जीपीएस की निगाह से कोई बच नहीं सकता

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कई लोग सफ़र के दौरान अपनी मंज़िल तक पहुंचने और रास्ते से न भटकने के लिए जीपीएस का इस्तेमाल करते हैं.

ड्राइवरों के मार्गदर्शन के लिए तो जीपीएस एक नक्शे की तरह काम करता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि जीपीएस केवल नक्शे या किसी जगह को खोजने में ही उपयोगी है बल्कि अब जीपीएस का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो रहा है जिसकी वजह से कभी-कभी इसके अप्रत्याशित नतीजे भी देखने को मिलते हैं.

मूलतः इसका इस्तेमाल सेना से जुड़े कामों के लिए किया जाता था. अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने यह फ़ैसला लिया था कि जीपीएस की सुविधा आम लोगों के लिए भी उपलब्ध होनी चाहिए और फरवरी 1989 में पहला ब्लॉक 2 सैटेलाइट लॉन्च किया गया.

उस सैटेलाइट के लॉन्च होने के 25 साल बाद लोग जीपीएस का इस्तेमाल ऐसे कर रहे हैं जिसकी उस वक़्त बेहद कम लोगों ने कल्पना की थी.

मंज़िल है क़रीब

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Image caption जीपीएस का अनुसरण कर आप ग़लत जगह पर भी पहुंच सकते हैं.

देश के एक कोने से दूसरे कोने तक का रास्ता तलाशने के लिए आपको एक बड़े नक्शे की ज़रूरत होगी.

लेकिन जब अमरीकी सरकार ने गैर-सैन्य उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर सैटेलाइट सिग्नल उपलब्ध कराने की इजाज़त देने के लिए नियमों में बदलाव किया तब कारों में इस्तेमाल करने के लिए जीपीएस उपकरणों की भरमार हो गई.

कार में सफ़र के दौरान सुरीली आवाज़ में "दाहिनी ओर मुड़ें" या "200 गज की दूरी तय कर आप अपनी मंज़िल तक पहुंच जाएंगे" सुनना अब बेहद आम बात है.

जीपीएस सिग्नल भले ही ज़्यादातर वक़्त सटीक होता है लेकिन फिर भी कई दफ़ा ड्राइवर ख़ुद को बड़ी दुविधा की स्थिति में पाते हैं.

साल 2009 में रॉबर्ट जोन्स वेस्ट यॉर्कशायर में जीपीएस की मदद से एक रास्ते की ओर बढ़ रहे थे और उनकी कार एक चट्टान के आख़िरी सिरे पर पहुंच गई.

वर्ष 2012 में तीन जापानी पर्यटक ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां मनाने के लिए गए थे और उनकी गाड़ी के जीपीसी सिस्टम ने एक द्वीप तक पहुंचने का रास्ता बताते हुए उन्हें पानी से गुज़रकर जाने का संदेश दिया. इस तरह वे ड्राइविंग करने के बजाए तैरने की स्थिति में आ गए.

जानवरों पर भी निगरानी

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Image caption घरेलू बिल्लियों की गतिविधि पर भी नज़र रखने के लिए जीपीएस है कारगर

दुनिया भर के कई शहरों में यह नज़ारा बेहद आम होता है कि कई लोग अपनी नज़रें स्मार्टफोन के नक्शे में गड़ाए हुए रास्ते पर चलते रहते हैं ताकि उन्हें यह अंदाज़ा हो कि वे कहां जा रहे हैं.

प्रोफ़ेसर पार्किंसन का कहना है, "ज़्यादातर लोग अब नक्शा नहीं बल्कि स्मार्टफ़ोन निकालते हैं और फिर वे दिशा ग़लत होने पर जीपीएस की शिकायत भी करते हैं."

जीपीएस का इस्तेमाल जानवरों के विभिन्न समूहों के व्यवहार और गतिविधियों को समझने के लिए भी किया जाता रहा है.

जीपीएस उपकरणों को जानवरों के शरीर में लगा कर इस सिद्धांत का परीक्षण किया गया कि किसी शिकारी के डर से भेड़ें कैसे झुंड के बीच में जाने की कोशिश करती हैं.

इंग्लैंड के नॉर्थम्बरलैंड में गाय के गले में बांधी जाने वाली घंटी के बजाए जीपीएस कॉलर लगा कर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि अपने स्थानीय क्षेत्र में मवेशी कैसे चरते हैं.

