फिर से चमक सकते हैं मरे हुए सितारे

टाइप ला सुपरनोवा इमेज कॉपीरइट BBC World Service

खगोलविदों ने बताया है कि मृत तारे फिर से चमक सकते हैं और उनमें सुपरनोवा के रूप में विस्फोट हो सकता है.

मृत तारों को 'व्हाईट ड्वार्फ' के रूप में जाना जाता है.

इस खोज से लगता है कि तारों में होने वाले विशेष तरह के विस्फोट का रहस्य सुलझा लिया गया है. इस विस्फोट को 'टाइप ला सुपरनोवा' के रूप में जाना जाता है.

विशेषज्ञों को अंदेशा है कि व्हाईट ड्वार्फ में साथ के तारों के साथ टकराव से विस्फोट हो सकता है लेकिन इस बारे में अब तक कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिले हैं.

इस खोज से संबंधित शोधपत्र नेचर जर्नल में छपा हैं.

सूरज के द्रव्यमान वाला तारा जब मरने लगता है तो यह सिकुड़ कर व्हाईट ड्वार्फ में तब्दील होने लगते हैं. धीरे-धीरे यह व्हाईट डवार्फ ठंडा हो जाता है.

'चंद्रशेखर लिमिट'

इमेज कॉपीरइट PA

लेकिन जिस द्रव्यमान पर आकर व्हाईट ड्वार्फ सिकुड़ना बंद कर स्थिर हो जाता है उसे 'चंद्रशेखर लिमिट' कहते हैं.

अगर व्हाईट ड्वार्फ दूसरे तारों से द्रव्यमान हासिल करता है या उसकी किसी दूसरे व्हाईट ड्वार्फ से टकराव होता है तो तारे के कोर में कार्बन पर अधिक भार पड़ने से नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया होती है.

कार्बन के नाभिकीय संलयन से ऊर्जा के ऊत्सर्जन के साथ भारी तत्व का निर्माण होता है जो तारे को दो भाग में तोड़ देता है.

हालांकि अंतरिक्ष में सुपरनोवा होने की उम्मीद बार-बार रहती है लेकिन किसी एक आकाशगंगा में यह एक विरल घटना है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार