'मर्द को ज़्यादा दर्द होता है'

  • 5 जून 2014
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एक ताज़ा शोध के अनुसार बड़े ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ के दौरान पुरुषों को महिलाओं को ज़्यादा दर्द होता है.

जर्मनी के एक अस्पताल में हृदय और पेट संबंधी ऑपरेशन कराने वाले तक़रीबन 10,000 मरीजों पर नज़र रखी गई.

यूरोएनेस्थिसिया सम्मेलन में शामिल हुए महिलाओं और पुरुषों के साक्षात्कार से पता चला कि पुरुषों ने दर्द को लेकर ज़्यादा शिकायत दर्ज कराई.

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हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि दर्द के मामले में स्त्री और पुरुष में कोई अंतर होता है यह कहना एक विवादास्पद मुद्दा है.

दर्द के मामले में हार्मोन की भी भूमिका होती है. पुरुषों में पाए जाने वाले सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन से दर्द कम होता है, वहीं महिलाओं को होने वाला दर्द उनके मासिक चक्र से प्रभावित होता है.

माना जाता है कि दर्द के मामले में सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है.

दर्द में भेद

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जर्मनी के बॉख़म स्थित रूअर विश्वविद्यालय के अस्पताल में पिछले चार साल में हुए 10,200 मरीजों के ऑपरेशन के आंकड़े को जमा किया गया है.

इन आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार कुल मिलाकर पुरुष और स्त्री को होने वाली पीड़ा में ज़्यादा फ़र्क नहीं होता है.

इस शोध में बड़े ऑपरेशन और छोटे इलाज पर अलग-अलग शोध किया गया और इस शोध में कुछ ख़ास प्रारूप उभरता है.

शोध के अनुसार बड़े ऑपरेशन के बाद पुरुषों ने ज़्यादा दर्द होने के शिकायत की जबकि महिलाओं ने छोटे इलाज के बाद ज़्यादा दर्द होने की शिकायत की.

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ऑस्ट्रिया के ग्रैज़ विश्वविद्यालय के डॉक्टर एंड्रियाज़ सैंडर-कीसलिंग कहते हैं, "चिकित्सा विज्ञान में स्वास्थ्य पर लिंग के प्रभाव का काफ़ी महत्व है."

वे कहते हैं, "दर्द के मामले में लिंग के प्रभाव को लेकर काफ़ी विवाद है, चिकित्सा के प्रायोगिक और नैदानिक दोनों क्षेत्रों में."

वे बताते हैं, "हमारे आंकड़ों से निश्चित तौर पर यह बात साफ़ नहीं होती है. हालांकि हमारे अध्ययन के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है, सर्जरी बड़ी है या छोटी इसकी मुख्य भूमिका होती है. महिलाएँ छोटे स्तर के इलाज में ज़्यादा दर्द महसूस करती हैं, वहीं पुरुष बड़े स्तर की सर्जरी के बाद ज़्यादा दर्द सहते हैं."

लीस्टर एनएचएस ट्रस्ट के विश्वविद्यालय अस्पताल के डॉक्टर बेवर्ली कोलेट एक परामर्श चिकित्सक हैं. वे कहती हैं, "इस शोध से कुछ उत्तेजक सवाल खड़े होते हैं, इसके बाद आपके जहन में कई और सवाल खड़े होने लगते हैं, लेकिन आपको आगे शोध करने का मौका नहीं मिलता."

अलग-अलग शोध के अलग नतीजे

कोलेट पूछती हैं, "हम किस सर्जरी को बड़ा ऑपरेशन मानेंगे? मरीजों की उम्र कितनी थी? इसका सेक्स हार्मोन पर प्रभाव पड़ेगा. और शरीर के किस भाग का इलाज हो रहा है इसका भी दर्द के प्रभाव पर असर पड़ेगा."

वे कहती हैं कि त्वचा पर गर्मी लगने के मामले में महिलाओं को ज़्यादा दर्द महसूस होता है. इसके अलावा दर्द का मनोवैज्ञानिक पक्ष भी होता है. माना जाता है कि अगर असुंदर बुज़ुर्ग पुरुष नर्स के बजाय युवा आकर्षक महिला नर्स देखरेख करें तो पुरुषों में 'दर्द सहने की क्षमता बढ़ती जाती है.'

वे कहती हैं, "लड़के और लड़कियों की जिस तरह परवरिश की जाती है उसका भी दर्द की अवधारणा से संबंध है. महिला और पुरुष में होने वाले दर्द के बारे में काफ़ी मतभेद है. और इस अध्ययन से इस मुद्दे पर कोई साफ़ राय सामने नहीं आती."

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बाथ विश्विद्यालय के डॉक्टर एडम कियॉग कहते हैं, "हो सकता है कि दर्दनाशक औषधि के प्रति महिलाओं और पुरुषों की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है. इस बारे में और शोध किए जाने की ज़रूरत है."

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वे कहते हैं, "दर्द के मामले में कुल मिलाकर लिंग के आधार पर क्या फ़र्क पड़ता है यह साफ़ नहीं है. इसके परिणाम असंगत हैं. कुछ दूसरे अध्ययन के नतीजे इससे बिल्कुल अलग है."

वे कहते हैं, "दर्द एक सापेक्षिक चीज़ है लेकिन आमतौर पर महिलाएँ पुरुषों की तुलना में दर्द को लेकर ज़्यादा शिकायत करती हैं."

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डॉक्टर रोमन क्रेग कहते हैं, "महिलाओं के बार बार होने वाले दर्द के मामले में ज़्यादा संवेदनशील होती हैं. वो प्रयोग के दौरान दर्द के प्रति ज़्यादा संवेदनशील थीं."

वे कहते हैं, "इस शोध के नतीजे इस विषय पर किए गए पुराने शोध से काफ़ी उलट है."

वे कहते हैं, "कुल मिलाकर यह मामला काफ़ी जटिल है."

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