बजट रेंज फ़ोन 'एंड्रॉएड वन' की 8 ख़ास बातें

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भारतीय कंपनियों माइक्रोमैक्स, कार्बन और स्पाइस के साथ मिलकर गूगल ने अपनी पहली सस्ती, लेकिन 'हाई क्वालिटी' स्मार्टफ़ोन रेंज 'एंड्रॉएड वन' भारतीय बाज़ार में उतारा है.

गूगल के एंड्रॉएड प्रमुख सुंदर पिचाई के अनुसार एंड्रॉएड वन फ़ोन्स के निर्माण की लागत कम है, इसलिए इनकी क़ीमतें महज़ 6,399 रुपए से शुरू हो रही हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “हमने मोबाइल निर्माता कंपनियों को हार्डवेयरों की एक सूची दी है. हालांकि वो अपनी पसंद के प्रोसेसर, ग्राफिक्स यूनिट, बैटरी और मनचाहा कैमरा चुन सकते हैं.”

तकनीकी विशेषज्ञ निमीश दुबे ने कहा, "एंड्रॉएड वन कम क़ीमत में एक अच्छा फ़ोन ज़रूर है, लेकिन अगर एक साल पहले ये आता तो और अच्छा होता. छह-सात हज़ार की क़ीमत में इस फ़ोन की प्रतिस्पर्धा में मोटो ई, लावा आईरिस, शाओमी रेडमी एस1 के अलावा कई अन्य फ़ोन भी हैं. ये थोड़ा लेट हो गया."

एक नज़र एंड्रॉएड वन की खास बातों पर:

  • डिसप्ले – 4.5 इंच
  • 1 जीबी रैम, 4 जीबी इंटरनल मेमोरी और 32 जीबी तक का एसडी कार्ड स्लॉट
  • डबल सिम कार्ड स्लॉट
  • पांच मेगापिक्सेल का बैक कैमरा, 2 मेगापिक्सेल का फ्रंट कैमरा
  • ताइवानी कंपनी मीडियाटेक से क्वाडकोर प्रोसेसर
  • फ़ोन से अलग होने वाली बैटरी
  • एफ़एम रेडियो
  • एंड्रॉएड के आने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम चलाने की क्षमता

गूगल ने मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी एयरटेल से भी गठबंधन किया है, ताकि यूज़र्स अपने एंड्रॉएड सॉफ्टवेयर कम से कम डाटा खर्च पर अपग्रेड कर सकें.

यूट्यूब ऑफ़लाइन ऐप

यूट्यूब के अधिकारी सीज़र सेनगुप्ता के अनुसार अगले कुछ हफ्तों में ऑफलाइन यूट्यूब ऐप उपलब्ध हो जाएगा.

यानी यूट्यूब पर किसी वीडियों को एक बार एक्टिव इंटरनेट पर देखने के बाद उसे बिना बफरिंग के बिना ऑफ़लाइन देखा जा सकेगा. इस फ़ीचर की सोशल मीडिया पर ख़ूब चर्चा है.

यूट्यूब के अलावा गूगल नाउ में भई बदलाव किए गए हैं - रेलवे बुकिंग से संबंधित जानकारी और क्रिकेट स्कोर, अब ऐप के कार्ड्स में दिखेंगे.

वहीं समाचार पत्रों का संकलन रखने वाली गूगल न्यूज़स्टैंड ऐप में 13 नई पत्रिकाएं जोड़ी गई हैं.

कैसे कम हुई एंड्रॉएड वन की क़ीमत?

अगर हार्डवेयर्स की बात करे तो, इन स्मार्टफ़ोन्स के न्यूनतम हार्डवेयर का निर्धारण गूगल ने किया है, जिससे इन फ़ोन्स को बनाने की लागत कम हुई है.

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जानकारों का मानना है कि एंड्रॉएड वन सस्ते स्मार्टफोन बाज़ार की कमियों को पूरा करेगा.

सुंदर पिचाई के अनुसार गूगल की सूची की वजह से मोबाइल निर्माता कंपनियों का काम आसान हो गया और उन्हें एंड्रॉएड सॉफ्टवेयर के लिए हार्डवेयरों को टेस्ट नहीं करना पड़ा. वो काम गूगल ने ही कर दिया था.

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एंड्रॉएड वन फ़ोन्स में हैंडसेट निर्माता कंपनियां अपने पसंद के वॉलपेपर और सेवाएं तो डाल सकती हैं, लेकिन कोई ऐसी थीम नहीं जो फ़ोन पर स्टॉक एंड्रॉएड सॉफ्टवेयर का लुक बदले.

रिसर्च कंपनी प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स के अनुसार अगले पांच वर्षों में भारत में क़रीब 40 करोड़ स्मार्टफ़ोन बिकेंगे, जिसमें से ज्यादातर एंड्रॉएड वन की क़ीमत श्रेणी की होगी.

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