भटके नहीं, लौट के अजगर घर को आए

  • 24 मार्च 2014
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बर्मा में पाए जाने वाले अजगरों को अपने घर से इतना लगाव होता है कि घर से दूर ले जाकर छोड़ दिए जाने के बावजूद वे वापस आ जाते हैं. ये बात एक शोध में सामने आई है.

शोध में पता चला है कि इनमें एक खास तरह का दिशासूचक कम्पास काम करता है जिससे घर से कई किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिए जाने के बावजूद वे वापस घर आ जाते हैं. उनकी इस क्षमता से वैज्ञानिक हैरान हैं.

फ्लोरिडा में रहने वाले बर्मा के अजगरों को जब उनके ठिकानों से काफी दूर ले जाकर छोड़ा गया तो वे करीब 36 किलोमीटर की दूरी तय करके वापस अपनी जानी पहचानी जगह पर आ गए.

इस प्रयोग के बारे में 'द रॉयल सोसायटी जर्नल बॉयलोजी लेटर्स' में छपा है.

बर्मा के अजगरों को दुनिया के सबसे लंबे साँपों में से एक माना जाता है. अब तक जो सबसे लंबा अजगर पकड़ा गया है उसकी लंबाई 5 मीटर या 17 फीट से लंबी और वजन 74 किलो था.

ये अपने शिकार को शिकंजे में कस लेते हैं और तब तक नहीं छोड़ते जब तक कि उसका दम न घुट जाए. बर्मा का यह विशाल लेकिन शांत प्राणी पक्षियों और हिरण से लेकर मगरमच्छ तक को पूरा निगल जाता है.

प्रयोग

मूल रूप से दक्षिणपूर्वी एशिया के इलाकों में रहने को अभ्यस्त ये अजगर फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स नेशनल पार्क में रखे गए हैं. यहां के नए वातावरण में इन्होंने खुद को बहुत अच्छे से ढाल लिया है.

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बर्मा के ये अजगर इस नेशनल पार्क में ऐसे रच बस गए हैं कि पार्क के बाकी स्तनपायी जानवरों की संख्या चौंका देने के हद तक घटने लगी है.

ये जानने के लिए कि ये आक्रामक परभक्षी कैसे अपने मूल निवास से बाहर निकले और दुनिया में जगह-जगह फैल गए, वैज्ञानिकों ने एक शोध करने की ठानी.

शोधकर्ताओं ने 12 अजगरों को नेशनल पार्क से पकड़ा और उनमें जीपीएस रेडियोट्रांसमीटर फिट कर दिया.

उनमें से आधे अजगरों को वहां छोड़ दिया गया जहां से पकड़ा गया था. लेकिन छह अजगरों को एवरग्लेड्स नेशनल पार्क से 21-36 किलोमीटर की दूरी पर ले जाकर छोड़ दिया गया.

हवाई जहाज में बैठकर अजगरों के चलने की दिशा और गति का अध्ययन करने के लिए इनका पीछा किया गया. शोधकर्ता तब हैरान रह गए जब उन्होंने पाया कि ये सारे अजगर पार्क की दिशा में बढ़ रहे थे, जहां वे रहते थे.

छह में से पांच अजगर बिलकुल सही दिशा में तेजी से बढ़ते हुए पार्क के पांच किलोमीटर के दायरे में पहुंच गए.

उत्तरी केरोलिना के डेविड्सन कॉलेज के प्रमुख लेखक शानन पिट्मैन बताते हैं, "हम सब दंग रह गए."

दिशा की समझ

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उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद थी कि अजगर जहां छोड़े गए वहीं नया घर बनाएंगे, लेकिन वे तो वापस उस दिशा में जाने लगे जहां से उन्हें पकड़ा गया था. यह इस बात का प्रमाण है कि बर्मा के अजगर अपने घर वापस लौटने में सक्षम हैं."

इस प्रयोग से यह साबित होता है कि इन साँपों में नक्शे और कम्पास जैसी कोई चीज होती है जिससे उन्हें पता चल जाता है कि किस दिशा में और कितनी दूर जाना है.

दिशाओं की इतनी सटीक समझ साँप की किसी और प्रजाति में नहीं दिखाई देती है.

पिट्मैन ने बीबीसी को बताया, "दूसरे साँपों में दिशाओं की ऐसी समझ नहीं होती जितनी अजगर में होती है. हमें अभी इससे संबंधित और शोध करने की जरूरत है."

पहले किए गए कुछ शोध में इस बात का पता चला था कि समुद्री क्रेट्स और गेटिस जैसे छोटे साँप, घर से थोड़ी दूर छोड़ दिए जाने पर वापस अपनी जगह आ जाते थे, लेकिन ज्यादा दूर छोड़े जाने पर वे भटक गए.

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