छह महीने तक शेरों का पीछा

  • 24 अक्तूबर 2014
वाइल्ड लाइफ़ फ़ोटो प्राइज़ जीतने वाली तस्वीरें इमेज कॉपीरइट MICHAEL NICHOLS

तंज़ानिया के सेरेनगेटी में एक पहाड़ी पर आराम करते शेरों की तस्वीर ने 2014 का 'वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र ऑफ़ द इयर' का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार जीता है.

तस्वीर के फ़ोटोग्राफ़र माइकल निक निकोलस का कहना है कि इसके लिए उन्होंने छह महीने तक इन शेरों का पीछा किया था.

बीबीसी के सहयोग से शुरू हुई यह प्रतिस्पर्धा विश्व की सर्वश्रेष्ठ फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता बन गई है.

जियो फ़्रांस में फ़ोटोग्राफ़ी की डायरेक्टर रहीं और नेशनल जियोग्राफ़िक की अनुभवी मेगडेलेना हरेरा ने प्रतिस्पर्धा में आई तस्वीरों का आकलन किया.

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यह तस्वीर लेने वाले कार्लोस महज़ आठ साल के हैं पर कैमरे की तकनीक पर उनकी ग़ज़ब की पकड़ महसूस की जा सकती है.

डब्ल्यूपीवाई की यह प्रतिस्पर्धा इस वर्ष अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रही है.

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चिली के फ़्रांसिस्को नेगरोनी ने अर्थ इन्वायर्नमेंट पुरस्कार जीता है.

उनकी तस्वीर सक्रिय ज्वालामुखी 'पुवेहुए कॉर्डोन कॉले' की पृष्ठभूमि में चमकती बिजली की है.

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स्वीडन के एंटन लिल्जा ने अपने कैमरे के लैंस में उस लम्हे को क़ैद किया, जब मेढ़कों का एक जोड़ा प्रजनन में लिप्त था.

एंटन ने यह पुरस्कार 15 से 17 साल के वर्ग में जीता.

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एलेक्स बैडयेव अमरीका से हैं और उन्होंने स्तनपायी जीवों की श्रेणी में पुरस्कार जीता है.

पश्चिमी मोंटाना में ली गई इस तस्वीर में उत्तरी अमरीका में मिलने वाला एक चूहा कुकुरमुत्ते के छत्ते पर खड़ा है.

उसकी पृष्ठभूमि में चांद और एक पतंगा साफ़ देखा जा सकता है.

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ब्रुनो डामिकिस की इस तस्वीर को 'वर्ल्ड इन ऑवर हैंड्स' श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ तस्वीर के तौर पर चुना गया है.

इस तस्वीर में ट्यूनीशिया का एक किशोर तीन महीने की एक लोमड़ी की तस्करी करने की कोशिश कर रहा है.

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विल जेन्किंस ब्रिटेन से हैं और 11 से 14 साल की कैटगरी में फ़ाइनल तक पहुंचे.

कोस्टारिका में जिस होटल में वे छुट्टी मना रहे थे, वहां उन्होंने हरे रंग की इस छिपकली को खेलते हुए देखा.

तकनीक के लिहाज़ से यह एक बेहतरीन तस्वीर मानी गई है.

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रोगर डाउडेसवेल ने जब पहली बार वर्ल्ड फ़ोटोग्राफ़ी अवार्ड जीता था, तो उस ज़माने में डिजिटल कैमरा बड़ी बात होती थी.

तब कुछ ही लोग इस प्रतिस्पर्द्धा में भाग ले पाते थे. वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र ऑफ़ द इयर की इस प्रतिस्पर्धा में उम्र के हिसाब से श्रेणियां बनाई गई हैं.

ये श्रेणीबद्ध पुरस्कार देने का सिलसिला इन पुरस्कारों की शुरुआत के साथ 1964 से ही जारी है.

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