़िंदा नहीं रह सकता. यह निश्चित रूप से बेहद चौंकाने वाला है."

उन्होंने कहा, "ये तस्वीर पूरी तरह से सही नहीं है. इन जगहों पर केवल सामुद्रिक ऐसिड बढ़ रहा है लेकिन ये इस शताब्दी में बढ़ रहे तापमान को नहीं दिखाती. अगर आप दोनों को मिला दें तो स्थिति बहुत नाटकीय हो जाएगी.''

ऐसिड का सबसे ज़्यादा असर आर्कटिक और अंटार्कटिक में देखा जा रहा है.

नुकसानदायक

इन समुद्रों में कार्बन कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा और गैस का बढ़ता स्तर उन्हें बाक़ी दुनिया के मुक़ाबले बहुत तेज़ी से ऐसिड युक्त बना रहा है.

यह स्थिति समुद्री जीवों के लिए बेहद नुकसानदायक है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि 2020 तक आर्कटिक का दस प्रतिशत हिस्सा उन प्रजातियों के लिए असह्य हो जाएगा जिनका कवच कैल्शियम कार्बोनेट से बनता है.

सामुद्रिक संरक्षण ज़ोन बनाने से कुछ समय के लिए मदद मिल सकती है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबी अवधि में केवल उत्सर्जन में कमी ही ऐसिड स्तर में बढ़ोत्तरी की समस्या से राहत दे सकती है.

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