नेत्रहीनों के लिए बनाई गई 'सुंदर' घड़ी

  • 16 अप्रैल 2014
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द ब्रैडली टाइमपीस एक ऐसी घड़ी है जो दृष्टि बाधितों को समय बताती है. इस सर्वेश्रेष्ठ डिज़ाइन प्रतियोगता के लिए नामांकित किया गया है. क्रिस स्टोकेल-वाकर बता रहे हैं इस घड़ी के निर्माण और नामकरण के पीछे की कहानी.

टाइटेनियम की इस घड़ी का डायल गोल है. इस घड़ी में कोई सुई नहीं है, न ही कोई अंक हैं. इस घड़ी में दो बॉल-बेयरिंग लगे हैं जिनके सहारे समय जाना जाता है. एक बॉल-बेयरिंग से घंटे का पता चलता है और दूसरे से मिनट से.

डिज़ाइनर ह्यूंग्सू साल 2011 में किम मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी के छात्र थे. एक दिन उनके साथी उनसे समय पूछा. उनके साथी नेत्रहीन थे. उनके पास नेत्रहीनों को समय बताने वाली घड़ी तो थी लेकिन क्लास में पढ़ाई के दौरान बोल कर समय बताने वाली घड़ी का प्रयोग संभव नहीं था.

किम कहते हैं, "मेरे सहपाठी के लिए मैं उनकी कलाई घड़ी था."

नेत्रहीनों के लिए कई घड़ियाँ पहले से उपलब्ध हैं. इनमें से ज़्यादातर घड़ियां सामान्य घड़ियों जैसी ही दिखती हैं. इनका ऊपरी कवर हटाकर हाथों से छूकर समय पता करना पड़ता है.

समय का संकट

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ब्रिटेन में नेत्रहीनों और आंशिक दृष्टबाधितों के लिए काम करने वाली संस्था आरएनआईबी की लेज़्ली ड्यूरो ने कहा, "अगर आप नेत्रहीन हैं और आधी रात को आपकी नींद खुल जाती है तो यदि आपको यह नहीं पता चल पाता कि क्या समय हो रहा है तो आप बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं."

किम कहते हैं पहले की घड़ियां काम की तो थीं लेकिन वो सुंदर नहीं थीं. नेत्र वाले लोग घड़ियों को केवल समय जानने का साधन ही नहीं बल्कि कई बार फ़ैशन की चीज़ के रूप में भी प्रयोग करते हैं. कई लोगों को लगता है कि नेत्रहीनों के लिए घड़ी केवल समय जानने का साधन है. लेकिन यह एक ग़लत सोच है.

पहले से मौजूद घड़ियों के व्यावहारिक आलोचना भी की जाती रही है. किम अपने दोस्त के लिए एक ऐसी घड़ी चाहते थे जो काम की होने के साथ ही देखने में भी सुंदर हो.

किम ने कहा, "मैंने इंजीनियरों की एक टीम बनाई. हमने ब्रैले लिपि के डिस्प्ले वाली घड़ी बनाने की सोची. लेकिन हमने जब ऐसा नमूना बनाया तो लोगों की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक नहीं रही. "

वो कहते हैं, "हमें पता चला कि दृष्टि बाधित लोगों में से तक़रीबन 10 प्रतिशत ही ब्रेल लिपि पढ़ पाते हैं."

ब्रिटेन और अमरीका में बहुत से लोग ऐसे हैं जो जन्म से नेत्रहीन नहीं हैं बल्कि उनमें ऐसी दिक्कत बाद में हुई. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नेत्रहीनों की कुल संख्या में 82 फ़ीसदी से ज़्यादा की उम्र 50 साल से अधिक है.

बॉल-बेयरिंग पर बहस

ब्रैल लिपि पढ़ने का अभ्यास न होने के कारण ऐसे लोगों की हाथों से स्पर्श करके महसूस करने की क्षमता कम विकसित होती है.

किम की टीम ने फिर से नए डिज़ाइन पर काम करना शुरू किया. उन्होंने 25 से ज़्यादा डिज़ाइन बनाए. उनका नेत्रहीनों पर परीक्षण किया.

घड़ी को सुंदर और काम का दोनों एक साथ बनाना काफ़ी चुनौतीपूर्ण था. अंततोगत्वा एक डिज़ाइन पर किम की टीम की सहमति बनी. इस घड़ी में चुंबक के सहारे समय जानने के लिए दो बॉल-बेयरिंग का प्रयोग किया गया था. लेकिन इस घड़ी में बॉल-बेयरिंग के प्रयोग को लेकर भी बहस हुई.

