बच्चों से तेज़ रफ़्तार उनके मम्मी-पापा

  • 25 नवंबर 2013
ग्लोबल फ़िटनेस बच्चे माता पिता दौड़

ज़्यादातर बच्चे जवानी के दिनों में अपने माता-पिता जितना तेज नहीं दौड़ पाते हैं. ग्लोबल फ़िटनेस के एक ताज़ा शोध में पता लगा है कि बच्चों में तंदुरुस्ती का स्तर गिर रहा है.

इस रिपोर्ट को अमरीकी हार्ट एसोसिएशन की सालाना बैठक में पेश किया जाएगा.

शोधकर्ताओं ने 46 साल के आंकड़े जुटाए. इस शोध में 28 देशों के ढाई करोड़ से अधिक लोगों को शामिल किया गया.

शोधकर्ताओं ने बताया कि आज बच्चे 30 साल पहले अपने माता-पिता के मुक़ाबले एक मील की दूरी 90 सेकेंड की देरी से तय करते हैं.

मोटापा बढ़ा

दुनिया भर में ह्रदयवाहिनी की क्षमता के आधार पर पता लगाया जाता है कि एक निश्चित समय में बच्चे कितनी दूर तक दौड़ सकेंगे.

नतीजों से पता चला है कि यह क्षमता हर दशक में करीब पांच प्रतिशत की दर से घटती गई है.

यह गिरावट नौ से 17 साल की उम्र तक के सभी लड़कों-लड़कियों में देखी गई. इसकी वजह मोटापा बताया गया है और कुछ देशों में इसकी स्थिति काफ़ी ख़राब है.

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. ग्राट टॉमकिंसन ने बताया, "वास्तव में क़रीब 30 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक गिरावट सीधे पेट की चर्बी से जुड़ी है."

टॉमकिंसन यूनीवर्सिटी ऑफ साउथ आस्ट्रेलिया के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ से जुड़े हुए हैं.

मेहनत ज़रूरी

यह समस्या मुख्य रूप से पश्चिमी देशों में है लेकिन दक्षिण कोरिया, चीन और हान्गकॉन्ग जैसे कुछ एशियाई देशों में भी ऐसा देखा गया है.

डॉ. टॉमकिंसन ने कहा कि बच्चों को अधिक शारीरिक परिश्रम और व्यायाम करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है.

अगर ऐसा नहीं किया गया, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे.

डॉ. टॉमकिंसन का कहना है, "अगर कोई युवा व्यक्ति आमतौर पर अस्वस्थ्य रहता है, तो इसकी आशंका रहती है कि आगे चलकर वो ह्रदयरोग का शिकार हो जाए."

स्वस्थ रहने के लिए बच्चों और युवाओं को दिन में कम से कम एक घंटे दौड़ने या साइकिल चलाने जैसी शारीरिक गतिविधि ज़रूर करनी चाहिए.

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