क्यों आ जाती है काम के बीच झपकी?

नींद
Image caption आधे पुरुष ड्राइवर गाड़ी चलाते वक्त झपकी लेते हैं.

कोई काम करते-करते हमें कभी-कभी अनचाहे ही झपकी आ जाती है. ब्रिटेन के तकरीबन आधे पुरुष ड्राइवरों ने गाड़ी चलाते वक्त झपकी लेने की बात मानी है. आखिर ये झपकी है क्या चीज़ और ये आती क्यों है?

सड़क सुरक्षा से जुड़ी संस्था 'ब्रेक' का मानना है कि झपकी लेने की ये आदत बेहद 'ख़तरनाक' है.

'ब्रेक' ने करीब एक हज़ार ड्राइवरों से बात की. उनमें से 45 फीसदी पुरुष ड्राइवरों ने माना कि गाड़ी चलाते वक्त वे झपकी लेते हैं. जबकि 22 फीसदी महिला ड्राइवरों ने झपकी लेने की बात मानी. अब सवाल ये है कि आखिर इसका क्या मतलब है?

हम पाँच से 10 सेकेंड की नींद को झपकी कहते हैं. इसमें इंसान का दिमाग बिना चाहे ही सो जाता है. झपकी आने की सबसे ज़्यादा संभावना तब होती है जब आप कोई एकरसता वाला काम कर रहे हों. झपकी लेने के बाद व्यक्ति एक झटके के साथ उठता है.

नीरसता खतरनाक

लफ़बोरो यूनिवर्सिटी के स्लीप रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रो. जिम हार्न कहते हैं, "ऐसी स्थिति में आपकी पलकें भारी होनी शुरू हो जाती हैं और आप यथार्थ से संपर्क खो देते हैं."

वे आगे बताते हैं, "आप कुछ लम्हों के लिए नींद के आगोश में चले जाते हैं और फिर अचानक झटके से उठते हैं."

दिलचस्प बात ये है कि कुछ पलों की इस नींद को इंसान का दिमाग़ याद नहीं रखता. झटके के साथ उठने से ही लोगों को इस बात का एहसास होता है कि उन्हें झपकी आ गई थी.

ड्राइवरों को होने वाली थकान का 10 सालों तक अध्ययन करने वाले प्रोफ़ेसर हार्ने बताते हैं, "दिमाग को वही नींद याद रहती है जो एक या दो मिनट से ज़्यादा की होती है. कुछ पलों की झपकी न तो याद रहती है और न ही इसके बाद हमें ये ध्यान रहता है कि हम कहीं जा रहे हैं या कहीं से आ रहे हैं."

हैरानी की बात नहीं है कि झपकी आने का प्रमुख कारण थकान होती है और अगर इस पर काबू नहीं किया जाए तो ये बार-बार आती है और आख़िकार आप एक अच्छी नींद ले लेते हैं.

गाड़ी चलाते हुए या किसी मीटिंग में होने की ख़तरनाक या ग़लत परिस्थिति में झटका लगने से ऐसी झपकी दोबारा नहीं आती क्योंकि झटके से और ये आभास होने से कि आप किस हालत में है, शरीर में एड्रेनलीन का स्तर बढ़ जाता है.

ड्राइवरों के साथ ऐसा होने की ज़्यादा संभावना होती है क्योंकि गाड़ी चलाना एकरसता वाला काम प्रतीत हो सकता है.

गाड़ी रोक दें

Image caption अधिकतर सड़क हादसों का संबंध नींद से पाया गया.

दोपहर के बाद गाड़ी चलाते वक्त झपकी आ सकती है क्योंकि उस समय शरीर में ऊर्जा का स्तर कम होता है. इसी तरह रात को भी झपकी आ सकती है क्योंकि रात का वक़्त आमतौर पर सोने का होता है.

युवा ड्राइवरों में भी झपकी लेने का ख़तरा ज़्यादा होता है क्योंकि उन्हें आमतौर पर नींद की ज़्यादा ज़रूरत होती है. इसलिए वो नींद न आने की समस्या से ज़्यादा परेशान होते हैं.

प्रोफ़ेसर हार्ने बताते हैं कि परिवहन विभाग के अनुसार सुनसान मुख्य सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में से 20 प्रतिशत का संबंध नींद से होता है.

वे कहते हैं, "नींद अचानक नहीं आती. ऐसा नहीं होता कि आप पूरी तरह चौकन्ने होकर गाड़ी चला रहे हों और अचानक से झपकी आ जाए. आपको कितनी तेज़ नींद आ रही है इसका एहसास करने के लिए आपके पास काफ़ी वक़्त होता है."

प्रोफ़ेसर हार्ने सलाह देते हैं कि जब आपको नींद महसूस हो रही हो तो पहले आप गाड़ी को किसी सुरक्षित जगह रोकें, फिर 150 मिलीग्राम कैफीन वाले किसी पेय पदार्थ का सेवन करें. इसका असर होने में करीब 20 मिनट लगते हैं. इसलिए आगे का सफ़र शुरू करने से पहले आराम से 15 मिनट की एक झपकी लें फिर अगले पांच मिनट खुद को तरोताजा करें.

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