ये हैं मॉम के पीछे की मॉम

  • 25 सितंबर 2014
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के मंगल अभियान में भारतीय महिला वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

इस अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियों को महिला वैज्ञानिकों ने बखूबी निभाया. प्रधानमंत्री ने भी वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए मार्स आर्बिटर मिशन को मातृत्व के संदर्भ में 'मॉम' कहा था.

इस अभियान के उपग्रह से संबंधित विभाग की प्रोजेक्ट मैनेज़र मीनल सम्पत से अंकुर जैन ने बात की.

पढ़ें, बातचीत के अंश

प्रश्नः इसरो के लिए यह मंगल अभियान कितना अहम रहा है?

मीनल सम्पतः मंगल पर जाने की चुनौती हमने खुद ली है कि हम ऐसा करने और उपग्रह को नियंत्रित करने में करने में कितने सक्षम होंगे. मंगल पर पहुंचना हमारे लिए बहुत अहम रहा है. इस मिशन में हमने पूरी कोशिश की है कि छोटी से छोटी चीजों पर भी ध्यान रखा जाए.

प्रश्नः इस अभियान के दौरान आप की भूमिका क्या थी और आप इसे किस तरह देखती हैं?

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मीनल सम्पतः मैं यहां एक खास कैमरा सिस्टम के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर हूं. मेरा काम उपग्रह के पेलोड को बनाना और उसके अलग-अलग पुर्ज़ों को जोड़कर उसका परीक्षण करना है. इसमें इसे बनाने से लेकर उपग्रह को अपनी कक्षा में स्थापित करने तक की ज़िम्मेदारी होती है. जहां तक मंगल मिशन की बात है अभी यात्रा की शुरुआत भर हुई है. आगे बहुत करना बाकी है.

प्रश्नः मंगल मिशन में महिला वैज्ञानिकों की कितनी भागीदारी थी?

मीनल सम्पतः मार्स आर्बिटर मिशन (एमओएम) की पूरी यूनिट को प्रधानमंत्री ने भी 'मॉम' कहा है. इस यूनिट में क़रीब डेढ़ सौ से दो सौ महिला वैज्ञानिकों ने कई मोर्चों पर आगे बढ़कर अहम ज़िम्मेदारियां निभाई हैं.

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प्रश्नः मिशन की सफलता देश की अन्य महिलाओं को क्या संदेश देता है?

मीनल सम्पतः मैं समझती हूं इससे यही संदेश जाता है कि देश में जो महिलाएं सक्षम हैं और जिनमें बहुत कुछ कर गुज़रने की चाहत है, वो देश के लिए अपना योगदान कर सकती हैं. उनमें बहुत ताक़त है और इसे उन्हें जानना होगा कि वो भी कुछ कर सकती हैं. मंगल मिशन की सफलता का महिलाओं के लिए संदेश साफ है कि आगे बढ़िए और अपने परिवार के साथ राष्ट्र निर्माण में भी योगदान करिए. हम जानते हैं कि हमने ऐसा बहुत बार किया है. रानी लक्ष्मीबाई के जमाने से ही भारत निर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है.

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