कितनी बड़ी उपलब्धि है जीएसएलवी-एमके 3 लॉन्च?

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अब तक के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3 को प्रक्षेपित किया है. इस प्रक्षेपण को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला बता रहे हैं कि इस उपलब्धि के राष्ट्रीय और अतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या मायने हैं.

1. अभी तक हिंदुस्तान दो टन के सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेज सकता था, लेकिन इस रॉकेट के प्रक्षेपण से आने वाले वक्त में चार टन के सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा. और सबसे बड़ी बात ये कि भारी सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए अब भारत को दूसरे देशों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा. यानी आने वाले समय में भारत आत्म-निर्भर होगा, जिससे हमारा खर्चा तो कम होगा ही साथ ही भारतीय वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.

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2. इस रॉकेट को 160-170 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है, जो दुनिया की बाकी स्पेस एजेंसियों के मुकाबले केवल आधा ही खर्चा है. दुनिया में होड़ सी लगी रहती है कि किस तरह से सस्ता और पुख्ता अंतरिक्ष मिशन को अंजाम दिया जाए. भारत ने दुनिया को अब ये दिखा दिया है कि कम पैसे में भी सफल स्पेस अभियान हो सकते हैं.

3. अंतरिक्ष में अपना दबदबा बनाने के लिए जैसे-जैसे भारत एक के बाद एक सफल छलांग लगा रहा है, उसे देख कर लगता है कि स्पेस रेस में भारत की साख जमेगी. अगर एशियाई स्पेस रेस की बात की जाए तो भारत चीन से हमेशा पीछे रहा है, लेकिन मंगलयान के बाद मार्स की रेस में हिंदुस्तान चीन से आगे बढ़ गया है.

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4. अब भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी दूसरे देशों के सैटेलाइट भेजने में उनकी मदद कर सकेगी. मंगलयान से लेकर चंद्रयान और जीएसएलवी-एमके 3 के प्रक्षेपण की सफलता के बाद अब दूसरे देश अपने कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च के लिए भारतीय स्पेस ऐजेंसी का रुख करेंगें.

उसके दो कारण हैं – एक तो ये कि भारत के पास सस्ती तकनीक मौजूद है और दूसरा ये कि हमारी गुणवत्ता अब वैश्विक स्तर पर साबित हो चुकी है. यानि अरबों डॉलर के लॉन्च मार्किट में भारत अपने लिए एक विश्वसनीय जगह बना पाएगा.

5. इस सफलता के बाद आने वाले 10-15 सालों में भारत अपने अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भेज सकेगा. आज की पीढ़ी में जो बच्चे ऐस्ट्रोनॉट बनने की चाह रखते हैं, उनके लिए अब एक नया आयाम खुलेगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. इन्हीं बच्चों में से कोई न कोई भारत से अंतरिक्ष जाने वाला या वाली पहली ऐस्ट्रोनॉट बन सकेगी. जब वो दिन आएगा तो भारत चौथा देश होगा जो अपने बूते पर अंतरिक्ष में ऐस्ट्रोनॉट भेज सकता है. अब तक केवल रूस, चीन और अमरीका ही ये उपलब्धि हासिल कर पाएं हैं.

(बीबीसी संवाददाता शालू यादव से बातचीत पर आधारित)

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