'ग़ुस्सा आने के बाद के दो घंटे हो सकते हैं ख़तरनाक़'

  • 16 मार्च 2014
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कहीं आप गर्म मिज़ाज के तो नहीं? यदि हां, तो आपको दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा ज़्यादा है. यह जानकारी एक शोध के ज़रिए सामने आई है.

शोध में शामिल एक अमरीकी शोधकर्ता का कहना है कि दिल का दौरा आने के पहले अक्सर ये देखा गया है कि इंसान बेहद ग़ुस्से में होता है. इसलिए ग़ुस्सा दिल के दौरे का कारण हो सकता है.

उन्होंने पता लगाया है कि ग़ुस्सा आने के बाद के अगले दो घंटे ख़तरनाक होते हैं क्योंकि इस समय दिल का दौरा आने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है.

साथ ही उनका ये भी मानना है कि ग़ुस्से और दिल के दौरे के बीच की कड़ी को समझने और इन जटिलताओं से बचने का रास्ता निकालने की दिशा में अभी काफ़ी काम किया जाना बाक़ी है.

शोधकर्ताओं ने यूरोपीय पत्रिका हार्ट को बताया कि जिन लोगों के परिवार में ह्रदय रोग पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, उनमें पहले से ही दिल का दौरा पड़ने के ख़तरे ज़्यादा होते हैं.

बात-बात पर ग़ुस्सा!

संबंधित शोध में हज़ारों लोगों पर किए गए नौ अध्ययन शामिल हैं. इस शोध के आंकड़े बताते हैं कि जिस वक़्त व्यक्ति को ग़ुस्सा आता है उसके बाद के दो घंटे दौरा पड़ने के लिहाज से क़रीब पांच गुना ज़्यादा और स्ट्रोक के लिहाज से तीन गुना से ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं.

'हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' के शोधकर्ताओं का मानना है कि एक बार ग़ुस्से का आना अपेक्षाकृत कम ख़तरनाक होता है.

जिन लोगों को महीने में केवल एक बार ग़ुस्सा आता है उन्हें दिल के दौरे का ख़तरा कम होता है और जिन्हें महीने में पांच बार ग़ुस्सा आता है उनमें हार्ट अटैक का ख़तरा ज़्यादा होता है.

उनका यह भी कहना है कि यह ख़तरा उन लोगों में और गंभीर होता है जिन्हें बात-बात पर ग़ुस्सा आता हो.

मनोवैज्ञानिक बदलाव

डॉक्टर एलिजाबेथ मोसेतोफ्स्की और उनके सहयोगी बताते हैं कि एक दिन में पांच बार ग़ुस्सा आने की स्थिति में प्रति 10,000 लोगों में क़रीब 158 बार ज़्यादा दिल का दौरा पड़ सकता है. यह ऐसे लोगों का आंकड़ा है जिनमें प्रति वर्ष कार्डियोवस्कुलर का ख़तरा कम होता है.

वहीं जिन लोगों में कार्डियोवस्कुलर का ख़तरा ज़्यादा होता है उनमें प्रति 10,000 लोगों में दिल का दौरा क़रीब 657 बार ज़्यादा पड़ सकता है.

डॉक्टर मोसेतोफ्स्की ने कहा, "हालांकि एक बार के ग़ुस्से में गंभीर दिल का दौरा पड़ने के ख़तरे कम होते हैं, लेकिन वैसे लोगों में यह ख़तरा बढ़ जाता है जिन्हें बार बार ग़ुस्सा आता है.

वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि ग़ुस्सा ख़तरनाक कैसे हो सकता है. शोधकर्ताओं ने यह साफ़ किया है कि उनका शोध अनिवार्य रूप से इस बात की ओर संकेत नहीं करता कि ग़ुस्सा दिल की बीमारियों और रक्त संचरण की समस्याओं को जन्म देता है.

धूम्रपान और शराब

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विशेषज्ञ जानते हैं कि पुराना तनाव और दबाव दिल के रोगों को बढ़ा सकता है, ख़ासकर इसलिए क्योंकि इससे रक्त दाब बढ़ जाता है.

मगर साथ ही इसलिए भी कि लोग तनाव को ग़लत तरीक़े से दूर करने की कोशिश करते हैं. जैसे कि तनाव कम करने के लिए वे बहुत ज्यादा धूम्रपान और शराब का सहारा लेने लगते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे छुटकारा पाने के लिए योग जैसे तरीक़े अपनाए जा सकते हैं.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की ह्दय रोग से जुड़ी एक नर्स डोरियन मडॉक ने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि इसका क्या कारण है. हो सकता है इसके पीछे मनोवैज्ञानिक बदलाव हों जिससे हमें ग़ुस्सा आता है. मगर इसके पीछे छिपी बॉयलॉजी जानने के लिए ज़्यादा शोध की ज़रूरत है."

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