अपने ही देश में नासा से पिछड़ा है इसरो?

  • 24 सितंबर 2014
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भारत के मंगलयान मिशन के लिए एक तरफ जहां इसरो का डंका पूरे विश्व में बज रहा है, वहीं खुद भारत में नासा के क्रेज़ के आगे इसरो पिछड़ता दिखता है.

एजुकेशनल टूर प्रबंधन करने वाली एक कंपनी फ्रंटियर्स एडुटेनमेंट की माने तो अंतरिक्ष केंद्रों के दौरे के लिए उनके पास आने वाले कॉल्स में से 99 प्रतिशत अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दौरे की जानकारी के लिए होती हैं, जबकि सिर्फ़ एक प्रतिशत स्कूल या शैक्षिक संस्थान इसरो के दौरे की जानकारी मांगते हैं.

दिल्ली और बड़े शहरों में बच्चों को एजुकेशनल टूर पर विदेश भेजने का ट्रेंड है. जानकार मानते हैं कि भारतीय छात्रों के बीच अंतरिक्ष केंद्र में सबसे लोकप्रिय नासा है.

नासा की सैर

फ्रंटियर्स एडुटेनमेंट के विशाल वर्मा ने बीबीसी को बताया, “भारतीय छात्रों के बीच अमरीकी अंतरिक्ष केंद्र नासा को लेकर काफ़ी उत्साह है, हम हर साल लगभग 500 छात्रों को नासा की यात्रा करवाते हैं, हमारे जैसी दूसरी कंपनियों को मिलाया जाए तो भारत से हज़ारों छात्र हर साल नासा जाते हैं. इसमें करीब दो लाख का खर्च आता है.”

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Image caption भारत के मंगल अभियान की अंतरराष्ट्रीय जगत में काफ़ी तारीफ़ हुई है

लेकिन क्या ऐसा ही उत्साह उन्हें इसरो के लिए भी दिखता है?

उन्होंने कहा, “इसरो में नासा जैसे कार्यक्रमों का अभाव है, जो कार्यक्रम हैं उनके बारे में ज़्यादा लोग जानते भी नहीं हैं. अगर इसरो इस दिशा में क़दम बढ़ाए तो मांग वहां के लिए भी होगी. इससे छात्रों के पैसे भी कम खर्च होंगे.”

मार्केटिंग

एक अन्य एजुकेशनल टूर कंपनी के मैनेजर कुणाल पाठक कहते हैं, “नासा अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों की जबरदस्त मार्केटिंग करता है. यहां के गावों में भी नासा का नाम है, लेकिन इसरो यहां पिछड़ जाता है.”

नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के प्रवक्ता लक्ष्य छाबरिया का कहना है कि स्कूल नासा के दौरे पर जाते हैं क्योंकि वहां इस तरह के दौरों की सुविधाएं है. इसरो अगर ऐसी सुविधाएँ दे तो वहां छोटे स्कूल के बच्चे भी जा सकेंगे.

मंगलयान मिशन के लिए एक बार फिर सुर्खियों में आया भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानी इसरो भारतीय छात्रों की लोकप्रियता पाने के लिए कई क़दम उठा रहा है.

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इसरो के श्रीहरिकोटा में स्थित केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी विश्वनाथ शर्मा ने बताया, “श्रीहरिकोटा में अगले दो से तीन-महीनों में एक अंतरिक्ष म्यूज़ियम बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे छात्र भारत की अंतरिक्ष यात्रा के बारे में जान पाएंगे. इसरो के साथ करीब 40 विश्वविद्यालय जुड़े हैं जहां से छात्र यहां आते हैं.”

विश्वनाथ शर्मा के अनुसार चूंकि श्रीहरिकोटा में होने वाले कई कामों में जोख़िम होता है, इसलिए 15 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चों का वहां प्रवेश निषेध है. इसरों के अन्य केंद्रों में ये मनाही नहीं है.

इसरो का कहना है कि आने वाले समय में नए संग्रहालयों के साथ कई ऐसे शैक्षिक कार्यक्रम भी चालू किए जा सकते हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति छात्रों का उत्साह बढ़ाएंगे.

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