इन 8 पड़ावों से होकर गुज़रा मंगलयान

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का मंगलयान लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो चुका है. दुनियाभर से इसरो को बधाइयां मिलनी शुरू हो चुकी है.

भारत का मंगल अभियान पहला ऐसा मिशन भी बन गया है जो एक ही बार में मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हुआ.

धरती से मंगल की कक्षा में पहुंचे मंगलयान की कहानी कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुज़री है.

आइए एक नज़र डालते हैं उन महत्वपूर्ण पड़ावों पर:

1. रॉकेट पर सवार मंगलयान उड़ चला

नैनो कार की आकार वाले और क़रीब 1350 किलोग्राम वजनी मार्स ऑर्बिटर मिशन यानी मंगलयान को पिछले साल पांच नवंबर की दोपहर पीएसएलवी रॉकेट से श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया.

2. मंगलयान की दिशा प्रणाली की जांच

सात नवंबर से 16 नवंबर के बीच छह बार मंगलयान की दिशा प्रणाली का परीक्षण किया गया. मकसद था कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए यान को ज़रूरी गति मिल जाए.

3. धरती के प्रभाव से बाहर, मंगल की तरफ़ दिशा निर्धारण

ट्रांस मार्स इंजेक्शन, यानी अंतरिक्ष में मंगलयान के लाल ग्रह की तरफ दिशा देने की प्रक्रिया बीते साल 1 दिसंबर को शुरू हुई और यान 4 दिसंबर को ‘पृथ्वी के प्रभाव’ ले बाहर निकल गया. 11 दिसंबर को दिशा में कुछ और सुधार किए गए.

4. मंगलयान के सौ दिन

इमेज कैप्शन,

मंगलयान का आकार नैनो कार जितना है और इसका वजन 1350 किलोग्राम है.

इसरो के मंगलयान ने इस साल फरवरी की 12 तारीख को अंतरिक्ष में अपने सौ दिन पूरे किए.

5. आधी यात्रा पूरी, कुछ और दिशा सुधार

संतुलित गति से मंगल की तरफ बढ़ते हुए मंगलयान ने 9 अप्रैल तक ही आधी दूरी तय कर ली. इसके बाद जून में इसकी दिशा में एक बार और सुधार किया गया.

6. मंगलयान को धरती का संदेश

सितंबर की 14 और 15 तारीख़ को मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित होने से संबंधित ज़रूरी कमांड भेजे गए.

7. अंतरिक्ष में तैर रहे मंगलयान का सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट

सितंबर की 22 तारीख़ को सुबह करीब 9 बजे, मंगलयान लाल ग्रह की गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गया. इसके करीब साढ़े पांच घंटे बाद यान के लिक्विड एपोजी मोटर, यानी तरल इंजन का चार सेकंड तक चलाकर परिक्षण किया गया.

ये एक अहम टेस्ट था, क्योंकि इस इंजन को करीब 300 दिन बाद चलाया जा रहा था.

8. लाल ग्रह की कक्षा में मंगलयान

24 सितंबर की सुबह सात बजकर 17 मिनट और 32 सेकंड पर इसरो ने यान को धीमा करने के लिए उसका तरल इंजन एक्टिवेट किया. सुबह क़रीब आठ बजे मंगलयान का संदेश इसरो को प्राप्त हुआ जिसके बाद इसकी सफलता की पुष्टि हुई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलयान की सफलता को करीब से देखने के लिए इसरो के कमांड सेंटर में मौजूद रहे.

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