धूमकेतु पर पहुंचे फ़िलाई की बैटरी को लेकर चिंता

  • 14 नवंबर 2014
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रोबोट यान फ़िलाई के एक धूमकेतु की सतह पर पहुंचने की ऐतिहासिक घटना के बाद इसे शुरुआती समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि यान ने तस्वीरें भेजनी शुरू कर दी हैं.

लेकिन अब चिंता इसकी बैटरी को लेकर है कि वो कितनी देर चलेगी.

यूरोपियन स्पेस एजेंसी द्वारा दस साल पहले प्रक्षेपित किए गए इस यान का मिशन यह जानना था कि सौरमंडल की उत्पत्ति कैसे हुई.

फ़िलाई यान धूमकेतु की सतह से दो बार टकराने के बाद उछलकर एक किलोमीटर तक वापस अंतरिक्ष में चला गया था लेकिन आखिरकार वो वापस धूमकेतु की सतह पर अपने निश्चित स्थान से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थिर हुआ.

अब समस्या यह है कि यान एक पहाड़ी की छाया में खड़ा है और उसे अपनी बैटरी को चार्ज करने के लिए सूरज की रोशनी चाहिए. इसकी बैटरी के कुछ ही देर में खत्म हो जाने का डर है.

लैंडिंग मैनेजर स्टेफ़ान उलामेक ने पत्रकारों को बताया कि जैसे-जैसे धूमकेतु सूरज के नज़दीक पहुंचता है, यान के सोलर पैनल दोबारा काम करना शुरू कर सकते हैं.

वो कहते हैं,"बैटरी के खत्म होने के बाद भी मिशन खत्म नहीं होगा. बैटरी के ठंडा होने के बाद यान अस्थायी तौर पर बंद हो जाएगा लेकिन उसे जब भी सूरज की उर्जा मिलेगी, बैटरी चार्ज होना शुरू हो जाएगी. इसलिए महीनों तक शांत रहने के बाद भी हम यान को दोबारा शुरू कर सकते हैं."

तस्वीरें

एक दूसरे वैज्ञानिक जां पिएर बिबरिंग ने यान की ओर से भेजी गई तस्वीरों के बारे में बताया.

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Image caption रोबोट यान फ़िलाई इस समय धूमकेतु पर एक पहाड़ी की छाया में खड़ा है.

उन्होंने कहा, "यह यान एक पहाड़ी के साये तले है और आपको जल्दी ही समझ में आ जाएगा कि ये समस्या की वजहों में से एक है. आप मुझसे यह मत पूछिए कि यान पहाड़ी से कितनी दूर है. ये शायद कुछ मीटर दूर ही होगा. इस कारण स्थायी तौर पर ये यान पहाड़ी की छाया में ही रहेगा और ये समस्या का एक कारण है."

फ़िलाई यान द्वारा ली गईं आसपास की तस्वीरों में दिख रहा है कि ये किसी दीवार जैसी चीज़ से दबा हुआ है.

ऐसा लगा रहा है कि यान किसी ढलान पर है. उसके चार में से तीन पाए ज़मीन से उठे हुए हैं. लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसे सूरज की रोशनी नहीं मिल पा रही है.

धूमकेतु 12 घंटों में एक बार पूरा घूम रहा है. इस कारण फिलाई को हर 12 घंटों में से मात्र डेढ़ घंटे ही रोशनी मिल पा रही है.

फ़िलाई को जब धूमकेतु की ओर छोड़ा गया था तब उसकी बैटरी करीब 60 घंटों के लिए चार्ज थी. इसलिए माना जा रहा है कि ऐसी हालत में फ़िलाई शनिवार से अधिक से अधिक काम नहीं करेगा.

जर्मनी के डर्मस्टॉड में यूरोपीय स्पेस एजेंसी के पाओलो फेरी ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर और शनिवार की दोपहर के बीच किसी भी समय बैटरी का चार्ज समाप्त हो जाएगा.

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