तकनीक करेगी शरणार्थियों की दिक्कतें कम

  • 20 दिसंबर 2013
शरणार्थी सौर ऊर्जा झोपड़ी

शरणार्थी और बेघर लोग संभवतः दुनिया के सबसे कमज़ोर लोग होते हैं. इन्हें कई साल तक एक कुटिया में बेहद मुश्किल परिस्थितियों- तेज़ गर्मी, बाढ़, संचार के साधनों के बिना या बहुत कम साधनों से साथ रहना पड़ता है.

एक शरणार्थी को औसतन 12 साल रिफ़्यूजी कैंप में गुज़ारने पड़ते हैं लेकिन वर्तमान में उपलब्ध टैंटों की ज़िंदगी सिर्फ़ छह महीने के करीब होती है.

हालांकि तकनीक इन परिस्थितियों को सुधार सकती है.

इथियोपिया के डोलो अदो कैंप में सोमालिया के परिवार नई झोपड़ियों के प्रारूप को परख रहे हैं. यह सीधे खड़े हैं और सौर ऊर्जा से चलते हैं.

सौर ऊर्जा पैनलों की तीन साल की ज़िंदगी की गारंटी है और स्टील फ़्रेम की उम्र 10 साल है.

इन झोपड़ियों को संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के लिए उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) और आईकिया फ़ाउंडेशन से संयुक्त प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है.

लाइवकनेक्ट

दुनिया भर के 4.50 करोड़ शरणार्थियों और देश के अंदर विस्थापित लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए यूएनएचसीआर नए तरीकों की खोज का मार्ग प्रशस्त कर रहा है.

इसने नई खोजों और तकनीक के लिए समर्पित एक विभाग बनाया है. जिसे यूएनएचसीआर इनोवेशन कहते हैं.

इसके प्रमुख ओलिवियर डेलारू उत्साहपूर्वक बताते हैं कि उनकी ज़िम्मेदारी शरणार्थियों को कई तरह से सक्षम बनाना है जिसमें अच्छी शिक्षा तक उनकी पहुंच बनाना और आजीविका के वास्तविक मौके दिलाना शामिल है.

अपने गठन के सिर्फ़ 18 महीने में यूएनएचसीआर इनोवेशन ने कई नई योजनाएं शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण साझेदारियां करनी शुरू की हैं और विस्थापित लोगों की ज़िंदगी सुधारने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है.

आईकिया फ़ाउंडेशन के साथ गठबंधन के अलावा इसने विश्वव्यापी कुरियर सर्विस यूपीएस के साथ हाथ मिलाया है ताकि गैर खाद्य पदार्थों और सेवाओं की आपूर्ति का एक तंत्र विकसित किया जा सके.

डेलारू बताते हैं, "हम एक मोबाइल उपकरण के ज़रिये सेवाओं को ट्रैक कर रहे हैं ताकि अगर हम किसी शरणार्थी के पास किसी सेवा की आपूर्ति करें तो इस तंत्र को पता रहे कि दरअसल क्या हुआ है."

लाइवकनेक्ट नाम की इस सुविधा को फ़िलहाल इथियोपिया में जांचा जा रहा है और अंततः इससे यूएनएचसीआर को उन सभी गैर-खाद्य पदार्थों को ट्रैक कर पाने में सफलता मिलेगी जिसकी इसके या किसी सहयोगी द्वारा आपूर्ति की गई है.

अपने परिवार और दोस्तों से बिछुड़ना शरणार्थियों की एक और बड़ी दिक़्क़त होती है.

सूचना तक तेज़ पहुंच

डेनमार्क के दो भाई, डेविड और क्रिस्टोफ़र मिक्केलसेन ने 2008 में शरणार्थियों के लिए एक परिवार को खोजने वाला मंच रिफ़्यूजीज़ यूनाइटेड बनाया. इसकी प्रेरणा उन्हें एक युवा अफ़गान शरणार्थी से मुलाकात के बाद मिली जो अपने परिवार को ढूंढ रहा था.

वर्ष 2010 में यह सिस्टम एक मुफ़्त मोबाइल सेवा के माध्यम से उपलब्ध हो गया. लोग इसमें सबसे सस्ते फ़ोन के ज़रिए भी एसएमएस से जानकारियां देकर इसमें रजिस्टर कर सकते हैं और उस जानकारी से मिलान कर सकते हैं जो उन्हें ढूंढने वाले लोगों ने दी है.

डेविड मिक्केलसेन कहते हैं, "पूर्वी अफ़्रीका में हमारा सबसे बड़ा सहयोगी केन्याई रेड क्रॉस है जो हमारे तरीकों का इस्तेमाल करने से पहले साल भर में 700 मामले सुलझाता था. अब अक्सर हम एक दिन में 700 मामले सुलझा लेते हैं और वह भी कम लागत पर."

रिफ़्यूजी यूनाइटेड के मंच का इस्तेमाल अब यूएसएसडी के माध्यम से भी किया जा सकता है. यह एक तरह का टेक्स्ट मैसेज का सिस्टम होता है जो एक टोल फ़्री नंबर के माध्यम से काम करता है- जिसमें कई भाषाओं के ऑपरेटर होते हैं. इसके अलावा यह ऑनलाइन भी होता है.

कीनिया में इसके रजिस्टर यूज़र्स की संख्या हाल ही में 2,50,000 पहुंच गई है. ये लोग केन्या भर से हैं जहां अनुमानतः 5,00,000 विस्थापित लोग हैं.

दक्षिण अफ़्रीका स्थित प्रेकेल्ट फ़ाउंडेशन ऐसी मोबाइल तकनीक विकसित करने पर समर्पित है जो समाज के वंचित लोगों के लिए काम कर रही गैर सरकारी संस्थाओं को मदद करे.

प्रेकेल्ट ने एक मोबाइल मैसेजिंग मंच, वुमि, तैयार किया है जो संगठनों को बड़े पैमाने पर मैसेजिंग की एप्लिकेशंस विकसित करने में मदद करता है.

प्रेकेल्ट फ़ाउंडेशन के मुख्य इंजीनियर सिमोन दि हान कहते हैं, "मुझे लगता है कि (भविष्य में) हमारे पास ऐसा ढांचा होगा जिससे हम सूचना तक पहले के मुकाबले कई गुना तेज रफ़्तार से पहुंच स्थापित कर सकते हैं."

लेकिन ओलिवीयर डेलारू कहते हैं, "नई तकनीकों का आयात करना अपने आप में कोई हल नहीं है. बल्कि यह अपनी तरह से दिक्कतों को सुलझाने की कोशिश कर रहे समाज के साथ काम करने और कोशिशों को बढ़ाने का ज़रिया है."

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