नए वायरस से उभयचरों के अस्तित्व को ख़तरा

  • 23 अक्तूबर 2014
एलिटेस ओबेस्ट्रिसियन, टोड इमेज कॉपीरइट JAIME BOSCH

वैज्ञानिकों के अनुसार एक नई घातक बीमारी ने उभयचरों (जल और थल दोनों पर रहने वाले जीव) के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है.

उत्तरी स्पेन में पाए गए नए वायरस मेंढकों, टोडों और नई प्रजातियों की जान ले रहे हैं. इन वायरस से पीड़ित जीवों की त्वचा पर घाव के निशान हो सकते हैं और उनकी मौत आंतरिक रक्तस्राव के कारण होती है.

शोधकर्ताओं को आशंका है कि रानावायरस समूह के ये वायरस दूसरे देशों में भी फैल चुके हैं.

यह अध्ययन विज्ञान शोध पत्रिका करेंट बयॉल्जी में प्रकाशित हुआ है.

इस अध्ययन में शामिल यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डॉक्टर स्टीफ़ेन प्राइस के अनुसार, "इसके प्रसार से पहले हमें इस तरह के वायरस की कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन जब से ये मौतें शुरू हुईं, हमें दूसरी जगहों जैसे चीन के कुछ उभयचरों में भी ये मिलने लगे. ऐसा लगता है कि फ्रांस और नीदरलैंड्स में भी ये उभर रहे हैं."

प्रसार की संभावना

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Image caption वैज्ञानिकों के लगता है कि ये वायरस सरीसृपों में फैल सकता है.

इन वायरस से मृत उभयचरों को सबसे पहले स्पेन के 'पिकोस डे यूरोपा नेशनल पार्क' में 2005 में पाया गया था.

इन मौतों की जाँच करने वाले दल पाया कि इनके लिए ये नए प्रकार के वायरस ज़िम्मेदार हैं.

इनमें से दो वायरस, सीएमटीवी सदृश रानावायरस हैं. असमान्य बात यह है कि ये वायरस विभिन्न तरह की प्रजातियों जैसे, मेंढकों, टोडों इत्यादि में फैल सकते हैं.

शोधकर्ताओं का विश्वास है कि ये वायरस सरीसृपों को भी प्रभावित कर सकते हैं.

ये अध्ययन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लंदन, द जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ लंदन, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन, द म्यूज़ियम ऑफ़ साइंस, मैड्रिड और पिकोस डे यूरोपा नेशनल पार्क के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है.

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