'बहती नाक के लिए नहीं है एंटीबायोटिक'

  • 19 नवंबर 2013
बहती नाक
Image caption एक विशेष प्रोटीन के कारण बलगम और बहती नाक का रंग हरा होता है.

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नाक बहने और हरे बलगम के इलाज के लिए एंटीबायोटिक नहीं है.

उनका कहना है कि ऐसे संक्रमण के इलाज के लिए दवा की ज़रूरत एक प्रचलित मिथक है, जिसका कोई आधार नहीं है.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और रॉयल कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स के मुताबिक़ वायरस के कारण अक्सर ये लक्षण दिखते हैं और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से जीवाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा कि उसने अपने शोध में पाया कि 40 फ़ीसदी लोग मानते हैं कि एंटीबायोटिक से उनकी खांसी अगर बलगम हरा हो, जबकि कुछ ही लोग मानते हैं कि उनकी बलगम की समस्या दूर हो जाएगी.

'मिथक'

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की डॉक्टर क्लिओडना मैकनल्टी ने कहा, ''यह एक मिथक है कि हरे बलगम और नाक बहने की परेशानी से जूझ रहे लोगों को ठीक होने के लिए एंटीबायोटिक लेने की ज़रूरत है.''

उन्होंने कहा कि अधिकांश संक्रमण जिनमें बलगम निकलता है या नाक बहती है वो वायरस के कारण होते हैं. यह अपने आप ठीक हो जाते हैं. हालांकि आप कुछ सप्ताह तक कमज़ोरी महसूस कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक के प्रति जीवाणुओं के प्रतिरोध की समस्या बढ़ती जा रही है. हर किसी को सामान्य संक्रमण में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बचना चाहिए.

एंटीबायोटिक दवाएं इंसान के शरीर में मौजूद अरबों जीवाणुओं को प्रभावित करती हैं और इनसे जीवाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है.

'गंभीर समस्या'

रॉयल कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स की अध्यक्ष डॉक्टर मौरीन बेकर ने कहा, "एंटीबायोटिक का अत्यधिक सेवन एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या है."

उनका मानना है कि संक्रमण को ख़त्म करने के लिए इस्तेमाल किए गए एंटीबायोटिक को संक्रमण अपने अनुरूप बना लेता है और इस तरह इलाज बेअसर हो जाता है. ऐसे में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सोच-समझकर करना बहुत ज़रूरी है.

बलगम का हरा रंग उस प्रोटीन की वजह से होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाती है.

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