बिजली संचय करने वाली नई बैटरी

बैटरी

अमरीकी शोधकर्ताओं ने पवन और सौर ऊर्जा स्रोतों से पैदा बिजली को संचय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है.

हार्डवार्ड विश्वविद्यालय की एक टीम ने कम कीमत में बड़े पैमाने पर एक बिजली ग्रिड के भीतर ऊर्जा संचय करने में सक्षम बैटरी तकनीक की खोज की है.

यह तकनीक बड़ा परिवर्तन ला सकती है. यह पवन और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक किफ़ायती और विश्वसनीय बना सकता है.

बैटरी का यह डिज़ाइन सस्ते में ऊर्जा की बड़ी मात्रा का भंडारण करने के लिए अनुकूल हैं, इससे पहले रसायनिक आधार पर लाए गए बैटरी की लागत ज्यादा है और उसका रखरखाव एक मुश्किल काम है.

पहले की सारी बैटरियों में धातुओं का इस्तेमाल होता है. वैनाडियम व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाली सबसे उन्नत बैटरी तकनीक है, लेकिन इसकी लागत अपेक्षाकृत अधिक है. अन्य बैटरियों में प्लैटिनम जैसे कीमती धातु उत्प्रेरक के रूप में इस्तेमाल होते हैं.

प्राकृतिक रसायन का उपयोग

शोधकर्ताओं का कहना है कि नई बैटरी वैनाडियम बैटरी की तरह ही काम करता है, लेकिन इस में कीमती धातु उत्प्रेरक का उपयोग नहीं होता है. इसकी बजाय इसमें प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला किफायती रसायन क्विनोन का उपयोग होता है.

ये पानी में घुलनशील कार्बन आधारित यौगिक हैं जो पौधों और जानवरों में ऊर्जा संचय का काम करता हैं.

मैसाचुसेट्स में हार्डवार्ड स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और एपलॉयड साइंस के माइकल अजीज बताते है कि "ये पदार्थ सस्ते होते हैं और हरी सब्जियां, साथ ही कच्चे तेल में पाए जाते हैं,"

ऊर्जा के अक्षय स्रोतों पवन या सौर से उत्पन्न बिजली को संचय करने में मुख्य बाधा इन स्रोतों की अनियमित तौर पर उपलब्ध होने की प्रकृति है.

प्रोफेसर अजीज ने नेचर पॉडकास्ट को बताया, " तब आप क्या करेंगें जब सूरज नहीं निकलेगा और हवा नहीं बहेगी? सस्ते और सुरक्षित तरीके से विद्युत ऊर्जा को भारी मात्रा में स्टोर करने की दिशा में यह एक समस्या हैं. यदि इसे हम सुलझा ले तो इस दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा. "

अधिकतर बैटरियों की तरह ही यह बैटरी भी रासायनिक तरल पदार्थ में ही विद्युत ऊर्जा का संचय करता है, बजाय कारों और मोबाइल उपकरणों में पाए जाने वाली उन बैटरी की तरह जिसमें ठोस इलेक्ट्रोड के भीतर विद्युत ऊर्जा का संचय होता है.

ईंधन सेल की तरह

प्रोफेसर अजीज ने बताया कि " इस मामले यह एक ईंधन सेल की तरह ही है. इसमे हाइड्रोजन गैस के रूप में भंडारित रहता है और बिजली के रूप में परिवर्तित करने के रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना होगा है, आप बिजली बनाने के लिए इसे ईंधन सेल के माध्यम से चला सकते हैं."

यह बैटरी इस मामले में अलग है कि इसे चलाने के लिए आप को इसे आगे और पीछे की ओर चलाने की जरूरत पड़ेगी. जब आप रासायनिक ऊर्जा के रूप में विद्युत ऊर्जा का संचय करेंगे तो इसे पीछे की ओर चलाना होगा और वापस रासायनिक ऊर्जा से बिजली पैदा करने के लिए इसे आगे की ओर चलाना होगा. "

उन्होंने आगे कहा कि "बैटरी में ऊर्जा की मात्रा का संग्रह टैंक के आकार और रसायन की मात्रा पर निर्भर होगा. "

नवीनतम अध्ययन में शामिल नहीं हुए एक वैज्ञानिक ने कहा, "नई बैटरी अगर दीर्घकालिक क्षमता और ऊर्जा दक्षता वाला और व्यावहारिक रूप से उपयोगी होता है और इसे वास्तव में सस्ते में तैयार किया जा सकता है, तो यह तकनीक ऊर्जा भंडारण के लिए उपर्युक्त साबित होंगे. "

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