'बुरी किस्मत' से हो जाते हैं कई कैंसर

  • 2 जनवरी 2015
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अधिकांश कैंसर धूम्रपान जैसी हानिकारक चीजों से नहीं बल्कि 'बुरी किस्मत' से हो सकता है. अमरीकी टीम के शोध में ये बात सामने आई है.

इस शोध में ये बताने की कोशिश की गई है कि आखिर क्यों एक ऊतक(टिशू) किसी दूसरे टिशू के मुकाबले करोड़ों गुना अधिक संवेदनशील होता है.

साइंस पत्रिका में प्रकाशित शोध के नतीजे बताते हैं दो-तिहाई प्रकार के कैंसर व्यक्ति की जीवनशैली की तुलना में केवल 'संयोगवश' से हो जाते हैं.

कैंसर की जड़

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जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडीसिन और ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने बताया कि ऐसा क्यों होता है.

स्टेम कोशिकाओं के लगातार विभाजित होने से आपके शरीर की पुरानी और बेजान कोशिकाएं नई कोशिकाओं में तब्दील होती रहती हैं.

और हर विभाजन में हानिकारक म्यूटेशन का खतरा होता है. और यही खतरा स्टेम कोशिकाओं को कैंसर के एक कदम और करीब ला देता है.

अब इस बदलाव की गति समूचे शरीर में अलग अलग होती है.

कोई बचाव नहीं

शोधकर्ताओं ने एक तुलनात्मक अध्ययन किया कि कैसे पूरे जीवन स्टेम कोशिकाएं 31 टिशू में विभाजित होती हैं और कैसे उन टिशूज़ से कैंसर के पैदा होने का खतरा होता है.

उनके अध्ययन का सार ये रहा कि दो-तिहाई तरीके के कैंसर स्टेम कोशिकाओं के विभाजित होने और म्यूटेशन से प्रभावित होने से होते हैं, जिसे एक बुरा संयोग ही माना जा सकता है.

Image caption अमरीकी वैज्ञानिकों की टीम ने ये शोध किया है.

बुरे संयोग से होने वाले कैंसर में मस्तिष्क कैंसर, छोटी आंत का कैंसर और पैनक्रियाज़ के कैंसर शामिल हैं.

शोधकर्ता और ऑन्कोलॉजी के सहायक प्रोफेसर क्रिस्टियन टोमासेट्टी मानते हैं कि ऐसे कैंसर में बचाव का तरीका किसी काम नहीं आता.

बचे हुए एक तिहाई तरह के कैंसर ख़राब जीवन शैली के कारण होते हैं जिसमें धूम्रपान से होने वाला फेफड़े का कैंसर भी शामिल है.

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