जितनी सक्रिय मां, उतना बच्चा

  • 26 मार्च 2014
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मां जितनी सक्रिय होगी, उसका बच्चा भी शारीरिक रूप से उतना ही सक्रिय होगा. यह तथ्य ब्रिटेन में 500 महिलाओं और उनके चार साल के बच्चों पर किए गए अध्ययन के बाद सामने आया है.

इसमें कहा गया है कि बहुत सी मांओं के व्यायाम करने का स्तर प्रस्तावित स्तर से बहुत कम है.

कैंब्रिज और साउथंपटन विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने शोध के लिए सात दिन तक दिल की गति को मापा.

पीडियाट्रिक्स जनरल में छपे इस शोध में कहा गया है कि बच्चों की सेहत सुधारने के लिए बनी नीतियों को मांओं पर केंद्रित होना चाहिए.

इस शोधपत्र के अनुसार बच्चे "प्राकृतिक रूप से सक्रिय" नहीं होते. अभिभावकों की यह महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी होती है कि वे जीवन की शुरुआत में ही बच्चों में व्यायाम करने की आदत विकसित करें.

मामूली और उल्लेखनीय

इस शोध के तहत साउथंपटन के 554 चार साल के बच्चों और उनकी मांओं ने एक हफ़्ते तक अपनी छातियों पर एक एक्सेलोमीटर और हार्ट-रेट मॉनीटर पहना.

शोध में शामिल प्रतिभागी इसे लगातार पहने रहे-सोते वक़्त और पानी में खेलते वक़्त भी.

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Image caption व्यायाम करने और सक्रिय रहने की आदत बचपन में ही डाल देनी चाहिएं.

वर्तमान में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में इंस्टीट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थकेयर में रिसर्च एसोसिएट, कैथरीन हेसकेथ, ने शोध का सह-नेतृत्व किया था. वह कहती हैं कि मां और बच्चों से मिले आंकड़े मां और बच्चों की शारीरिक गतिविधियों के बीच सीधा और सकारात्मक संबंध दिखाते हैं.

"मां जितनी ज़्यादा सक्रिय रहती है उतना ही ज़्यादा बच्चा भी. हालांकि इस शोध से यह जानना संभव नहीं था कि क्या सक्रिय बच्चे अपनी मां को अपने पीछे भागने पर मजबूर कर रहे हैं. यह हो सकता है कि दोनों में से एक की सक्रियता दूसरे को प्रभावित करती हो."

वह कहती हैं कि जब भी कोई मां किसी हल्के या भारी काम में लगती है तो उसके बच्चे के उसी स्तर के काम में 10% ज़्यादा जुटने की संभावना रहती है.

तो अगर कोई मां रोज़ एक घंटा ज़्यादा सक्रिय रहती है तो उसका बच्चा 10 मिनट ज़्यादा सक्रिय रह सकता है.

यह फ़र्क़ बहुत मामूली लग सकता है पर एक महीने या एक साल में यह उल्लेखनीय हो जाता है.

मां की सक्रियता पर उसके काम करने या न करने के तथ्य को देखा गया, तो यह भी देखा गया कि बच्चे के भाई-बहन हैं या नहीं.

चेंज फ़ॉर लाइफ़

शोध के सह-लेखक कैंब्रिज विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर डाइट एंड एक्टिविटी रिसर्च के डॉ एस्थेर वान स्लुइज्स थे. वह कहते हैं मां और बच्चे के बीच गतिविधियों के स्तर का संबंध उन मांओं में मज़बूत होता है जिन्होंने 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया है बनिस्बत उनके जिन्होंने 18 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा है.

शोध में माना गया है कि एक बार मां बनने के बाद महिलाओं की गतिविधियों का स्तर कम हो जाता है और सामान्यतः यह पुराने स्तर पर नहीं आ पाता.

सक्रियता की यह कमी अक्सर उनके छोटे बच्चे को प्रभावित करती है.

हेस्केथ कहती हैं, "नए मां-बाप की प्राथमिकता में कई चीज़ें होती हैं और सक्रिय रहना कई बार उनकी सूची में सबसे ऊपर नहीं होता. हालांकि मातृत्व संबंधी गतिविधियों में थोड़ी बढ़ोत्तरी भी मां और बच्चों के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है."

सिर्फ़ हर रोज़ चलने और घूमने से भी कुछ फ़ायदे मिल सकते हैं.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड में बच्चों, युवाओं और परिवारों की निदेशक डॉ एन हॉस्किन्स कहती हैं संस्थान परिवारों की शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने और बच्चों से पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने को प्रतिबद्ध है.

"स्कूल जाने से पहले की शुरुआती उम्र में खेलों में सक्रियता समन्वय स्किल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अभिभावकों और शिशुओं के तैरने, बगी फ़िट और बच्चों के जिम जैसे मौक़े मांओं को सामाजिक रूप से सक्रिय होने और अपने बच्चे के विकास में मदद करते हैं."

उनका चेंजफ़ॉरलाइफ़ अभियान परिवारों को अच्छा खाने, ज़्यादा घूमने और लंबी ज़िंदगी के लिए प्रेरित करता है. बच्चों के लिए इसका अर्थ है कि वह एक घंटे तक सक्रिय रहें और वयस्कों के लिए हफ़्ते में ढाई घंटे.

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