ओज़ोन परत में दिखा सुधार

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संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन में पाया गया है कि पराबैंगनी (अल्ट्रावॉयलेट) किरणों से बचाने वाली ओज़ोन परत में सुधार के संकेत मिले हैं.

इसमें दावा किया गया है कि ओज़ोन की परत में अंटार्कटिका के ऊपर हर साल दिखने वाले छेद का बड़ा होना भी रुक गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस छेद के सिकुड़ने में एक दशक का समय लगेगा.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ओज़ोन को हानि पहुंचाने वाली सीएफ़सी (क्लोरो फ़्लोरो कार्बन) गैसों को चलन से बाहर करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही यह संभव हो पाया है.

बड़ी सफलता

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वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) और संयुक्त राष्ट्र एनवॉयरोन्मेंट प्रोग्राम के शोधकर्ताओं द्वारा इस अध्ययन को प्रकाशित किया गया है.

डब्ल्यूएमओ के महासचिव माइकल जाऱॉड ने कहा, ''ओज़ोन परत को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए उपाय ही इस पर्यावरणीय सफलता के पीछे के बड़े कारण हैं.''

उन्होंने कहा, '' जलवायु परिवर्तन जैसी इससे भी बड़ी समस्याओं से निपटने में ऐसी ही तत्परता और एकता दिखाने के लिए यह हमें प्रोत्साहित करता है.''

ग्रीन हाऊस गैसों में कमी नहीं

बीबीसीपर्यावरण संवाददाता नवीन सिंह खड़का कहते हैं, ''सीएफ़सी गैसों में कटौती करने के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर मांट्रियल संधि हुई थी. कुछ देशों में इसे बेहतर तरीक़े से लागू भी किया गया.''

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रिपोर्ट के प्रकाशित होने के समय पर खड़का कहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया के सारे देशों के प्रतिनिधियों की एक बैठक करने जा रहे हैं.

हालांकि ओज़ोन के मोर्चे पर सुधार के बावजूद ग्रीन हाऊस गैसों में कमी नहीं हो रही है.

इसी सप्ताह डब्ल्यूएमओ ने कहा था कि वातावरण में ग्रीन हाऊस गैसें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं.

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