क्या इस साल और ज़्यादा स्मार्ट होंगी वॉच?

स्मार्टवॉच

जैसे ही मैं प्लास्टिक के कवर वाली पेबल स्मार्टवॉच को उसके ईको-फ़्रेंडली पैकेज से बाहर निकालता हूं मेरे फ़ोन का पेबल एप कहता है, "भविष्य में आपका स्वागत है."

सचमुच? मैं कहता हूं. मुझे आपके बारे में तो नहीं पता लेकिन मैंने हमेशा अपनी स्मार्टवॉच के रूप में एक उच्च तकनीक वाली, चमकदार, रंगीन, पतली, बहुत निखरे हुए डिज़ाइन वाली घड़ी की कल्पना की थी.

यकीनन वह 1.2 इंच (3 सेमी) की भारी प्लास्टिक की कोटिंग वाली, टचस्क्रीन रहित और 256 तरह के ग्रे रंगों वाली वाली घड़ी बिल्कुल नहीं है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पेबल की यह स्मार्टवॉच अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने एकदम फ़ीकी है.

दरअसल पेबल ने कम ऊर्जा खाने वाला डिसप्ले इसलिए बनाया है ताकि इसकी बैटरी बिना चार्ज किए एक या दो दिन चल सके- दरअसल यह करीब पूरे हफ़्ते तक चल सकती है.

यह एक ही चीज़ पर केंद्रित है- आपके स्मार्टफ़ोन पर आए नोटिफ़िकेशन को बताने पर, जबकि फ़ोन आपकी पैंट की जेब में रह सकता है. इसकी कीमत है 200 डॉलर (करीब 12,400 रुपए).

सीमा

अब बात इसके प्रतियोगियों की. 300 डॉलर (करीब 18,633 रुपए) की सैमसंग स्मार्टवॉच, गीयर, यकीनन ज़्यादा आकर्षक है, ज़्यादा प्रभावित करती है.

लेकिन हर चीज़ के लिए फ़ोन पर निर्भर रहने की इसकी ज़रूरत दिक्कत पैदा करती है.

यह आपको बताएगी कि एक ईमेल आई है- लेकिन मेल को पढ़ने के लिए आपको इससे जुड़ने में समक्ष हैंडसेट (तीन में से एक) का इस्तेमाल करना होगा.

हालांकि आप गीयर के दो मेगापिक्सल से कम के कैमरे से सीधे फ़ोटो खींच सकते हैं, वीडियो बना सकते हैं और सीधे कलाईघड़ी से ही फ़ोन कॉल कर सकते हैं. हालांकि यह इतना अटपटा लगता है कि आप ये काम नियमित रूप से नहीं करना चाहेंगे. और इस सबके लिए आपको बार-बार बैटरी चार्ज करनी पड़ती है.

पहले जाने वाले उपकरणों- ख़ासतौर पर स्मार्टवॉच- के साथ दिक्कत यह है कि अभी तक यह तकनीक इतनी विकसित नहीं हुई है कि उम्मीदों पर खरी उतर सके.

स्क्रीन रेज़्योल्यूशन भले ही बेहतर हो गए हों, प्रोसेसर ज़्यादा सक्षम हो गए हों, सेंसर सूक्ष्म हो गए हों लेकिन अब भी तकनीकी चुनौती सारी चीज़ों को घड़ी की स्क्रीन पर समेटना है और इसके साथ ही यह भी कि 'बैटरी बैकअप' ठीक हो यानी कि यह पर्याप्त समय तक चलती रहे.

तकनीकी की दुनिया हमें "अगली बड़ी चीज़" बेचने को बेताब है- और यह हमारी कलाई, आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों पर नज़र रखे हुए है.

अर्धविकसित उत्पाद जल्दबाज़ी में बाज़ार में उतार दिए जाते हैं और मार्केटिंग करने वाले हमें बताने लगते हैं कि यह जिंदगी को कैसे बेहतर बना सकता है- ऐसे, जैसे हमने कभी सोचा ही नहीं था.

एम्यूनिशन ग्रुप के डिज़ाइन लैब के संस्थापक रॉबर्ट ब्रनेर कहते हैं, "जब तक लोग इन उपकरणों को सहजता से पहनने न लगें या पहनने को तत्पर न हों, तब तक इनका वक्त नहीं आने वाला."

वो कहते हैं, "ब्लूटूथ हेडसेट को लिमोज़िन ड्राइवरों और सेल्स पर्सन से जोड़ कर देखा जाता है- और यही इसकी सीमा है."

तकनीकी दिक्कतें

अगर हाथ की कोई हरकत अटपटी लगती है (स्मार्टवॉच से फ़ोटो खींचना या बात करना) तो चश्मा न पहनने वालों को अपनी आंख पर एक उपकरण लगाने को कहना और भी अटपटा लगेगा. ख़ासतौर पर तब जबकि इसका कोई बहुत महत्वपूर्ण उपयोग न हो.

मैं सोचता हूं कि क्या बारकोड की स्कैनिंग और न्यूज़ अलर्ट भी इसी श्रेणी में आते हैं.

नाइक का फ़्यूलबैंड, जॉबोन अप, फिटबिट फ़ोर्स और अन्य कलाई पर पहने जाने वाले उपकरण एक मामले में आगे हैं- व्यायाम, नींद और दूसरे स्वास्थ्य पैमानों पर महत्वपूर्ण, इस्तेमाल करने योग्य आंकड़े उपलब्ध करवाना.

फ़िटबिट के सह-संस्थापक जेम्स पार्क्स कहते हैं कि कंपनी की सफ़लता की वजह यह है कि यह सिर्फ़ एक ज़रूरत पर केंद्रित है.

"स्मार्टवॉचों की दिक्कत यह है कि यह ढूंढना पड़ता है कि वह किस काम में बेहतर हैं. जब आप सब कुछ करने की कोशिश करते हैं तो आप कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते."

इस साल इन उपकरणों की तकनीक में सुधार की ज़रूरत है- जैसे कि बैटरी लाइफ़ बढ़नी चाहिए और डिसप्ले कम ऊर्जा खपत वाले हों.

कुछ चीज़ें अब भी तकनीकी रूप से दूर ही हैं: जैसे कि वायरलेस चार्जिंग.

यह विचार एक स्मार्टवॉच - एजेंट - में शुरू से ही शामिल है. चार्जिंग को आसान बनाने के लिए यह एक बेहतर विचार है. लेकिन चार्जिंग सरफ़ेस को अपने आस-पास ज़्यादा जगहों में शामिल करना होगा.

फ़्लेक्सिबल ओएलईडी डिस्पले बहुत महंगे हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन उपकरणों को आकर्षक - सुंदर और सचमुच में उपयोगी होना पड़ेगा ताकि हम अपनी कलाईघड़ी को बदल दें या फिर अचानक चश्मा पहनना शुरू कर दें.

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