शहरी जीवन क्यों बन सकता है ख़तरा?

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Image caption हरी-भरी और सुरक्षित पगडंडियां सक्रियता बढ़ाती हैं.

जब भी खुद को और अधिक सक्रिय करने की चर्चा चलती है तो हमारा ध्यान सबसे पहले खेलकूद की सुविधाओं को बढ़ाने और लोगों को जिम जाने के लिए उत्साहित करने पर जाता है.

मगर सवाल ये है कि क्या हम अपने मोहल्ले में ही कुछ ऐसी तरकीब नहीं निकाल सकते जिससे सेहतमंद जीवन के लिए सक्रियता बढ़ाने के लिए कहीं जाने की ज़रूरत न पड़े?

जवाब है... हां, ऐसा हो सकता है. द रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स (आरआईबीए) ऐसा ही सोचता है.

घर के आस-पास ही सक्रियता बढ़ाने के ठिकानों का निर्माण कितना कारगर होगा इसका पता लगाने के लिए इस संस्था ने इंग्लैंड के नौ बड़े शहरों- बर्मिंघम, ब्रिस्टल, लीड्स, लीवरपुल, लंदन, मैनचेस्टर, न्यूकासल, नॉटिंघम और शेफील्ड में संभावनाओं की तलाश की.

संबंधित शोधकर्ताओं ने इन शहरों में घनी आबादी और हरे भरे इलाकों की तलाश की.

सेहतमंद शहर

बर्मिंघम, न्यूकासल और लंदन के कुछ उन इलाकों को चिन्हित किया गया जहां के निवासी सबसे कम सक्रिय थे. यहां अधिक सक्रिय इलाकों के मुकाबले आबादी दोगुनी घनी और हरियाली 20 फ़ीसदी कम थी.

कम सक्रिय लोगों के इन इलाकों में रहने वाले करीब 60 फ़ीसदी लोग सेहतमंद बनने के लिए सुझाई गई गतिविधियों में शामिल नहीं होते थे.

रीबा (आरआईबीए) की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार महत्वपूर्ण बात ये है कि यहां की आबादी का तीन-चौथाई हिस्सा महसूस करता है कि मोहल्ले की आबादी घनी होने के कारण गलियां बेहद संकरी हैं जिससे अधिक पैदल चलने का मौका नहीं मिल पाता.

यहां के लोग चाहते हैं कि उनके मोहल्ले को इस तरह विकसित किया जाए कि पैदल चलने की जगह ज़्यादा हो और हरियाली अधिक हो ताकि घर से निकलने पर ताज़ा हवा मिल सके.

लोगों ने सुरक्षित पगडंडियों और हरियाली को दो महत्वपूर्ण कारक माना.

रीबा ने सर्वेक्षण के नतीजों को लोगों के बीच रखा ताकि सरकारी समितियां इस ओर ध्यान दें.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (एनएचएस) की ओर से पिछले साल किए गए बदलाव के तहत अब सार्वजनिक सेहत का जिम्मा स्थानीय प्रशासन के हाथों में है.

रीबा के अध्यक्ष स्टीफन होड्डर का कहना है कि वे चाहते थे कि स्थानीय समिति सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करे क्योंकि यह योजना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

वे आगे कहते हैं "यह ज़रूरी है कि योजनाकार और विकास करने वाले आगे आएं और सेहतमंद शहर बनाने की मुहिम की अगुवाई करें."

वित्त की समस्या

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Image caption नॉटिंघमशायर के हूथवेट में विकसित किया गया मैदान.

मगर जैसा कि हमेशा से होता आया है- समितियों को हाल के वर्षों में मिलने वाले धन में काफी कटौती हुई है इसलिए इस योजना को भी धन की कमी की समस्या से जूझना पड़ रहा है.

रीबा ने अपनी रिपोर्ट में एक अच्छा उदाहरण पेश किया है. यह है लंदन के भीतरी इलाके में बसे ब्राउनफील्ड इलाक़े का पुनर्विकास.

यहां सार्वजनिक और निजी स्रोतों ने व्यापक निवेश किया. यह 70 लाख पाउंड की भारी भरकम रक़म थी.

इस परियोजना के तहत घरों के बीच पैदल चलने के लिए हरी घास और पेड़ों की कतारों से सजी पगडंडियां विकसित की गईं. जबकि खेलकूद का मैदान थोड़ा हटकर बनाया गया.

इसी तरह एक और परियोजना बनाई गई जिसके तहत उत्तरी नॉटिंघमशायर स्थित हूथवेट के खनन इलाके में बेकार पड़ी जमीन पर हराभरा खेलने का मैदान और पानी का एक फव्वारा बनाया गया.

कभी सुनसान रहा ये इलाक़ा अनुकूल मौसम में अब बच्चों से भरा रहता है.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह परियोजना इसलिए सफल हुई क्योंकि इस इलाक़े को विकसित करने के लिए लॉट्री के जरिए 20 लाख पाउंड रकम उपलब्ध करवाई गई.

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