उम्र 13 साल और वज़न को लेकर इतना ख़ौफ़!

  • 22 दिसंबर 2013
वजन
Image caption एक शोध में पता चला है कि 13 साल में ही वजन को लेकर चिंतित हैं लड़कियां.

ब्रिटेन में खाने-पीने की उल्टी-सीधी आदतों के बारे में आगाह करने वाले एक अध्ययन में पता चला है कि 13 साल की 10 फ़ीसदी लड़कियां अपने बढ़ते वज़न को लेकर ख़ौफ़ज़दा हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि वे यह देखकर बेहद चिंतित हैं कि 13 साल की उम्र में जब खाने की अनियमित आदतों की शुरुआत भी नहीं होती, लड़कियां अपने वज़न को लेकर इतनी संजीदा हैं.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन उल्टी-सीधी आदतों पर काबू पाया जा सकता है.

शोध के दौरान इकट्ठा की गई जानकारियां किशोरों की सेहत से जुड़ी एक पत्रिका में सामने आई हैं. ये जानकारियां 13 साल की उम्र के क़रीब 7,082 माता-पिता से बातचीत के दौरान सामने आईं.

लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज और द लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के इस अध्ययन में उन वर्षों की पड़ताल की गई है, जब इन गड़बड़ियों की शुरुआत होती है.

  • 13 साल की किशोरियों के करीब 7,082 माता-पिता के साथ बात करने पर पता चला:
  • 12 फ़ीसदी लड़कियां और पांच फ़ीसदी लड़के मोटे होने की कल्पना से ही डर जाते हैं.
  • 52 फ़ीसदी लड़कियां और एक तिहाई लड़कों ने कहा कि वे वज़न बढ़ने को लेकर थोड़े चिंतित हैं.
  • तीन में से एक लड़की और पांच में एक लड़का अपनी देह के आकार को लेकर परेशान रहते हैं.
  • 26 फ़ीसदी लड़कियों और 15 फ़ीसदी लड़कों में उपवास रखने जैसी "अनियमित खानपान से जुड़े व्यवहार" पाए गए.
  • ठूंस-ठूंसकर खाने जैसी आदतों से दो साल बाद वज़न ज़्यादा होने की शिकायत पाई गई.

शोधकर्ता डॉक्टर नाडिया मिकाली ने बीबीसी को बताया कि वे ये जानकर बेहद अचंभित हैं कि इतनी कम उम्र में बच्चों में वजन को लेकर इतनी चिंता है.

वो कहती हैं, "मुझे लगता है कि हमारे लिए यह शर्म की बात है कि हमने इसके बारे में पहले कोई पूछताछ नहीं की. इस तरह का व्यवहार किशोरों में कब शुरू होता है, हमें इसकी भी जानकारी नहीं है."

चेतावनी

Image caption 12 फीसदी लड़कियां मोटे होने की कल्पना से ही डर जाती हैं

डॉ. नाडिया मानती हैं कि यदि माता-पिता और शिक्षकों के लिए चेतावनी देने वाले लक्षणों की एक सूची बनाई जा सके तो अनियमित खानपान की आदतें पैदा होने से पहले ही बच्चों की मदद की जा सकती है.

अनियमित खानपान से जुड़े ऑनलाइन स्वयं सहायता समूह बीट ने एक बयान में कहा है कि यह अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण और रोचक है.

ऑनलाइन संस्था बीट ने बताया, "इस तरह का यह पहला अध्ययन है. ऐसे में हम यह पता नहीं कर सकते कि स्थितियां पहले से बदतर हुई हैं या सुधरी हैं."

संस्था के मुताबिक़, "हालांकि यह समस्या बेहद चौंकाने वाली है कि इतनी कम उम्र में बच्चे अपने वज़न को लेकर चिंतित हैं. मगर इसका यह मतलब नहीं कि ऐसे बच्चों में आगे भी ये गड़बड़ियां जारी रहेंगी. हां, वज़न और आकार को वश में रखने के लिए वे कुछ ग़लत तरीक़ों का सहारा ले सकते हैं."

ये निष्कर्ष 1990 के दशक में जन्मे बच्चों से ली की गई जानकारियों पर आधारित हैं.

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