मंगल यात्रा के लिए उड़ी नासा की 'उड़नतश्तरी'

  • 29 जून 2014
नासा, अंतरिक्ष यान का परीक्षण इमेज कॉपीरइट NASA

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने मंगल ग्रह पर भविष्य में यान को उतारने की तकनीक के संबंध में सफल परीक्षण किया है.

उड़नतश्तरी के आकार के इस यान को गैस के गुब्बारे की मदद से ऊंचाई पर भेजा गया.

इसका मक़सद एक नए तरह के पैराशूट का परीक्षण था जो मंगल ग्रह की सतह पर अंतरिक्ष यान उतारते समय उसे धीमा करने में मददगार हो सके. इसके साथ इसमें एक हाव से फूलने वाला केवलर रिंग भी लगा था.

परीक्षण में पैराशूट के अलावा बाक़ी सभी उपकरणों ने सही तरीक़े से काम किया. पैराशूट पूरी तरह से खुलने में नाकाम रहा.

यह परीक्षण हवाई क्षेत्र से किया गया था.

मंगल ग्रह

शनिवार को जिस लो-डेंसिटी सुपरसोनिक डेएक्सीलेरेटर (एलडीएसडी) अंतरिक्ष यान का परीक्षण किया गया, वह उड़ान के बाद प्रशांत महासागर में गिर गया.

नासा को उम्मीद है कि इससे भविष्य में मंगल पर अधिक वज़न वाले यानों को उतारने में मदद मिल सकेगी.

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फ़िलहाल वज़न ले जाने की क्षमता डेढ़ टन के आसपास है. अगर इंसान मंगल तक पहुंचना चाहते हैं, तो इस क्षमता को कम से कम 10 टन ले जाना होगा.

इस उड़ान के डॉटा रिकॉर्डर का पता लगाने के लिए कई दल रवाना किए गए हैं.

परीक्षण

हीलियम वाले गु्ब्बारे को अमरीकी नौसेना की प्रशांत महासाहर क्षेत्र में मौजूद कुई मिसाइल रेंज फ़ैसिलिटी से क़रीब 35 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचने में दो घंटे का वक़्त लगा.

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परीक्षण से पहले नासा के इंजीनियरों ने कहा था कि उनको इस परीक्षण उड़ान से उपयोगी आंकड़े मिलेंगे. अगले साल हवाई में इस परियोजना के तरह दो और परीक्षण होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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