2050 तक तिगुने हो जाएँगे डिमेंशिया के मामले

  • 5 दिसंबर 2013

एक नए अध्ययन के मुताबिक 2050 तक दुनिया में डिमेंशिया या मानसिक विक्षिप्तता की बीमारी से जूझ रहे लोगों की संख्या तीन गुनी हो जाने की आशंका है.

अल्ज़ाइमर्स डिज़ीज इंटरनेशनल का कहना है कि वर्तमान में इस बीमारी से 4.4 करोड़ लोग पीड़ित हैं लेकिन 2050 तक इनकी संख्या 13.5 करोड़ हो जाएगी.

लंदन में अगले सप्ताह होने वाले जी-8 डिमेंशिया समिट से पहले ये आंकड़े जारी किए गए हैं.

अल्ज़ाइमर्स डिज़ीज़ इंटरनेशनल को आशंका है कि जिस तरह ग़रीब और मध्य आय वाले देशों में लोगों की औसत आयु बढ़ रही है उससे इस तरह के मामले और बढ़ेंगे. संगठन के अनुसार ये मामले ख़ासतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया और अफ़्रीका में सामने आ सकते हैं.

फ़िलहाल मानसिक विक्षिप्तता के 38 फ़ीसदी मरीज़ धनी देशों में हैं लेकिन 2050 तक यह संतुलन पूरी तरह से बदल जाएगा. उस वक्त तक दुनिया के 71 फ़ीसदी मरीज़ गरीब और मध्यम आय वाले देशों के होंगे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतर सरकारें डिमेंशिया की इस महामारी से निपटने के लिए उदासीन हैं.

अल्जाइमर डिज़ीज इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक मार्क वोर्टमन ने कहा, ''यह एक वैश्विक महामारी है और यह बिगड़ती जा रही है. यदि हम भविष्य को देखें तो वृद्ध लोगों की आबादी में तेजी से वृद्धि होने वाली है.''

इंग्लैंड की अल्ज़ाइमर्स सोसायटी के मुख्य कार्यकारी जेरेमी ह्यूज़ ने कहा कि डिमेंशिया तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. यह आज की पीढ़ी के लिए सामाजिक देखभाल से जुड़ी एक बड़ी चुनौती है.

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