इबोलाः प्रायोगिक वैक्सीन का होगा उत्पादन

  • 24 अक्तूबर 2014
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 2015 के अंत तक इबोला के प्रायोगिक दवा की लाखों ख़ुराक तैयार की जाएंगी.

संगठन का कहना है कि 'कई लाख' ख़ुराक साल की पहली छमाही में ही तैयार की जाएंगी.

पश्चिमी अफ़्रीक़ा में इबोला से संघर्ष कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को यह वैक्सीन दिसंबर, 2014 तक ही दी जा सकती हैं.

हालांकि संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए यह वैक्सीन 'जादू की गोली' नहीं है.

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अभी तक कोई वैक्सीन या इलाज ऐसी साबित नहीं हुई है जिससे इबोला पर क़ाबू पाया जा सके.

'साल नहीं हफ़्ते'

इतिहास में इस बीमारी से सबसे बड़े संक्रमण को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) वैक्सीन के विकास को गति देने की कोशिश कर रहा है.

सामान्यतः किसी भी वैक्सीन को तैयार करने और जांच करने में सालों का समय लगता है लेकिन दवा निर्माता अब हफ़्तों के लिहाज़ से काम कर रहे हैं.

पश्चिम अफ़्रीक़ा में उन स्वास्थ्यकर्मियों पर इन दवाओं का सबसे पहले परीक्षण किया जाएगा जो अपनी ज़िंदगी ख़तरे में डालकर मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह दवाएं कितनी कारगर हैं इसके संकेत अप्रैल तक मिल जाएंगे.

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जून 2015 से पहले बड़े पैमाने पर वैक्सीन के प्रयोग की कोई योजना नहीं है लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इसे ख़ारिज भी नहीं किया है.

संगठन का कहना है कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए वैक्सीन महत्वपूर्ण हो सकती हैं, अगर अगले कुछ महीनों में इसके मामलों में कमी आए तो.

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