कैंसर की दवाओं पर बेडरूम की रोशनी का असर?

  • 31 जुलाई 2014
सोती हुई महिला इमेज कॉपीरइट Thinkstock

आपके बेडरूम की मद्धिम रोशनी भी स्तन कैंसर की दवाओं का असर ख़त्म कर सकती है. अमरीका में एक चूहे पर किए गए परीक्षण दिखाते हैं कि अगर स्ट्रीट लाइट जैसी कम रोशनी भी हो तो टैमोक्सिफ़ेन दवा के लिए ट्यूमर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

ये अध्ययन टुलाने यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है. इसमें स्मार्टफ़ोन से लेकर टैबलेट की रोशनी और अन्य कृत्रिम रोशनियाँ भी शामिल हैं.

इस शोध के बारे में जानकारी एक कैंसर रिसर्च पत्रिका में छपी है.

शोध कहता है कि रोशनी से सोने के समय बनने वाले हॉर्मोन पर असर पड़ता है. इसकी वजह से कैंसर की कोशिकाएँ भी प्रभावित होती हैं.

क्या ज़्यादा लाल माँस खाने से होता है स्तन कैंसर?

टैमोक्सिफ़ेन दवा से स्तन कैंसर के उपचार में काफ़ी अहम मोड़ आया था. इस दवा से लोगों की आयु बढ़ गई थी और बचने की संभावना भी कई गुना बढ़ी थी. इस दवा को खाने से एस्ट्रोजेन हॉर्मोन कैंसर का ट्यूमर और नहीं बढ़ पाता है, हालाँकि कैंसर की कोशिकाएँ आगे चलकर इस दवा के लिए भी प्रतिरोधक हो जाती हैं.

शोध

शोधकर्ता ये देखना चाहते थे कि शरीर के 24 घंटे के चक्र का टैमोक्सिफ़ेन दवा के लिए बनने वाली प्रतिरोधक क्षमता पर क्या असर पड़ता है.

उन्होंने अपना अध्ययन नींद को बढ़ाने वाले हॉर्मोन मेलेटोनिन पर केंद्रित किया. ये हॉर्मोन शाम से बनने लगता है और रात भर उसका स्तर बढ़ता जाता है. सुबह के समय फिर उसका स्तर गिरता है.

मगर इस बीच शाम की कृत्रिम रोशनी से इस हॉर्मोन का स्तर गिर सकता है.

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