घायल जंगली चूहों पर भी जीपीएस बैकपैक्स की मदद से परीक्षण किया गया ताकि संरक्षण विशेषज्ञ यह अंदाजा लगा सकें कि जब उन्हें जंगल में दोबारा छोड़ा गया तो उन्होंने कैसे अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कोशिश की.

जीवनसाथी की निगरानी?

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Image caption कुछ पति-पत्नी एक-दूसरे पर जीपीएस ऐप्लीकेशन के ज़रिए निगाह रखते हैं.

रॉयल वेटेनरी कॉलेज ने बीबीसी के होराइजन प्रोग्राम की टीम के साथ मिलकर एक जीपीएस टैग के ज़रिए बिल्लियों की गतिविधियों पर नज़र रखी तब घरेलू बिल्लियों की गुप्त ज़िंदगी से जुड़ी बातें सामने आईं.

इससे यह नतीजा निकला कि कोई व्यक्ति भले ही यह सोचे कि उनकी बिल्लियां पड़ोसी के गार्डन में शिकार की खोज में होंगी जबकि वे दूसरी बिल्ली के मालिकों के घर में खाने का सामान ढूंढ रही होंगी.

जो माता-पिता अपने बच्चों को लेकर चिंतित रहते हैं वे अब जीपीएस उपकरणों का इस्तेमाल कर उन पर नज़र रख सकते हैं. ऐसे जीपीएस टैग्स बैग, कपड़े या कलाई वाले बैंड पर लगाए जाते हैं या फिर स्मार्टफ़ोन के जीपीएस ऐप्लिकेशन के ज़रिए भी उनकी गतिविधि पर निगाह रखी जा सकती है.

अभिभावक खुले तौर पर या गोपनीय तरीके से भी जीपीएस उपकरणों का इस्तेमाल कर अपने बच्चों की निगरानी कर सकते हैं.

सही निशाना

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Image caption गोल्फर भी जीपीएस चिप के ज़रिए यह पता लगा लेते हैं कि उनकी गेंद कहां गई

इससे जुड़े कई दिलचस्प वाकये भी सामने आ रहे हैं मसलन एक पति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी के मोबाइल फ़ोन में मौजूद जीपीएस फंक्शन का इस्तेमाल कर यह पता लगा लिया कि उनकी पत्नी न्यूयॉर्क में एक अलग जगह पर मौजूद हैं जबकि उन्होंने अपने पति को किसी और जगह पर होने के बारे में बता रखा था.

प्रोफेसर पार्किंसन कहते हैं, "क्या गोपनीयता का गंभीर तरीके से उल्लंघन हो रहा है?"

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा यक़ीन है कि ऐसे कई वाकये होते होंगे जब कोई पति अपनी पत्नी पर नज़र रखने के साथ ही यह जानना चाहते हों कि उनका बच्चा कहां है. मेरी राय में इस तरह की निगरानी में कुछ ग़लत नहीं है."

आजकल गोल्फर जीपीएस चिप के ज़रिए गोल्फ की गेंद खोजने में कामयाब हो रहे हैं. कुछ जीपीएस उपकरणों में अब ऑडियो सिस्टम भी होता है जिससे आवाज़ आती है.

प्रोफेशनल फुटबॉलर अब जीपीएस का इस्तेमाल अपने खेल में सुधार के लिए कर रहे हैं.

जीपीएस गोलियां भी

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Image caption जीपीएस गोलियों की वजह से अमरीका में पुलिस को अपराधियों के पीछे कम भागना पड़ता है

मैनचेस्टर सिटी और लीवरपूल जैसी टीमें भी अब जीपीएस मॉनिटर का इस्तेमाल प्रशिक्षण सत्र के दौरान करती हैं ताकि खिलाड़ियों की रफ़्तार, उनके द्वारा तय की जाने वाली दूरी और उनके ह्रदय गति का अंदाज़ा लगाया जा सके.

अमेरिका के कुछ राज्यों में अपराधियों को पकड़ना पिछले साल से तब आसान हो गया जब पुलिस बल ने जीपीएस गोलियों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

कार में भाग रहे अपराधियों का पीछा करना बेहद जोखिम भरा काम हो सकता है लेकिन अगर एक बटन दबा कर जब जीपीएस गोली दाग़ी जाती है तब वह गोली कार से जुड़ जाती है जिसका अंदाज़ा ड्राइवर को भी नहीं लग पाता.

ऐसे में पुलिस उस गाड़ी पर आसानी से निगाह रख सकती है और उसे पकड़ सकती है.

भविष्य में जीपीएस के इस्तेमाल करने के नए तरीक़ों को ईज़ाद कर कई तरह के समाधान निकाले जा सकते हैं.

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