किम कहते हैं, "सब चाहते थे कि बॉल-बेयरिंग थोड़ी बड़ी हो ताकी इसे बेहतर तरीके से महसूस किया जा सके. लेकिन डिज़ाइनरों का कहना था कि उनका आकार बढ़ाने पर घड़ी भद्दी लगने लगेगी. फिर हमने बीच का रास्ता चुना."

सितंबर, 2011 में जब किम ने इस परियोजना पर काम करना शुरू तभी बम निरोधक दस्ते के एक अफ़सर लेफ्टीनेंट ब्रैडली स्नाइडर अफ़ग़ानिस्तान में एक विस्फ़ोटक का शिकार हो गए. उन्हें गंभीर चोट लगी और उनकी देखने की शक्ति छिन गई.

मुलाकात

अगस्त, 2012 में हुए लंदन पैरा ओलंपिक में ब्रैडली ने दो स्वर्ण पदक जीते. लेकिन उनका दैनिक जीवन संघर्ष भरा ही था.

ब्रैडली कहते हैं, "मैं अफ़ग़ानिस्तान में घायल हुआ था. मेरी आंख सीधे अमरीका के एक अस्पताल में खुली. बेहोशी के 60 घंटे मेरे जीवन से गायब हो गए."

आंखे खोने के बाद के अनुभव के बारे में ब्रैडली कहते हैं कि इसे बर्दाश्त करना बड़ा ही मुश्किल था.

आखिरकार ब्रैडली से किम ने संपर्क किया. हालांकि उन दोनों की पहली मुलाकात एक साझा दोस्त के हवाले से हुई थी.

ब्रैडली कहते हैं, "किम नेत्रहीनों के लिए एक घड़ी बना रहे थे. मैं एक नेत्रहीन था."

वे बताते हैं, "मेरे पास एक आवाज़ करने वाली घड़ी थी. वह बटन दबाने पर बोलकर समय बताती थी. लेकिन अगर मैं ट्रेन वगैरह में होता था तो उसकी आवाज़ नहीं सुन पाता था."

वे कहते हैं, "सबसे बुरी बात तो यह थी कि समय जानने के लिए बटन दबाते ही मुझे अहसास हो जाता था कि मैं एक ऐसा इंसान हूँ जिसे विशेष मदद की ज़रूरत है."

वे कहते हैं, "मुझे यह ख़्याल अच्छा लगा कि मैं वैसी ही चीज़ का प्रयोग करूँ जैसा कि सब करते हैं. मैं जितना हो सके उतना सामान्य महसूस करना चाहता हूँ."

घड़ी के ख़रीदार

इस घड़ी का नाम ब्रैडली के नाम पर रखा गया. क्राउडफंडिंग वेबसाइट किकस्टार्टर पर पिछले साल जुलाई में 65 देशों को 3681 लोगों ने 594,602 डॉलर की मदद दी. यह घड़ी इस साल मई से अमरीका, ब्रिटेन और यूरोप में मिलने लगेगी. बाद में यह और जगह उपलब्ध होगी.

किम बताते हैं कि 1000 लोगों ने इस घड़ी की एडवांस बुकिंग की है लेकिन इनमें से केवल एक से दो प्रतिशत ही नेत्रहीन हैं.

ब्रैडली कहते हैं, "यह घड़ी नेत्रहीनों और नेत्र वालों के बीच की दूरी को कम करती है."

लंदन डिज़ाइन म्यूज़ियम के सालाना प्रतियोगिता में इस घड़ी को शामिल किया गया है. इस प्रतियोगिता में शामिल 76 विभिन्न डिज़ाइनों में ब्रैडली घड़ी की डिज़ाइन को काफ़ी सराहना मिल रही है. इस प्रतियोगिता में नामांकन होने मात्र से ही इसे यूरोप के घड़ी विक्रेताओं से प्रस्ताव मिलने लगे हैं.

इस ख़ूबसूरत घड़ी को देखकर यह अंदाज लगाना मुश्किल होगा कि यह नेत्रहीनों की घड़ी है.

किम कहते हैं, "लोगों की धारणा है कि नेत्रहीन लोग फ़ैशन में रुचि नहीं रखते. मुझे भी ऐसा ही भ्रम था. लेकिन मैं ग़लत था."

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