टेढ़ी नौकरी यानी बुढ़ापे में बेहतर याददाश्त

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वकील और ग्राफ़िक डिजाइनर जैसे पेशेवर जो ज़्यादा दिमागी कसरत करते हैं, उम्र के आख़िरी दौर में अच्छी याददाश्त के मालिक होते हैं.

स्कॉटलैंड में एक हज़ार लोगों पर किए गए एक सर्वे में ये बात सामने आई है.

इस सर्वे में भाग लेने वाले लोग उम्र के सातवें दशक में थे और उनका पेशा ज़हनी तौर पर पेचीदगी भरा कहा जा सकता था, लेकिन याददाश्त और सोचने-समझने की काबिलियत के इम्तहान में वे खरे उतरे.

अधिक उत्तेजनापूर्ण माहौल में रहने से ढलती उम्र के बावजूद उनके दिमाग में 'जानकारी का खजाना' बने रहने में मदद मिलती है.

कामकाजी जिंदगी

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एडिनबरा यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम की यह रिपोर्ट न्यूरोलॉजी मैगज़ीन में प्रकाशित हुई है.

इस सर्वे में जिन लोगों ने भाग लिया था उन्होंने एक प्रश्नावली के ज़रिए अपनी कामकाजी ज़िंदगी के बारे में जानकारी दी.

प्रबंधन और शिक्षण के पेशे से जुड़े लोगों को याददाश्त के इम्तेहान में अच्छे नंबर मिले क्योंकि उन्हें आंकड़ों और सूचनाओं से जूझना होता है.

लेकिन फैक्टरी मज़दूर या जिल्दसाज़ी जैसे पेशों से जुड़े लोगों को कम नंबर मिले क्योंकि उनका काम बौद्धिक तौर पर कम जटिल माना जाता है.

बौद्धिक क्षमता

रिसर्च टीम के लीडर डॉक्टर एलन गोव कहते हैं, "जांच के नतीजों से ये समझने में मदद मिली है कि जिन पेशों में अच्छी याददाश्त और समझदारी की जरूरत होती है उनसे जुड़े लोगों का बुढ़ापा बेहतर होता है."

हालांकि इन नतीजों तक पहुँचने के लिए सर्वे में यह भी ध्यान में रखा गया कि भाग लेने वाले व्यक्तियों की बौद्धिक क्षमता 11 साल की उम्र में क्या थी.

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