चंद्रमा की सतह से उल्कापिंड टकराया

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Image caption पिछले सितंबर में चांद की सतह से एक उल्कापिंड टकराते हुए देखा गया.

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने चांद पर पहली बार ऐसा बदलाव देखा है जिसे अभूतपूर्व कहा जा सकता है.

स्पेन के खगोलविदों ने पिछले सितंबर में चांद की सतह से एक उल्कापिंड टकराते हुए देखा था. इस उल्के का वज़न एक टन था.

उन्होंने बताया कि इस टकराव से हुए विस्फोट में इतना प्रकाश निकला कि उसे धरती से नंगी आंखों से देखा जा सका.

चांद की सतह से उल्कापिंड के टकराने की घटना के बारे में 'रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी' ने जानकारी दी है.

दक्षिण-पश्चिम स्पेन के हुलवा विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जोस मेडिडो का कहना है, "चंद्रमा की सतह पर आने वाले बदलाव में यह अब तक का सबसे बड़ा और चमकदार है."

ध्रुवतारे से ज़्यादा चमकदार

चांद की सतह से उल्कापिंड के टकराने की इस घटना को 'मून इम्पैकट डिटेक्शन एंड एनालिसिस सिस्टम' (मिडास) के टेलीस्कोप के ज़रिए रिकार्ड किया गया है. इसे दक्षिणी स्पेन में 11 सितंबर को 20.07 बजे (ग्रीनविच मीनटाइम) रिकॉर्ड किया गया.

प्रोफ़ेसर मेडिडो का कहना है, "आमतौर पर चंद्रमा पर इस तरह के टकराव से पड़ने वाला प्रभाव थोड़े समय के लिए होता है- मात्र कुछ पलों के लिए. मगर इस बार जो प्रभाव देखा गया वह आठ सेकेंड से ज़्यादा का दर्ज किया गया. इसकी चमक लगभग ध्रुवतारे जितनी थी."

शोधकर्ताओं का कहना है कि लगभग 400 किलो वज़न वाले चट्टान के उस गोले की रफ़्तार चांद की सतह से टकराने के पहले 61,000 किमी थी.

उनका मानना है कि 0.6-1.4 मीटर की चौड़ाई वाले द्रव्यमान का यह घन जब चंद्रमा से टकराया तो इसकी ऊर्जा 15 टन टीएनटी के बराबर दर्ज किया गया.

पिछले साल मार्च में नासा के कैमरे ने चांद की सतह पर एक बड़े उल्कापिंड के टकराने से हुए विस्फोट की वीडियो रिकॉर्डिंग की था. यह विस्फोट उससे तीन गुणा ज़्यादा विस्फोटक पाया गया है.

जख्मी चांद

टीम का मानना है कि इस टकराव से चांद की सतह पर 40 मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया है.

पृथ्वी के विपरीत, चांद का अपना कोई वायुमंडल नहीं होता जिसकी मदद से वह उल्कापिंडों को अपनी धरातल से टकराने से रोक सके. चांद की सतह पर ऐसे कई टकरावों के निशान देखे जा सकते हैं.

शोधकर्ताओं का विश्वास है कि चांद और पृथ्वी दोनों पर, जैसा कि पहले अंदाज़ा लगाया गया था, अब एक मीटर व्यास वाले ऐसे चट्टानों के चांद की सतह से टकराने से पड़ने वाला प्रभाव उससे ज़्यादा आम बात हो गई है.

हालांकि इस आकार के अधिकांश चट्टान जैसे ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, आसमान में वे जलते हुए गोले के रूप में दिखाई देते हैं.

उल्कापंडों का प्रभाव ज़्यादा हो इसके लिए ज़रूरत है कि उनका आकार ज़्यादा बड़ा हो.

उदाहरण के लिए, अंदाज़ा लगाया गया है कि 15 फ़रवरी 2013 को रूस के चेल्याबिंस्क पर जो ऐस्ट्रॉयड में विस्फोट हुआ वह क़रीब 19 मीटर चौड़ा था.

यह 500000 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा के साथ वायुमंडल से टकराया. इस टकराव से पूरे विश्व में दो बार शॉकवेव महसूस किए गए. इससे बड़े पैमाने पर नुक़सान हुआ और 1000 से ज़्यादा लोग घायल हुए.

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